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45. मूँगफली की माँग || मूँगफली पोषक तत्वों प्रोटीन, विटामिन E, मैग्नीशियम और एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर होता है।

मूँगफली पोषक तत्वों प्रोटीन, विटामिन E, मैग्नीशियम और एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर होता है। 

     प्रभु प्रेमियों !  मूँगफली पोषक तत्वों (प्रोटीन, विटामिन E, मैग्नीशियम और एंटीऑक्सीडेंट्स) से भरपूर होती है और इसे दिल के लिए स्वस्थ आहार का हिस्सा माना जाता है, जिससे स्वास्थ्य के प्रति जागरूक उपभोक्ताओं के बीच इसकी लोकप्रियता बढ़ी है। मूँगफली का उपयोग पीनट बटर, स्नैक्स, तेल और सॉस (चटनी) जैसे कई उत्पादों को बनाने में किया जाता है। भारत में भी, पीनट बटर की मांग तेजी से शहरीकरण और रेडी-टू-ईट (ready-to-eat) खाद्य बाजार के विकास के कारण बढ़ रही है।   भारत और विश्व स्तर पर मूँगफली की मांग लगातार बढ़ रही है, जो मुख्य रूप से स्वास्थ्य लाभों, प्रोटीन-आधारित आहारों की ओर बदलाव और विभिन्न उत्पादों में इसके उपयोग के कारण है।  अंतर्यामी गुरुदेव अपने भक्तों को खुशियां प्रदान करने के लिए और शायद उपयुक्त लाभ की ओर इशारा करने के ख्याल से जो  मूँगफली की मांग किए हैं उसका दिग्दर्शन पूज्य बाबा ने इस संस्मरण में कराया है ।  उसे हमलोग भी पढें--

इस संस्मरण से पहले वाले संस्मरण नंबर  44. को पढ़ने के लिए  👉 यहाँ दवाएँ ।


45. मूँगफली की माँग
45. मूँगफली की माँग

45. मूँगफली की माँग

     मूँगफली को बोलचाल की भाषा में सभी लोग चीनियाँ बादाम भी कहते हैं। इस चीनियाँ बादाम को छिलका सहित बालू में भूजकर उसे फोड़कर खाते हैं या पहले इसे छिलका से निकालकर तेल या बालू में (भूंजकर) भँजकर खाते हैं। भँजने से इसका बहुतांश पौष्टिक तत्त्व नष्ट हो जाता है। पौष्टिक तत्त्व नष्ट न हो, इसके लिए कुछ लोग इस मूँगफली को छिलका से निकालकर रात में पानी में भींगने देते हैं और प्रातःकाल कुल्ला आचमन करने के पश्चात् दाँत से चबा-चबाकर खाते हैं। इस तरह खाने से पेट साफ रहता है, कब्ज दूर करता है।

     जिस समय पूज्य गुरुदेव महर्षि मेंहीँ परमहंसजी महाराज सशरीर संसार में मौजूद थे और मैं उनकी शारीरिक सेवा में लगा रहता था, उस समय मैं कभी-कभी मूँगफली को रात में फूलने के लिए देता था और प्रातःकालीन सत्संग के पश्चात् उसको चबाकर खाता था। मूँगफली खाने की बात गुरुदेव से नहीं कहा था; लेकिन उनसे कोई बात छिपी भी नहीं रहती थी। एक दिन उनकी मौज हुई। वे अपने शयन करने के आसन पर लेटे हुए थे और मैं उनके नजदीक में खड़ा था। हमको देखते हुए बोले- "बेटा! तुम जो फुला हुआ मूँगफली खाते हो, एक दाना लाओ तो।" मैं आज्ञा पाते ही झट से एक दाना पानी से साफ कर ले आया और मैंने निवेदन किया- "हुजूर! आनलियै ।" यह सुनकर पूज्य गुरुदेव बोले- "मेरे मुँह में दे दो।" मैंने आज्ञा पाकर उनके मुँह में दे दिया। वे धीरे-धीर चबाकर उस दाने को खा लिये। इस मौज भरी कृपा से मेरे मन में बहुत खुशी हुई। ∆        ~गुरूसेवी स्वामी भागीरथ दास जी महाराज


इस संस्मरण के बाद वाले संस्मरण नंबर 46. को पढ़ने के लिए  👉 यहाँ दवाएँ । 






प्रेरक संत-संस्मरण
प्रेरक संत-संस्मरण

       प्रेरक संत-संस्मरण :  'प्रेरक संत-संस्मरण' में संतों के जीवन से जुड़ी प्रेरणादायक कहानियाँ और उनके उपदेश शामिल किया गया हैं, जो लोगों को जीवन में अच्छे कर्म करने और सही रास्ते पर चलने के लिए प्रेरित करते हैं। ये संस्मरण अक्सर संतों के अनुभवों, उनके शिष्यों और समाज पर उनके प्रभाव को दर्शाते हैं, जिससे व्यक्ति के जीवन को बेहतर बनाने में मदद मिलती है। इस पुस्तक में पूज्य गुरुदेव की डायरी से उनके हस्तलिखित संत-महापुरुषों की जीवनी को भी सबके पढ़ने, समझने योग्य बनाने के लिए उसे भारती अंकन रूप एवं कठिन शब्दों को सरल रूप में दिया गया है ।    इसमें गुरु महाराज हस्तलिखित कई महापुरुषों के संक्षिप्त जीवन परिचय है और बहुत सारे भजन है, जिसे हू-ब-हू उन्हीं के लिखित अक्षर में प्रकाशित किया गया है और समझने के लिए भारती नागरी लिपि में भी उसका ट्रांसलेट किया गया है।    यह पुस्तक भी गुरुदेव की डायरी का है छोटा रूप है।    इसमें डायरी के सभी बातों के साथ-साथ गुरु महाराज के बहुत सारे संस्मरण भी दिये गये हैं।   ज्यादा जाने ) 

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45. मूँगफली की माँग || मूँगफली पोषक तत्वों प्रोटीन, विटामिन E, मैग्नीशियम और एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर होता है। 45. मूँगफली की माँग || मूँगफली पोषक तत्वों प्रोटीन, विटामिन E, मैग्नीशियम और एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर होता है। Reviewed by सत्संग ध्यान on 1/02/2026 Rating: 5

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