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48 . अपने सामान की सुरक्षा || अपने सामान के सुरक्षा कैसे करनी चाहिए गुरुदेव के इस व्यवहार से पता चलता है

48. अपने सामान की सुरक्षा

     प्रभु प्रेमियों ! अपने सामान की सुरक्षा के लिए, भीड़-भाड़ वाली जगहों पर कीमती चीज़ें आगे की जेब में रखें, बैग को हमेशा सामने रखें, घर पर खिड़कियाँ-दरवाज़े बंद करें और घर से निकलते समय ज़रूरी दस्तावेज़ अलग-अलग जगहों पर रखें, साथ ही यात्रा के दौरान मज़बूत ताले और पैकिंग का ध्यान रखें। घर पर सुरक्षा के लिए अलार्म सिस्टम और सीसीटीवी लगवाएं और बाहर जाते समय अनजान लोगों से सावधान रहें। इस तरह के एडवाइजरी तो आप बराबर सुनते रहते होंगे पर संत महात्मा किस तरह से लोगों को उपरोक्त बातों की जानकारी देते हैं । यह इस संस्मरण से पता चलता है-

इस संस्मरण से पहले वाले संस्मरण नंबर  47.  को पढ़ने के लिए  👉 यहाँ दवाएँ ।

अपने सामान की सुरक्षा
अपने सामान की सुरक्षा

अपने सामान के सुरक्षा कैसे करनी चाहिए गुरुदेव के इस व्यवहार से पता चलता है~

48 . अपने सामान की सुरक्षा

     सन् १९६० ई० में महर्षि मेँहीँ आश्रम, कुप्पाघाट का निर्माण कार्य प्रारंभ हुआ। पहले यह आश्रम अर्थाभाव में था। पूज्य गुरुदेव के प्रति विशेष श्रद्धा रखनेवाले एक व्यक्ति ने एक गाय और उसके खाने के लिए भूसा भी दिये। एक छोटा कमरा में भूसा रखा गया। आश्रम के बगल के मुहल्ला के रहनेवाले एक व्यक्ति को गाय के खिलाने का भार दिया गया। वह व्यक्ति एक रात कुछ भूसा लेकर अपनी भैंस को खिलाने के लिए चला गया। प्रातःकाल जब पूज्य गुरुदेव टहलने के लिए निकले तो रास्ते में कुछ भूसा गिरा हुआ दिखाई दिया। जब वह गाय खिलानेवाला व्यक्ति आश्रम आया, तब उनसे पूछा गया कि तुम रात में अपना घर भूसा ले गये हो? पहले तो वह कुछ नहीं बोला। बहुत पूछने पर उसने स्वीकार किया कि मैं भूसा ले गया हूँ। यह सुनकर पूज्य गुरुदेव उनसे भूसा-घर की चाभी लेकर अपने पास रख लिये। जरूरत भर भूसा निकलवाकर चाभी अपने पास रखने लगे। यह कार्य कर इन्होंने यह शिक्षा दी कि अपने सामान की सुरक्षा स्वयं करनी चाहिए।   ∆       ~गुरूसेवी स्वामी भागीरथ दास जी महाराज।  
                                     


 इस संस्मरण के बाद वाले संस्मरण नंबर  49. को पढ़ने के लिए  👉 यहाँ दवाएँ । 







प्रेरक संत-संस्मरण
प्रेरक संत-संस्मरण

       प्रेरक संत-संस्मरण :  'प्रेरक संत-संस्मरण' में संतों के जीवन से जुड़ी प्रेरणादायक कहानियाँ और उनके उपदेश शामिल किया गया हैं, जो लोगों को जीवन में अच्छे कर्म करने और सही रास्ते पर चलने के लिए प्रेरित करते हैं। ये संस्मरण अक्सर संतों के अनुभवों, उनके शिष्यों और समाज पर उनके प्रभाव को दर्शाते हैं, जिससे व्यक्ति के जीवन को बेहतर बनाने में मदद मिलती है। इस पुस्तक में पूज्य गुरुदेव की डायरी से उनके हस्तलिखित संत-महापुरुषों की जीवनी को भी सबके पढ़ने, समझने योग्य बनाने के लिए उसे भारती अंकन रूप एवं कठिन शब्दों को सरल रूप में दिया गया है ।    इसमें गुरु महाराज हस्तलिखित कई महापुरुषों के संक्षिप्त जीवन परिचय है और बहुत सारे भजन है, जिसे हू-ब-हू उन्हीं के लिखित अक्षर में प्रकाशित किया गया है और समझने के लिए भारती नागरी लिपि में भी उसका ट्रांसलेट किया गया है।    यह पुस्तक भी गुरुदेव की डायरी का है छोटा रूप है।    इसमें डायरी के सभी बातों के साथ-साथ गुरु महाराज के बहुत सारे संस्मरण भी दिये गये हैं।   ज्यादा जाने ) 

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48 . अपने सामान की सुरक्षा || अपने सामान के सुरक्षा कैसे करनी चाहिए गुरुदेव के इस व्यवहार से पता चलता है  48 .  अपने सामान की सुरक्षा  ||  अपने सामान के सुरक्षा कैसे करनी चाहिए गुरुदेव के इस व्यवहार से पता चलता है Reviewed by सत्संग ध्यान on 3:34:00 pm Rating: 5

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