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मोक्ष दर्शन (12-34) सृष्टि रचना, संसार चक्र, आत्मा और क्षर अक्षर वर्णन

सत्संग योग भाग 4 मोक्ष दर्शन/02
      प्रभु प्रेमियों ! भारतीय साहित्य में वेद, उपनिषद, उत्तर गीता, भागवत गीता, रामायण आदि सदग्रंथों का बड़ा महत्व है। इन्हीं सदग्रंथों में से ध्यान योग से संबंधित बातों को संग्रहित करके सद्गुरु महर्षि मेंहीं परमहंस जी महाराज ने 'सत्संग योग भाग 4 (मोक्ष दर्शन)' नामक पुस्तक की रचना की है। इसमें जो बातें व्यक्त की गई है उसे पारा संख्या देकर अभिव्यक्त किया गया है। उन्हीं प्रसंगोों में से आज के प्रसंग में जानेंगे-पारा संख्या 12 से 34 के बारे में।

मोक्ष दर्शन (12-34) सृष्टि रचना, संसार चक्र, आत्मा और क्षर अक्षर वर्णन, संतो के मध्य गुरुदेव
संतों के मध्य गुरुदेव


पारा संख्याा 12-34 में बताया गया है किसृष्टि रचना, संसार चक्र, आत्मा और क्षर अक्षर क्या है?

मोक्ष दर्शन (12-34) सृष्टि रचना, संसार चक्र, आत्मा और क्षर अक्षर वर्णन। सृष्टि रचना वर्णन
सृष्टि की रचना
मोक्ष दर्शन (12-34) सृष्टि रचना, संसार चक्र, आत्मा और क्षर अक्षर वर्णन। आत्मा का रहस्य
आत्मा का रहस्य

मोक्ष दर्शन (12-34) सृष्टि रचना, संसार चक्र, आत्मा और क्षर अक्षर वर्णन। क्षर अक्षर वर्णन
क्षर अक्षर क्या है
     मोक्ष दर्शन के पारा संख्या 12 से 34 तक में हम लोगों ने जाना कि सृष्टि रचना, संसार चक्र, आत्मा और क्षर अक्षर क्या है। इतनी जानकारी के बाद भी अगर आपके मन में किसी प्रकार का शंका या कोई प्रश्न है, तो हमें कमेंट करें। इस प्रवचन के बारे में अपने इष्ट मित्रों को भी बता दें, जिससे वे भी लाभ उठा सकें। सत्संग ध्यान ब्लॉग का सदस्य बने। इससे आपको आने वाले प्रवचन या पोस्ट की सूचना नि:शुल्क मिलती रहेगी। 



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मोक्ष दर्शन (12-34) सृष्टि रचना, संसार चक्र, आत्मा और क्षर अक्षर वर्णन मोक्ष दर्शन (12-34) सृष्टि रचना, संसार चक्र, आत्मा और क्षर अक्षर वर्णन Reviewed by सत्संग ध्यान on 6/03/2020 Rating: 5

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