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"महर्षि मेंहीं पदावली- शब्दार्थ, भावार्थ और टिप्पणी" एक परिचय व विक्री

महर्षि मेंहीं पदावली- शब्दार्थ, भावार्थ और टिप्पणी सहित

       प्रभु प्रेमियों ! भारतीय साहित्य में वेद, उपनिषद, उत्तर गीता, भागवत गीता, रामायण आदि सदग्रंथों का बड़ा महत्व है। इन्हीं सदग्रंथों जैसा परम पूजनीय ग्रंथ 'महर्षि मेंहीं पदावली' हम  संतमतानुयायियों के लिए है। जिसका शब्दार्थ, भावार्थ और टिप्पणी पूज्य पाद लाल दास जी महाराज द्वारा एवं अन्य महापुरुषों के द्वारा किया गया है । आइए इस पुस्तक के बारे में कुछ मुख्य-मुख्य जानकारियां प्राप्त करें-

"महर्षि मेंहीं पदावली- शब्दार्थ, भावार्थ और टिप्पणी" एक परिचय व विक्री


महर्षि मेंही पदावली मूल प्रति एवं सटीक पुस्तक
प्रभु प्रेमियों ! पदावली के मूल संस्करण एवं उसका सटीक संस्करण निम्नांकित चित्रों में देखें। विशेष कभर युक्त संस्करण भी निकला है, जिसे पुस्तकालय संस्करण कहते हैं। यह संग्रहनीय है।


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पदावली बिक्री

पुस्तक परिचय व ऑनलाइन बिक्री

     इस पुस्तक की जितनी भी बड़ाई की जाए कम है; क्योंकि संत वाणियों एवं गुरु महाराज के पुस्तकों का पूरी तरह से अध्ययन किए बिना इस पुस्तक को अच्छी तरह से कोई नहीं लिख सकता। गुरु महाराज के प्रत्येक पद की व्याख्या, भावार्थ और टिप्पणी करते समय उद्धरण का ठोस  नमूना  दिया गया है। जो अपने आप में अनूठी है। इस पुस्तक के विषय में अन्य महापुरुषों एवं स्वयं लेखक के क्या विचार हैं वह निम्नलिखित लेेखचित्र से ज्ञात होता है-


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महर्षि मेंहीं पदावली शब्दार्थ भावार्थ और टिप्पणी मुख्य कबर


"महर्षि मेंहीं पदावली- शब्दार्थ, भावार्थ और टिप्पणी" प्रकाशकीय
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"महर्षि मेंहीं पदावली- शब्दार्थ, भावार्थ और टिप्पणी" /प्रकाशकीय पृष्ठ दो
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ऑनलाइन एवं  ऑफलाइन खरीदारी के लिए 

प्रभु प्रेमियों ! आपलोगों की जानकारी के लिए बता दें, इस पुस्तक की कई टीकाएं लिखी जा चुकी हैं। और यह पुस्तक अभी मूल रूप में भी बिकती है। महर्षि मेंहीं पदावली के विभिन्न रूपों को  खरीदने के लिए लिंक-


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पदावली का पीडीएफ फाइल श्रीधर बाबा

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महर्षि मेंहीं पदावली की भजन-सूची

प्रभु प्रेमियों ! इस भजन  सूची में आपको जिस भी भजन के बारे में जानना है, उस भजन पर दबाने से आप उस पेज पर चले जाएंगे, जहां पर उस भजन के बारे में विस्तार से चर्चा किया गया है।

अ  
आ    
 ४९ आहो भाई होऊ गुरु आश्रित हो ७२ आओ वीरो मर्द बनो अब ११३ आगे माई सतगुरु खोज करहु 127, आहो भक्त सार भगति करु हो १२८ आहो प्रेमी करु प्रेम प्रभु सए हो १२९ आहो ज्ञानी ज्ञान गुनी प्रभु भजु हो १३९ आरति तन - मंदिर में कीजै . १४० आरति परम पुरुष की कीजै ।  १४१ आरति अगम अपार पुरुष की 00 आरति संग सतगुरु के कीजै ( संत तुलसी साहब )
 ए+ऐ    
 १८ गुरू गुरू मैं करौं पुकारा । १९ गुरुदेव दानि तारण । २० गुरु मम सुरत को गगन पर चढ़ाना  २१ गुरु खोलिये वज़ कपाट । २२ गुरु कीजै भवनिधि पार। ५० गुरु के शरण गहु , धन धन गुरु कहु । ६५ गंग जमुन युग धार ६६ गंग जमुन सरस्वती संगम पर ९१ गुरु गुरु त्राहि गुरु । ९४ गरु नाम गुरु नाम गुरु नाम ९५ गुरु धन्य हैं गुरु धन्य हैं । ९६ गुरु दीनदयाला नजर निहाला १०६ गुरु सतगुरु सम हित नहिं कोऊ १०८ गुरु को सुमिरो मीत । १३६ गुरु हरि चरण में प्रीति हो १४४ गुरु जुगती लय घट पट टारौं ।
घ    
 ४ जय जय परम प्रचण्ड तेज तम मोह विनाशन । १६ जय जयति सद्गुरु जयति जय जय। ७५ जहाँ सूक्ष्म नाद् ध्वनि आज्ञा । ७९ जय जय राम जय जय राम । ८० जय जय राम जय जय रामा कहु राम । १०३ जीव उद्धार का द्वार पुकार कहीं । १२१ जनि लिपटो रे प्यारे जग परदेसवा। १३२ जौं निज घट रस चाहो। १३५ जीवो ! परम पिता निज चीन्हो १३८ जेठ मन को हेठ करिये 
 त   
  ३० भजु मन सतगुरु सतगुरु। ७० भाई योगह्रदयवृत्तकेन्द्रविन्दु जो चमचम । ७७ भजो सतनाम सतनाम सतनाम ए ८३ भजो हो गुरु चरण कमल ८४ भजु मन सतगुरु दयाल , काटें जम जाला ८५ भजु मन सतगुरु दयाल , गुरु दयाल प्यारे। ८६ भजो हो मन गुरु उदार । ८७ भजो भजो गुरु नाम हो प्यारे ८८ भजो गुरु नामा , लहु विश्रामा । ८९ भजो साध गुरु साध गुरु साध गुरु ए । ९० भजो सत्यगुरु सत्यगुरु सत्यगुरु ए ९२ भजो भजो गुरुदेव हो भाई
म    
 १ सब क्षेत्र क्षर अपरा परा पर। २ सब सन्तन्ह की बडि बलिहारी . 6 सन्तमत - सिद्धान्त ( गद्य ) ८ सन्तमत की परिभाषा ( गद्य ) १० सत्यपुरुष की आरति कीजै . १३ सर्वेश्वरं सत्य शान्तिं स्वरूप १५ सद्गुरु नमो सत्य ज्ञानं स्वरूपं १७ सतगुरु सुख के सागर २८ सतगुरु दाता सतगुरु दाता २९ सतगुरु दरस देन हित आए ३१ सतगुरु जी से अरज हमारी ३२ सतगुरु साहब की बलिहारी। ४४ सन्तमते को बात , कहूँ साधक हित लागी ४६ सृष्टि के पाँच हैं केन्द्रन ४७ सुनिये सकल जगत के वासी ५९ सुखमन झलझल विन्दु झलके ६२ सुषमनियाँ में मोरी नजर लागी ६३ सुष्मनियाँ में नजरिया थिर होइ ६४ सुखमन के झीना नाल से ६९ सुरति दरस करन को जाती ७३ साँझ भये गुरु सुमिरो भाई। ७८ सतनाम सतनाम सतनाम भज ८२ सब भव भय भंजन सतगुरू गुरुदेव गुरु । ९९ सत्य ज्ञान दायक गुरु पूरा १०० सतगुरु सत परमारथ रूपा १०२ सन्तन मत भेद प्रचार किया १०४ सतगुरु सतगुरु नितहि पुकारत १०५ सतगुरु चरण टहल नित करिये । १०९ सतगुरु सेवत गुरु को सेवत । ११० सतगुरु पद बिनु गुरु भेटत नाहीं ११४ सम दम और नियम यम । ११८ सुरत सम्हारो अधर चढाओ १२३ समय गया फिरता नहीं
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हम आशा करते हैं कि आप उपर्युक्त चित्रों का पाठ करके इस पुस्तक के बारे में अच्छी तरह से समझ गए होंगे और इस पुस्तक को अवश्य ही खरीदना चाहेंगे। इतनी जानकारी के बाद भी अगर आपके मन में किसी प्रकार का शंका या कोई प्रश्न है, तो हमें कमेंट करें। इस लेख के बारे में अपने इष्ट मित्रों को भी बता दें, जिससे वे भी इससे लाभ उठा सकें। सत्संग ध्यान ब्लॉग का सदस्य बने। इससे आपको आने वाले हर पोस्ट की सूचना नि:शुल्क मिलती रहेगी। इस वीडियो में गुरु महाराज के पुस्तकों के बारे में बताया गयाा हैै।



सद्गुरु महर्षि मेंहीं साहित्य सुमनावली

1. सत्संग - योग ( चारो भाग )  2 . विनय - पत्रिका - सार सटीक 3 . महर्षि मेंहाँ - वचनामृत , प्रथम खंड 4 . सत्संग - सुधा , प्रथम भाग 5 . सत्संग सुधा , द्वितीय भाग 6 . सत्संग - सुधा , तृतीय भाग 7 . सत्संग - सुधा , चतुर्थ भाग 8 . भावार्थ - सहित घटरामायण - पदावली 9 . वेद दर्शन - योग 10 . ईश्वर का स्वरूप और उसकी प्राप्ति 11 . ज्ञान - योग - युक्त ईश्वर भक्ति 12 . संतवाणी सटीक 13 . श्रीगीता - योग - प्रकाश 13.क  श्री गीतााा योग प्रकाश   (अंग्रेजी अनुवाद) 14 . रामचरितमानस - सार सटीक 15 . मोक्ष दर्शन 15 क. मोक्ष दर्शन (अंग्रेजी अनुवाद) 16 . महर्षि मॅहीं - पदावली 17 . महर्षि मेंहीं सत्संग - सुधा सागर 1 . 18 . महर्षि मेंहीं सत्संग - सुधा सागर 2



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