S233_02. राम का स्वरूप कैसा है || हम भगवान राम को किस रूप में देखते हैं? श्रीराम कैसे दिखाई देते हैं?
राम का स्वरूप कैसा है
सद्गुरु महर्षि मेँहीँ सत्संग सुधा सागर प्रवचन नंबर 233 में बताया गया है भगवान राम का स्वरूप हम कैसा देखते हैं? राम कैसा है? राम का स्वरूप कैसा है?
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| राम का स्वरूप कैसा है |
हम भगवान राम को किस रूप में देखते हैं? श्रीराम कैसे दिखाई देते हैं?
प्यारे लोगो !
आपलोगो को दो बातों के विषय में कहूँगा। एक तो राम और ईश्वर, दूसरी बात विज्ञान। 'राम' कहने से सब लोग साधारण तरह से जानते हैं कि जैसे हमलोग रामनवमी के दिन जहाँ-तहाँ उत्सव देखते हैं। गाँव में प्रतिमा बनती है। सब गाँवों में नहीं; लेकिन बहुत-से गाँवों में राम की प्रतिमा बनती है। लोग ठाकुरबाड़ी जाते हैं, वहाँ दर्शन करते हैं। दर्शन करके जानते हैं कि श्रीराम शरीर-धारी विशेष पुरुष थे, जैसा कि प्रतिमा में, चित्र में और ठाकुरबाड़ी में है। मृतिका की प्रतिमा में जैसा रूप है अथवा जो पहले से ही स्थापित प्रतिमा है, उसका दर्शन करके समझते हैं कि इसी तरह के राम थे। 'राम' कहने से प्रतिमा का रूप, राम का ख्याल आता है। जैसा देखते हैं, वैसा ही ख्याल में आवे, यह प्रचलित स्वाभाविक बात है। यह गलती में जानते हैं, ऐसी बात नहीं। जो पढ़े-लिखे अधिक हैं, वे केवल रूपधारी राम ही नहीं समझते और भी समझते हैं। जैसे श्रीराम जब जंगल गए थे, तो वे वाल्मीकि के आश्रम में गए, वहाँ वार्ता हुई। वहाँ रूपवाले राम वाल्मीकि के सामने थे ही; लेकिन वाल्मीकिजी कहते हैं-
राम स्वरूप तुम्हार, वचन अगोचर बुद्धि पर । अविगत अकथ अपार, नेति नेति नित निगम कह ।।
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