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BS09 . प्रेरक संत-संस्मरण || ऐसे प्रेरणादायक कहानियाँ, उपदेश और अनुभवों का संग्रह जो जीवन सफल कर दे।

प्रेरक संत-संस्मरण

     प्रभु प्रेमियों !  'प्रेरक संत-संस्मरण'  में संतों के जीवन से जुड़ी प्रेरणादायक कहानियाँ और उनके उपदेश शामिल किया गया हैं, जो लोगों को जीवन में अच्छे कर्म करने और सही रास्ते पर चलने के लिए प्रेरित करते हैं। ये संस्मरण अक्सर संतों के अनुभवों, उनके शिष्यों और समाज पर उनके प्रभाव को दर्शाते हैं, जिससे व्यक्ति के जीवन को बेहतर बनाने में मदद मिलती है। इस पुस्तक में पूज्य गुरुदेव की डायरी से उनके हस्तलिखित संत-महापुरुषों की जीवनी को भी सबके पढ़ने, समझने योग्य बनाने के लिए उसे भारती अंकन रूप एवं कठिन शब्दों को सरल रूप में दिया गया है । आइये इस पुस्तक के बारे में जानकारी प्राप्त करें--

पूज्यपद गुरुसेवी भागीरथ साहित्य सीरीज की दूसरी पुस्तक  "BS08 . गुरुदेव की डायरी"  के बारे में जानकारी प्राप्त करने के लिए 👉  यहाँ दवाएँ।   


प्रेरक संत-संस्मरण
प्रेरक संत-संस्मरण

प्रेरणादायक कहानियाँ, उपदेश और अनुभवों पर आधारित ग्रंथ 'प्रेरक संत-संस्मरण' का एक परिचय

     मुझे वर्षों पूज्य गुरुदेव (महर्षि मँहाँ परमहंसजी महाराज) की नजदीकी सभी प्रकार की सेवा करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। सेवाकाल में ही कुछ-कुछ पूज्य गुरुदेव द्वारा घटित घटनाओं को मैं लिपिबद्ध करता जाता था, जिसको मैंने दो पुस्तकों 'महर्षि मँहाँ के दिनचर्या और उपदेश' और 'अपने गुरु की याद में' दिया है। इसके बाद किसी-किसी प्रसंग में पूज्य गुरुदेव से संबंधित बातें याद हो जाती हैं। इन बातों को सुनकर साथ में रहनेवाले साथियों और सत्संग प्रेमियों ने आग्रह किया कि यह बात तो प्रकाशित नहीं हुई है। यह बात भी प्रकाशित हो जाए तो सत्संगी समाज को लाभ होगा। इन सत्संग-प्रेमियों के कहने पर मैंने कुछ संस्मरण लिखना प्रारंभकिया। इसके साथ-साथ महर्षि मँहाँ आश्रम, कुप्पाघाट से संबंधित कुछ प्रारंभिक बातों को और पूज्य गुरुदेव की संक्षिप्त जीवनी को भी लिखा। इस पुस्तक में पूज्य गुरुदेव की डायरी से उनके हस्तलिखित संत-महापुरुषों की जीवनी को भी सबके पढ़ने, समझने योग्य बनाने के लिए उसे भारती अंकन रूप एवं कठिन शब्दों को सरल रूप में दिया गया है तथा इस पुस्तक का नाम 'प्रेरक संत संस्मरण' रखा गया है। मैं पूज्य गुरुदेव से प्रार्थना करता हूँ कि इस पुस्तक के अध्ययन से पाठकों को अवश्य आध्यात्मिक लाभ हो।   "गुरु परणामित -જીગીરથ 13-08-2018 ई. 

प्रेरक संत-संस्मरण 01
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प्रेरक संत-संस्मरण 02
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प्रेरक संत-संस्मरण 03
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प्रेरक संत-संस्मरण 04
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प्रेरक संत-संस्मरण 05
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प्रेरक संत-संस्मरण 06
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प्रेरक संत-संस्मरण 07
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प्रेरक संत-संस्मरण 08
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प्रेरक संत-संस्मरण 09
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प्रेरक संत-संस्मरण 10
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प्रेरक संत-संस्मरण 11
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प्रेरक संत-संस्मरण 12

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प्रेरक संत-संस्मरण 14
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प्रेरक संत-संस्मरण 15
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प्रेरक संत-संस्मरण 16
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प्रेरक संत-संस्मरण 19
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प्रेरक संत-संस्मरण 20
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प्रेरक संत-संस्मरण 21
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प्रेरक संत-संस्मरण 22
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प्रेरक संत-संस्मरण 23
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प्रेरक संत-संस्मरण 24
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प्रेरक संत-संस्मरण 27
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प्रेरक संत-संस्मरण 28
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     'प्रेरक संत-संस्मरण ' पुस्तक के बारे में इतनी अच्छी जानकारी के बाद आपके मन में अवश्य विचार आ रहा होगा कि यह पुस्तक हमारे पास अवश्य होना चाहिए। इसके लिए आप 'सत्संग ध्यान स्टोर' से इसे ऑनलाइन मंगा सकते हैं और महर्षि मेँहीँ आश्रम, कुप्पाघाट से भी इसे ऑफलाइन में खरीद सकते हैं। आपकी सुविधा के लिए 'सत्संग ध्यान स्टोर' का लिंक नीचे दे रहे हैं-


प्रेरक शब्दावली



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प्रेरक संत-संस्मरण

विषय-सूची

क्रमांक           विषय

१. संतमत सत्संग की स्तुति-विनती और आरती

२. समर्पण

३. दो बातें

४. प्रकाशकीय

५. भूमिका

६. महर्षि मँहाँ परमहंसजी महाराज की संक्षिप्त जीवनी

७. महर्षि मँहीँ आश्रम कुप्पाघाट, भागलपुर का संक्षिप्त....

८. आश्रमवासियों के लिए स्थायी नियमावली

( प्रथम खण्ड )

१. गुरुदेव की सहनशीलता

२. देवी-देवताओं का सम्मान

३. गृहस्थ के लिए कर्म काण्ड

४. ये सही जज नहीं हैं

५. वैदिक को धोती पहनना चाहिए

६. मूर्ति बनाने की मनाही

७. सब काम मँहीं दास से ही कराना चाहता है

८. भगवान बुद्ध नास्तिक नहीं, आस्तिक थे

९. जानते हो, यह कौन जात है

१०. रोग. भोग भर रहेगा

११. भोग कट रहा है

१२. प्रत्यक्ष को छोड़ अप्रत्यक्ष का?

१३. अपने लिये सोचो

१४. जिसकी आँगन उसकी नाच

१५. अनुभूति हेतु पुरुषार्थ

१६. हे माया!

१७. बिना स्नान किये अन्न मत खाओ?

१८. शरीर का अंत है, काम का नहीं

१९. चैती मिठाई

२०. साग खाने से लाभ

२१. कुतिया पर दया

२२. दानपेटी में दान

२३. मिट्टी हटा दो

२४. संध्या का महत्त्व

२५. जमदीरी जला दो

२६. चन्द्रग्रहण में स्नान

२७. सत्तू का पर्व

२८. आगे समुझ पड़ेगा भाई

२९. कीड़ा खिलाओगे?

३०. गुफा की सुरक्षा का ख्याल?

३१. सत्संग से प्रेम

३२. तीन बार पढ़वाने का रहस्य

३३. आज्ञा-उल्लंघन का परिणाम

३४. रोटी बनाने की मनाही

३५. पानी लेकर बैठना चाहिए

३६. साधु का भूषण संयम

३७. अस्वस्थ हालत में निगरानी

३८. संस्था के नियम-पालन

३९. जूठन देने से हानि

४०. अन्न बर्बाद नहीं करना चाहिए

४१. शीशम पत्ते से लाभ

४२. हँसकर नहीं बोलना चाहिए

४३. चढ़ावा में अनेक कामना

४४. झींगा की सब्जी कोई मत खाना










५४. शरद् पूर्णिमा का महत्त्व

५५. खिड़हरी

५६. चौरासी लाख के अंतर्गत मनुष्य-शरीर

५७. ना कुछ नेती ना कुछ धोती

५८. रातभर पढ़ते रहे

५९. डूबने से रक्षा

६०. गुरुकृपा से चूर हड्डी पूर्ववत्

६१. प्राण की रक्षा

६२. आर्त्त भक्त को दर्शन

६३. किन्हीं के ऊपर भार नहीं देना चाहिए

६४. संग से संस्कार का निर्माण

६५. चार काम का निषेध

६६. दीक्षा नहीं मिली

६७. कुछ भी आलस्य नहीं

६८. भक्त की श्रद्धा स्वीकार

६९. नागा साधु को सम्मान

७०. बंगला भाषा में उपदेश

७१. समझदारी बढ़े

७२. भ्रम दर्शन

७३. गुरुदेव का पेड़-पौधों के प्रति प्रेम

७४. निंदनीय चन्दा

७५. प्रेम की परीक्षा

७६. भजन-भेद

७७. आरती के संबंध में

७८. स्वागत-गान

७९. पाठ के आधार पर बोलना चाहिए

८०. एक गुरु के जयकार में सबका जयकार

८१. ध्यानाभ्यास में भंडारा

८२. रात में जगकर ध्यान करें

८३. बोलने का तरीका

८४. व्यावहारिक ज्ञान

८५. गुरुदेव की गुरुधाम यात्रा

८६. पहले गुरु की वंदना करनी चाहिए

८७. अपने घर में विदाई नहीं होती है

८८. देश-काल-पात्र का ख्याल

८९. गृहस्थ को विदाई लाभप्रद नहीं

९०. संत की दया से रक्षा

९१. एक सत्संगी को यश दिलाना

९२. एक बच्ची पर दया

९३. प्रणाम के संबंध में

९४. सोना में कलियुग का वास

९५. बुखार आ गया

९६. सुरत का सिमटाव

९७. सत्य बोलने से दया

९८. एकनिष्ठ भक्ति का संकेत

९९. दो जेब-घड़ी मँगवाना

१००. रुपये अस्वीकार

१०१. बच्चे पर दया

१०२. आवश्यकता से ज्यादा खर्च नहीं

१०३. देश के नियम का पालन

१०४. यह अंधी श्रद्धा है

१०५. मेरा कर्तव्य होता है सम्मान करना

१०६. कर्ज नहीं रखना चाहिए

१०७. हास्य प्रसंग से लाभ

१०८. अज्ञात कृपा

१०९. गाय को आराम मिलती है

११०. अँतड़ी जल गयी

१११. साम्प्रदायिक सद्भाव

११२. चॉकलेट मत देना

११३. बात अनसूनी करने का परिणाम

११४. गुरुजन के सामने अपना आसन नहीं लगाना चाहिए

११५. कपड़े का आयरन

११६. सभी धर्मावलंबी को ध्यानाभ्यास करना चाहिए

११७. जागृत जिन्दा सतगुरु जग में प

११८. निःसंकोच प्रणाम

११९. अस्थि-कलश स्थापना का संकेत


(  द्वितीय खण्ड  )


(गुरुदेव महर्षि मेँहीँ परमहंसजी महाराज की डायरी की हस्तलिखित संत-जीवनी) 

१. भगवान बुद्ध महाराज

२. ईसा मसीह

३. मुहम्मद शाह

४. शंकराचार्य

५. श्रीरामानुज

६. स्वामी रामानन्द

७. संत कबीर साहब

८. गुरु नानक साहब

९. गुरु अंगददेव

१०. गुरु अमरदास

११. गुरु रामदासजी

१२. गुरु अर्जुनदेव

१३. गुरु हरिगोविन्द सिंहजी

१४. गुरु हरिरायजी

१५. गुरु हरिकृष्णजी

१६. गुरु तेगबहादुर

१७. गुरु गोविन्द सिंह

१८. संत रैदासजी

१९. संत दादू साहब

२०. गोस्वामी तुलसीदास

२१. मीराबाई जी

२२. संत नाभा जी

२३. संत दरिया साहब (बिहारवाले)

२४. दरिया साहब (मारवाड़वाले)

२५. संत चरणदासजी महाराज

२६. दयाबाई जी

२७. महात्मा गरीब दासजी

२८. संत यारी साहब

२९. संत बुल्ला साहब

३०. संत जगजीवन साहब

३१. संत गुलाल साहब

३२. संत भीखा साहब

३३. संत पलटू साहब

३४. केशव दास साहब

३५. बाबा धरनीदास साहब

३६. संत शिवनारायण स्वामी

३७. दुलन दासजी

३८. संत तुलसी साहब

३९. राधास्वामी

४०. वृन्दावन जी

४१. राय शालिग्राम साहब

४२. प्रणामी पंथ के श्रीदेवचन्दजी

४३. अरहन जी

४४. महादेव लाल

४५. संत नामदेवजी

४६. माधवाचार्य

४७. वीरभान जी


इति बिना सूची



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     प्रभु प्रेमियों ! गुरुसेवी स्वामी भगीरथ साहित्य सीरीज में आपने 'प्रेरक संत-संस्मरण' नामक पुस्तक के बारे में जानकारी प्राप्त की. आशा करता हूं कि आप इसके सदुपयोग से इससे से समुचित लाभ उठाएंगे. इतनी जानकारी के बाद भी अगर आपके मन में किसी प्रकार  का कोई शंका या कोई प्रश्न है, तो हमें कमेंट करें ।  इस लेख के बारे में अपने इष्ट मित्रों को भी बता दें, जिससे वे भी इससे लाभ उठा सकें। सत्संग ध्यान ब्लॉग का सदस्य बने। इससे आपको आने वाले हर पोस्ट की सूचना नि:शुल्क आपके ईमेल पर मिलती रहेगी। ऐसा विश्वास है । जय गुरु महाराज 🙏🙏🙏 



समय एवं ज्ञान का महत्व
समय एवं ज्ञान का महत्व

      समय एवं ज्ञान का महत्व (संकलित) : समय और ज्ञान दोनों ही जीवन में सफलता और सार्थक होने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। समय अमूल्य है क्योंकि यह एक बार बीत जाने के बाद वापस नहीं आता, जबकि ज्ञान हमें सही-गलत का भेद सिखाता है और हमारे जीवन को बेहतर बनाता है। समय का सदुपयोग करने से हम अपने लक्ष्यों को प्राप्त कर सकते हैं, संगठित रह सकते हैं और अधिक उत्पादक बन सकते हैं। ज्ञान हमें निर्णय लेने में मदद करता है, अज्ञानता और शंकाओं को दूर करता है, और हमारे जीवन को उद्देश्यपूर्ण बनाता है।   इसमें समय और ज्ञान के महत्व को दर्शाने वाला सद्गुरु महर्षि मेँहीँ  परमहंस जी महाराज का दुर्लभ प्रवचन प्रकाशित किया गया है और साथ में  प्रातः, संयंकालीन स्तुति प्रार्थना भी दिया गया है ।  जिससे कि सभी नए सत्संगी इस पुस्तक का पाठ करके रोजाना अपने मानव जीवन को सफल बनाने का काम कर सके।   ज्यादा जाने ) 

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BS09 . प्रेरक संत-संस्मरण || ऐसे प्रेरणादायक कहानियाँ, उपदेश और अनुभवों का संग्रह जो जीवन सफल कर दे। BS09 . प्रेरक संत-संस्मरण  || ऐसे प्रेरणादायक कहानियाँ, उपदेश और अनुभवों का संग्रह जो जीवन सफल कर दे। Reviewed by सत्संग ध्यान on 12/01/2025 Rating: 5

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