Ad1

मोक्ष दर्शन (४५-५१) Nadanusandhana Meaning और प्रकृति के अनादि होने का राज

सत्संग योग भाग 4 मोक्ष दर्शन/04

      प्रभु प्रेमियों ! भारतीय साहित्य में वेद, उपनिषद, उत्तर गीता, भागवत गीता, रामायण आदि सदग्रंथों का बड़ा महत्व है। इन्हीं सदग्रंथों में से ध्यान योग से संबंधित बातों को संग्रहित करके सद्गुरु महर्षि मेंहीं परमहंस जी महाराज ने 'सत्संग योग भाग 4 (मोक्ष दर्शन)' नामक पुस्तक की रचना की है। इसमें जो बातें व्यक्त की गई है उसे पारा संख्या देकर अभिव्यक्त किया गया है। उन्हीं प्रसंगोों में से आज के प्रसंग में जानेंगे-पारा संख्या ४५से५१ के बारे में-

मोक्ष दर्शन (४५-५१) Nadanusandhana Meaning और प्रकृति के अनादि होने का राज। मोक्ष दर्शन पारा 45 से 51
मोक्ष दर्शन पारा 45से51





शब्द ध्यान और प्रकृति

     शब्द ध्यान कैसे करना चाहिए प्रकृति को अनादि क्यों कहते हैं इन सब बातों का रहस्य इन पैराग्राफों में समझाया गया है।

मोक्ष दर्शन पारा 45
मोक्ष दर्शन पारा 45

मोक्ष दर्शन (४५-५१) Nadanusandhana Meaning और प्रकृति के अनादि होने का राज। मोक्ष दर्शन पारा 46से50
मोक्ष दर्शन पारा 46 से 50

मोक्ष दर्शन (४५-५१) Nadanusandhana Meaning और प्रकृति के अनादि होने का राज। मोक्ष दर्शन पारा 51
मोक्ष दर्शन पारा 51

     मोक्ष दर्शन के पारा संख्या 45 से 51 तक में हम लोगों ने जाना कि शब्द ध्यान कैसे किया जा सकता है और  प्रकृति को अनादि क्यों कहते हैं। इतनी जानकारी के बाद भी अगर आपके मन में किसी प्रकार का शंका या कोई प्रश्न है, तो हमें कमेंट करें। इस प्रवचन के बारे में अपने इष्ट मित्रों को भी बता दें, जिससे वे भी लाभ उठा सकें। सत्संग ध्यान ब्लॉग का सदस्य बने। इससे आपको आने वाले प्रवचन या पोस्ट की सूचना नि:शुल्क मिलती रहेगी


अगर आप इस पुस्तक को अपने डिवाइस में डाउनलोड करना चाहते हैं तो    यहां दबाएं।

मोक्ष दर्शन (४५-५१) Nadanusandhana Meaning और प्रकृति के अनादि होने का राज मोक्ष दर्शन (४५-५१) Nadanusandhana Meaning और प्रकृति के अनादि होने का राज Reviewed by सत्संग ध्यान on नवंबर 04, 2018 Rating: 5

कोई टिप्पणी नहीं:

सत्संग ध्यान से संबंधित प्रश्न ही पूछा जाए।

Blogger द्वारा संचालित.