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S07. पूज्यपाद लालदास साहित्य-सूची || आचार्य लालदास की लिखित संपादित पुस्तकों का सामान्य परिचय

छोटेलाल दास की लिखित - सम्पादित पुस्तकें

     पूज्यपाद लालदास जी महाराज या छोटेलाल दास जी महाराज संतमत के वेदव्यास, परम विद्वान एवं सद्गुरु महर्षि मेंहीं परमहंस जी महाराज को समर्पित शिष्यों में से हैं। इनकी पुस्तकों में सद्गुरु महर्षि मेंहीं परमहंस जी महाराज की पुस्तकों को सामान्य भाषा में कैसे समझा जा सकता है, ज्यादातर इन्हीं बातों पर आधारित होता है। यह इनके आध्यात्मिक ज्ञान को सामान्य लोगों को समझने में काफी सहायता प्रदान करता है। इनकी पुस्तकों में इनकी ज्ञान की गंभीरता दिखाई देती है। विविध विषयों से संबंधित इनके बहुत सारे साहित्य प्रकाशित हैं। आईए इनके साहित्यों की सामान्य परिचय के साथ साहित्य-सूची देखें।

पूज्यपाद लालदास जी महाराज
पूज्यपाद लालदास जी महाराज

पूज्यपाद लालदास की लिखित-सम्पादित पुस्तकें

लालदास जी महाराज के लिखित संपादित पुस्तकों के परिचय व बिक्री
LS=लालदास साहित्य
LS01 .  सद्गुरु की सार शिक्षा,      LS02 .  संतमत - दर्शन,      LS03 .  संतमत का शब्द - विज्ञान,           LS04 . पिण्ड माहिं ब्रह्माण्ड,           LS05 . संतवाणी-सुधा सटीक,           LS06 . संत-वचनावली सटीक,      LS07 . महर्षि मेँहीँ - पदावली, शब्दार्थ, भावार्थ और टिप्पणी सहित     LS08 . महर्षि मेँहीँ की बोध - कथाएँ,      LS09 . महर्षि मेँहीँ : जीवन और उपदेश,      LS10 . महर्षि मेँहीँ : जीवन और संदेश,       LS11 . संतमत - सत्संग की स्तुति - विनती और आरती (अर्थ सहित),      LS12 . सरस भजनमाला,      LS13 . प्रभाती भजन,      LS14 . महर्षि मेँहीँ पदावली की छन्द-योजना,         LS15 . अंगिका शतक भजनमाला (मूल),      LS14क . अंगिका शतक भजनमाला pdf,         LS16 . लोकप्रिय  भजनमाला,      LS17 . अनमोल वचन,      LS18 . महर्षि मेँहीँ के प्रिय भजन,          LS19 . संत कबीर - भजनावली,      LS20 . जीवन - कला,       LS21 . अमर वाणी,         LS22 . व्यावहारिक शिक्षा,          LS23 . अंगिका भजन - संग्रह,         LS24 . स्वागत और विदाई - गान,          LS25 . ध्यानाभ्यास कैसे करें,      LS26 . स्तुति - प्रार्थना कैसे करें,         LS27 . संत - महात्माओं के दोहे,         LS28 . महर्षि मेँहीँ - गीतांजलि,      LS29 . श्रीरामचरितमानस : ज्ञान - प्रसंंग, (अर्थ सहित)       LS30 . लाल दास की कुण्डलियाँ,      LS31 . लाल दास के दोहेे,      LS32 . नैतिक शिक्षा,         LS33. प्रेरक विचार,      LS34. महकते फूल,      LS35 . महर्षि मेँहीँ के रोचक संस्मरण,         LS36 . गुरुदेव के मधुर संस्मरण      LS37 . संत-महात्माओं की कुुंडलियां,      LS38. धार्मिक शिक्षा,        LS39 . जीवन संदेश,      LS40. अमृतवाणी,      LS41. लाल दास के अंगिका - भजन         LS42 . मानस की सूक्तियाँ,      LS43 . आदर्श बोध - कथाएँ,         LS44 . संत-भजनावली सटीक,      LS45. आदर्श शिक्षा,      LS46 . बिखरे मोती,      LS47. अनोखी सूक्तियाँ,      LS48 . सुभाषित संग्रह,     LS49 .  संस्कृत की सूक्तियाँ,         LS50 . शास्त्र वचन,      LS51 .  नीति सार,      LS52 . उपनिषद सार,      LS53 . पौराणिक पात्र,      LS54 . गीता-सार,      LS55 . मोक्ष-दर्शन का शब्दकोष,       LS56 . संसार में कैसे रहें, LS57. शेख सादी की शिक्षाप्रद कथाएँ,      LS58 .  संतों के अनमोल उपदेश,     LS59 . भजन-संग्रह (अर्थ सहित),         LS60 . महर्षि मेँहीँ-शब्दकोश,        LS61 . शिक्षाप्रद कथाएँ,       LS62 .  श्रीरामचरितमानस : ज्ञान - प्रसंंग, (केवल मूल पाठ),      LS63 .  चिन्तन - मनन,        LS64 .  सत्य वाणी,      LS65 .  नीति वचन,       LS66. .   महर्षि मेँहीँ - पदावली : मूलपाठ ( ग्रंथशब्द-कोष-सहित),     LS67. जीवन- रहस्य,     LS68 .  जीवन- विज्ञान,     LS69 .  जीवन- शास्त्र,      LS70 .  'महर्षि मेँहीँ - पदावली' की प्रशनोत्तरी,       LS71 .  संत अपनी साखियों में क्या कहते हैं,        LS72 . महर्षि मेँहीँ के उपदेश,      LS73 . महर्षि मेँहीँ के उपदेशों का सार,      LS74 . महर्षि मेँहीँ के अमृत वचन,      LS75 . महर्षि मेँहीँ अनुभव-वाणी,      LS76 . महर्षि मेँहीँ के प्रवचन,         LS77 . महर्षि मेँहीँ की आत्मकथा और उपदेश,         LS78 . अनमोल मोती,      LS79 . जीवन-दर्शन,       LS80 . जीवन- शैली,      LS81 . महर्षि मेँहीँ की लोक-शिक्षाएं,         LS82 . शास्त्र-सार,      LS83 .  प्रेरक-प्रसंग,          LS84. लालदास की सूक्तियाँ,  

 

 पुस्तक प्राप्ति स्थान : औफलाइन- श्री ब्रजेश बाबा,  संतनगर, बरारी, भागलपुर- 3 , बिहार ( भारत ) 812003 . अथवा  (महर्षि मेँहीँ आश्रम के मेन गेट के पास ) 

ओनलाइन-  सत्संग ध्यान स्टोर एवं अन्य वेवसाईट.


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पूज्यपाद छोटेलाल बाबा के संबंध में आदर्श संत शाही स्वामी जी महाराज के हृदयोद्गार-


परमाराध्य सदगुरु महर्षि मेंहीं परमहंसजी महाराज के प्रमुख शिष्य 
पूज्यपाद श्रीशाही स्वामीजी महाराज के 
उन्मुक्त हदय की वाणी 
=मेरा विचार =

पूज्य बाबा श्री शाही स्वामी जी महाराज, मनियारपुर, कुप्पाघाट वाले,
महर्षि शाहीस्वामी 
     'सद्गुरु की सार शिक्षा ' नाम्नी पुस्तक के लेखक श्रीछोटेलाल मंडलजी विद्यार्थी जीवन से ही इस महर्षि मेंही आश्रम , कुप्पाघाट में रह रहे हैं । ये आश्रम के शान्ति - संदेश - प्रेस में छपनेवाली पत्रिका तथा पुस्तकों के पूफ देखने का काम सेवा - भाव से करते आ रहे हैं । इनसे विशेष सहयोग पाकर कई लोग अपनी - अपनी लिखी पुस्तकें शुद्ध और अच्छे ढंग से छपा सके हैं । ये केवल डिग्री प्राप्त विद्वान् नहीं , बस्कि यथार्थ विद्वान् हैं । ये परमाराध्य श्रीसद्गुरु महाराज ( महर्षि मेंही परमहंसजी महाराज ) के प्रिय सेवकों में से हैं । इनपर परमाराध्य को बहुत बड़ी कृपा है । इन्होंने जो यह ' सद्गुरु की सार शिक्षा ' नाम्नी पुस्तक लिखी है , परमाराध्य श्रीसद्गुरु महाराज की कृपा की प्रथम किरण है । इनके द्वारा इस प्रकार की बहुत - सी पुस्तकें लिखी जाएंगी , जिनसे लोग परमाराध्य श्रीसद्गुरु महाराज की विशेष कृपा के दर्शन करेंगे । परमाराध्य श्रीसद्गुरु महाराज आज स्थूल शरीर में नहीं हैं , अन्यथा वे इस पुस्तक को अपने कर - कमलों में लेकर जो प्रसन्नता व्यक्त करते , सब लोग उसके प्रत्यक्ष दर्शन करते । इस पुस्तक को समयाभाव के कारण मैं नमूने के तौर पर कुछ ही अंशों में देख सका हूँ । ...। इति । -शाही २४-१-१९ ८८ * इस पुस्तक के लेखक पहले अपना नाम ' छोटेलाल मंडल ' ही लिखते थे ।∆


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पूज्यपाद लालदास साहित्य-सूची, बाबा लालदास साहित्य सूची,
बाबा लालदास साहित्य सूची

पूज्यपाद लालदास साहित्य का संक्षिप्त परिचय


LS01 .  सद्गुरु की साार शिक्षा

सद्गुरु की सार शिक्षा, पुस्तक परिचय, लालदास साहित्य, संतमत के मुख्य पुस्तक,
सद्गुरु की सार शिक्षा
     LS01. सद्गुरु की साार शिक्षा :  इस पुस्तक में पद्यात्मक सन्तमत - सिद्धान्त ' श्रीसदगुरू की सार शिक्षा , याद रखनी चाहिए ' और गुरु - विनती ' प्रेम - भक्ति गुरु दीजिए , विनवों  कर जोड़ी ' के शब्दार्थ और पद्यार्थ लिखने के साथ - साथ इनके रहस्यों का बड़े ही सारगर्भित ढंग से उद्घाटन किया गया है । इसे पढ़कर सन्तमत के अनुयायियों को बड़ी प्रसन्नता होती है।         परम मोक्ष की प्राप्ति करने की इच्छा रखनेवाले साधकों को जितनी ज्ञान - संपदा की आवश्यकता हो सकती है , वह सब-की-सब इस पदावली में संचित है । इस दृष्टि से यह पदावली परम मोक्ष के साधकों के लिए बड़ी महत्त्वपूर्ण पुस्तक है । इसके एक - एक पद्य और एक - एक शब्द की पूरी व्याख्या होनी चाहिए । इस दिशा में  'सद्गुरु की सार शिक्षा' पुस्तक में पदावली  के ही ७ वें पद्य ( " श्री सद्गुरू की सार शिक्षा , याद रखनी चाहिए ।..." ) और ९वें पद्य ( " प्रेम - भक्ति गुरु दीजिए , विनवौं कर जोड़ी ।.." ) की व्याख्या करने का प्रथम प्रयास किया गया है ।   (  और जाने  ) 



LS02 . संतमत - दर्शन 

     LS02. 'सन्तमत दर्शन' :  सद्गुरु सद्ग्रंथ में गुरु गीता से सम्मानित पुस्तक 'महर्षि मेंहीं पदावली' शब्दार्थ, भावार्थ और टिप्पणी सहित पुस्तक की प्रथम पद्य की व्याख्या की पुस्तक है। इस भजन की ऐसी महिमा है कि अगर कोई व्यक्ति इसके प्रत्येक शब्द को अच्छी तरह समझ जाए, तो उसे मनुष्य का ही शरीर तबतक मिलेगा, जबतक कि उसे मुक्ति प्राप्त नहीं हो जाती . प्रमाण के लिए वीडियो देखें 16 मिनट के बाद। यह पुस्तक संतमत सत्संग साहित्य का सिरमौर और संत छोटेलाल दास ( पूज्यपाद लालदास जी महाराज )  द्वारा विरचित पुस्तकों में ईश्वर-स्वरूप का बोध कराने में सर्वश्रेष्ठ है।   (  और जाने 


LS03. संतमत का शब्द-विज्ञान

संतमत का शब्द विज्ञान
संतमत का शब्द-विज्ञान
LS03. संतमत का शब्द-विज्ञान :  संसार में कोई भी कर्म बिना कंपन के नहीं हो सकता।  सृष्टि से पहले सनातन ईश्वर ने अपनी असामयिक शक्ति से एक शब्द की रचना की, वह स्पंदन जिसमें पूरी सृष्टि का विकास हुआ।  वेद, उपनिषद, संत, बाइबिल, कुरान आदि अधिकांश शास्त्र इस तथ्य को स्वीकार करते हैं कि शब्द की उत्पत्ति शब्द से हुई है।  यह शब्द विश्व में 'ओम्' कहकर विश्व प्रसिद्ध है।  जबकि इस शब्द की सुरक्षा आंत के माध्यम से शब्द को पकड़ती है, यह केवल भगवान के साथ बातचीत करने में सक्षम हो सकता है।  यह आदिवाद दिव्य रूप अलौकिक, सदा, सर्वव्यापी, शुद्ध चेतन, निर्गुण, अव्यक्त और अकथनीय है।  इस शब्द की बड़ी महिमा है।  ज्ञान के बिना नादेन, नादेन के बिना, शिव।  नादरूपन किन्तु ज्योतिर्नादुपरुपरुपरूपि अर्थात् ध्वनि के बिना ज्ञान नहीं हो सकता;  ध्वनि के बिना कल्याण नहीं हो सकता;  ध्वनियाँ सर्वोत्तम प्रकाश हैं, और नाद्रोवर समान हैं।  परमाराध्य सद्गुरु महर्षि मेँहीँ परमहंसजी महाराज अपनी पदावली के १२६ वें पद्य में कहते हैं कि यह आदिशब्द गुरु का स्वरूप , शान्ति प्रदान करनेवाला और अनुपम अर्थात् अद्वितीय है-  इसमें उपरोक्त शब्द का विस्तार से चर्चा किया गया है।    ( ज्यादा जाने

LS04.  पिंड माहिं ब्रह्मांड

LS04,  पिंड माहिं ब्रह्मांड । ध्यानाभ्यास के सांकेतिक चित्र की विस्तृत व्याख्या की पुस्तक
पिंड माहिं ब्रह्माण्ड

LS04. पिण्ड माहिँ ब्रह्माण्ड :  सद्गुरुजी ने एक नक्शा लगवाया है , जिसका नाम है- “ अनन्त में सान्त , सान्त में अनन्त तथा ब्रह्माण्ड में पिण्ड , पिण्ड में ब्रह्माण्ड का सांकेतिक चित्र " थोड़ी भिन्नता के साथ यही नक्शा जहाँ-तहाँ संतमत के सत्संग - मन्दिरों की दीवार पर भी बनवाया गया देखने को मिलता है ।  बड़े हर्ष का विषय है कि लेखक ने पहले - पहल इस नक्शे पर व्याख्यात्मक ग्रंथ ' पिण्ड माहिँ ब्रह्माण्ड ' लिखकर इस दिशा में एक महान् और साहसपूर्ण कार्य किया है ।  पुस्तक दो खण्डों में विभाजित है । दोनों खण्ड इसी जिल्द में हैं । प्रथम ' पिण्ड ' खण्ड में पिण्ड के मूलाधार से लेकर आज्ञाचक्र तक के षट् चक्रों का वर्णन है और दूसरे ' ब्रह्माण्ड ' खण्ड में ब्रह्माण्ड के सहस्रदल कमल से लेकर शब्दातीत पद तक के सात दर्जों का वर्णन है । इस पुस्तक में और भी अनेक ऐसी बातें हैं , जो नक्शे की बातों से संबंधित तो हैं ; परन्तु नक्शे में नहीं हैं ।      सन्त - साहित्य के लगभग समस्त पारिभाषिक शब्द इस पुस्तक में व्याख्यायित होकर आ गये हैं ; अनेक नये तथ्य भी उभरकर सामने आये हैं ।  व्याख्या आदि से अन्त तक सरल भाषा में प्रस्तुत की गयी है , जो बड़ी ही संतोषजनक और सर्वत्र सबल प्रमाणों से संपुष्ट है |       (  ज्यादा जाने  

LS05 . संतवाणी-सुधा सटीक

LS04. संतवाणी-सुधा सटीक  :    नाम्नी इस पुस्तक में टीकाकार ने मूल पद्य के नीचे क्रमश : शब्दार्थ , भावार्थ और कहीं - कहीं टिप्पणी भी दी है । उन्होंने आवश्यक समझकर कहीं - कहीं भावार्थ के बीच - बीच भी कोष्ठान्तर्गत टिप्पणी दी है । ऐसा कहना चाहिए कि टीकाकार ने शब्दार्थ , भावार्थ और टिप्पणी द्वारा पद्यार्थ को पूरी तरह स्पष्ट करने का प्रयास किया है । उनका यह प्रयास संतवाणी और सद्गुरुदेवजी महाराज के ज्ञान - विचार के संदर्भ में हुआ है । टीकाकार ने कहीं - कहीं किन्हीं सन्त के पद्य और पद्य में आये शब्द के अर्थ को उन्हीं संत की अन्य वाणी अथवा अन्य संत की वाणी के प्रमाण द्वारा संपुष्ट किया है । पुस्तक में कहीं - कहीं सन्तवाणी का पाठान्तर भी दे दिया गया है । पाठकों की अर्थ समझने की सुविधा के लिए वैष्णव साधु श्रीइन्द्रनारायण दासजी और रामानन्दी साधु श्रीसुतीक्ष्ण दासजी द्वारा लिखाये गये ' शब्दों में से प्रत्येक को खंडों में बाँटकर उनका अर्थ दिया गया है ।    (  और जाने।  ) 



LS06 . संत-वचनावली सटीक 

     LS06 . संत-वचनावली सटीक Sant Vachnawali Satik  लालदास साहित्य सीरीज की छठी पुस्तक है, जिसमें 35 संतों की 217 वाणियों का सटीक संग्रह है। इन वाणियों में ईश्वर-भक्ति, साधना, योग, सद्गगुरु, आध्यात्मिक दर्शन, सत्संग इत्यादि विषयों का वर्णन किया गया है। यह पुस्तक 'महर्षि मेँहीँ सत्साहित्य-प्रकाशन-समिति', संतनगर, बरारी, भागलपुर-३ (बिहार) द्वारा प्रकाशित की गई है। यह उन पाठकों के लिए अत्यंत उपयोगी है जो भारतीय संत परंपरा और उनके दार्शनिक विचारों को गहराई से समझना चाहते हैं। संतो के आपसी मतभेद को दूर कर शांतिपूर्वक जीवन जीना चाहते हैं और आपसी भाईचारा को बढ़ावा देना चाहते हैं। आप इस पुस्तक को सत्संग ध्यान की आधिकारिक वेबसाइट या प्रमुख ऑनलाइन ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म जैसे कि सत्संग ध्यान स्टोर से खरीद सकते हैं।    संतमत सत्संग में संत वाणियों का बड़ा ही महत्व है . संतवाणीयों के आधार पर ही रात्रि कालीन सत्संग होता है . संतवाणीयां हमारे जीवन में वह सभी सुख प्रदान करता है, जिसकी हमें अभिलाषा है . अतः संतवाणीयों को अच्छी तरह से समझकर उसका पालन करना हम सबका कर्तव्य है. इसी कर्तव्य की पूर्ति के लिए पूज्यपाद लालदास जी महाराज बहुत सारे संत वाणियों की टीका किए हैं . उन टीका ग्रंथों में "संत-वचनावली  सटीक" संत-वचनावली तो भागलपुर विश्वविद्यालय में पाठ्यक्रम का एक अंग ही है. इसका टीका करके इन्होंने सभी विद्यार्थियों एवं तमाम मानव समाज का बहुत बड़ा उपकार किया है   ( ज्यादा जाने  ) 

LS07.   महर्षि मेँहीँ-पदावली : शब्दार्थ, भावार्थ और टिप्पणी सहित।

     LS07.   महर्षि मेँहीँ-पदावली : शब्दार्थ, भावार्थ और टिप्पणी सहित :- भारतीय साहित्य में वेद, उपनिषद, उत्तर गीता, भागवत गीता, रामायण आदि सदग्रंथों का बड़ा महत्व है। इन्हीं सदग्रंथों जैसा परम पूजनीय ग्रंथ 'महर्षि मेँहीँ पदावली' हम संतमतानुयायियों के लिए है। जिसका शब्दार्थ, भावार्थ और टिप्पणी पूज्यपाद लालदास जी महाराज द्वारा एवं अन्य महापुरुषों के द्वारा किया गया है ।    इस पुस्तक की जितनी भी बड़ाई की जाए कम है; क्योंकि संत वाणियों एवं गुरु महाराज के पुस्तकों का पूरी तरह से अध्ययन किए बिना इस पुस्तक को अच्छी तरह से कोई नहीं लिख सकता। गुरु महाराज के प्रत्येक पद की व्याख्या, भावार्थ और टिप्पणी करते समय उद्धरण का ठोस  नमूना  दिया गया है। जो अपने आप में अनूठी है। यह पुस्तक संतमत के गूढ़ रहस्यों को सरल भाषा में समझाने का एक अद्भुत प्रयास है, जो साधकों को साधना-पद्धति, संत-वाणी और शास्त्रों के आधार पर गहन अर्थों को समझने में मदद करती है, जिससे जन-सामान्य की कठिनाई दूर होती है और उन्हें आध्यात्मिक अनुभूति प्राप्त होती है, जहाँ लेखक और उनके शिष्य इस पर विस्तृत टीकाएँ (जैसे 'पदावली की प्रश्नोत्तरी') लिखकर इसके महत्व को दर्शाते हैं।   ( और जाने  ) 



     LS08 . महर्षि मेँहीँ की बोध-कथाएँ  :  प्रभु प्रेमियों ! महाभारत , रामायण , पुराण , श्रीमद्भागवत , उपनिषद् , योगवासिष्ठ , पंचतंत्र , हितोपदेश , गुलिस्ताँ ( शेख सादी ) , धम्मपद आदि की कथाएँ,  भारत का इतिहास तथा भक्तों के चरित्रों से संबंधित 138 प्रिय, मधुर, मनोहर, सत्य और लोक-परलोक उपकारी कथा-संकलन का नाम है- 'महर्षि मँहीँ की बोध-कथाएँ .'  85 रेखाचित्रों सहित जब भी कोई बच्चा, बूढा, जवान, किसान या माँ- बहनें  इन कधाओं को पढ़ते हैं तो भावना की गहराई में उतर कर अलोकिक आनंद की प्राप्ति के लिए प्रभु से प्रार्थना करने लगते हैं. लोक परलोक को सुधारने वाली इन कथाएँ से ऐसा ज्ञान मिलता है कि घर परिवार बाल बच्चा सब कोई किस तरह से सुखी संपन्न रह सकता है और इस शरीर को छोड़ने के बाद भी किस तरह से आनंदित रह सकता है .  इन छोटी-बड़ी कथाओं में इन सब बातों का समावेश है।  ( ज्यादा जाने 



LS09. महर्षि मेँहीँ : जीवन और उपदेश

     LS09. महर्षि मेँहीँ : जीवन और उपदेश : 'महर्षि मेँहीँ : जीवन और उपदेश' लालदास साहित्य सीरीज की 09 वीं  पुस्तक है । 20वीं सदी के ये महान संत थे, जिन्होंने संतमत सत्संग का प्रचार किया, जिसमें सभी धर्मों की मूल शिक्षाओं (वेदों, उपनिषदों, गीता, कुरान, बौद्ध धर्म) में एकता पर जोर दिया गया और मोक्ष के लिए दृष्टियोग (आंतरिक प्रकाश ध्यान) और शब्दयोग (आंतरिक ध्वनि ध्यान) का मार्ग बताया। कुप्पाघाट, भागलपुर में आश्रम स्थापित किया और सरल जीवन, शाकाहार व नैतिक आचरण के माध्यम से आध्यात्मिक उत्थान पर उपदेश दिए। इन्हीं महापुरुष के जीवन से संबंधित महत्वपूर्ण बिंदुओं पर इस पुस्तक में प्रकाश डाला गया है और प्रमुख उपदेशों को इसमें संकलित किया गया है सर्वसाधारण के प्राथमिक जानकारी के लिए यह पुस्तक बहुत ही महत्वपूर्ण है।  प्रातः, अपराह्न और सायंकालीन स्तुति-प्रार्थना और आरती भी दिए गए हैं। जिससे प्रेमीजन रोजाना सत्संग और आरती समय पर कर लिया करें।  गुरु महाराज के  सभी प्रेमी भक्त इस पुस्तक को अपने पास अवश्य रखना चाहेंगे ।   इस पुस्तक के बारे में विशेषजानकारी के लिए     👉 यहां दबाएं ।    



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S07. पूज्यपाद लालदास साहित्य-सूची || आचार्य लालदास की लिखित संपादित पुस्तकों का सामान्य परिचय S07. पूज्यपाद लालदास साहित्य-सूची  ||  आचार्य लालदास की लिखित संपादित पुस्तकों का सामान्य परिचय Reviewed by सत्संग ध्यान on 1/31/2019 Rating: 5

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