पेंठी" या "पैंठी" एक छोटा-सा डंडा या पैंना है।
प्रभु प्रेमियों ! 'पेंठी" या "पैंठी" एक पारंपरिक भारतीय बिहारी अंगिका भाषा का शब्द है जिसका मतलब होता है एक छोटा सा डंडा, पैंना । जिससे गाय, बकरी, भैंस वगैरह को हांकते हैं। बैल को चलाते हैं । उस छोटे से डंडे को पेंठी" या "पैंठी" डंडा, पैंना इत्यादि लोग देहाती भाषा में कहते हैं। आवश्यकता अनुसार इससे कई तरह के काम कर लेते हैं। पूज्यपाद गुरुदेव इसी डंडे के बारे में 1 साल के बाद पूछते हैं, जिससे पूज्य बाबा को बहुत फक्र महसूस होता है। आईये उसी प्रसंग को बाबा के ही शब्दों में पढ़ें --
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50. पैंठी लाओ
अधिक उम्र हो जाने पर भी पूज्य गुरुदेव महर्षि मेँहीँ परमहंसजी महाराज की याददाश्त शक्ति बिल्कुल कायम थी। लगभग १९७८-७९ ई० की बात है। पूज्य गुरुदेव को संतमत-सत्संग मंदिर, मनिहारी के ऊपरवाले कमरे में स्नान कराया था। जहाँ स्नान करा रहा था, उस जगह पानी निकलने का जो छिद्र था, उसमें कुछ कचरा भर गया था, जिससे पानी ठीक से नहीं निकल रहा था। मैंने पानी निकलने का रास्ता साफ करने के लिए डेढ़-दो हाथ की एक छड़ी लायी और छड़ी को छिद्र में डालकर रास्ता साफ कर दिया। रास्ता साफ होने पर पानी ठीक से निकलने लगा। स्नान-ध्यान-भोजनोपरांत पूज्य गुरुदेव दूसरी जगह सत्संग करने के लिए चले गये। लगभग एक साल बाद पूज्य गुरुदेव फिर मनिहारी गये। आज्ञा हुई ऊपर बने कमरे में ही स्नान कराने की। जब वहाँ स्नान कराने ले गये, तो स्नान करने के समय बोले- "जिस पेंठी से पानी निकलने का रास्ता साफ किया था, वह
पेंठी लाओ।" मुझे आश्चर्य लगा कि इतनी वृद्धावस्था में भी इनकी याददाश्त शक्ति कितनी मजबूत है।
∆ ~गुरूसेवी स्वामी भागीरथ दास जी महाराज।
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सत्संग ध्यान से संबंधित प्रश्न ही पूछा जाए।