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मोक्ष दर्शन (52-59) असली भक्ति करना क्या है? bhakti kya hai

सत्संग योग भाग 4 मोक्ष दर्शन/05

      प्रभु प्रेमियों ! भारतीय साहित्य में वेद, उपनिषद, उत्तर गीता, भागवत गीता, रामायण आदि सदग्रंथों का बड़ा महत्व है। इन्हीं सदग्रंथों में से ध्यान योग से संबंधित बातों को संग्रहित करके सद्गुरु महर्षि मेंहीं परमहंस जी महाराज ने 'सत्संग योग भाग 4 (मोक्ष दर्शन)' नामक पुस्तक की रचना की है। इसमें जो बातें व्यक्त की गई है उसे पारा संख्या देकर अभिव्यक्त किया गया है। उन्हीं प्रसंगोों में से आज के प्रसंग में जानेंगे-पारा संख्या५२से५९ के बारे में-इसमें हम लोग जानेंगे कि- भक्ति किसे कहते है,भक्ति के प्रकार,भक्ति का स्वरूप,वास्तविक सच्ची भक्ति क्या है,भक्ति का महत्व,भक्ति योग,भक्ति के भेद,क्या आज भक्ति का रूप बदल गया है,

मोक्ष दर्शन (52-59) असली भक्ति करना क्या है? bhakti kya hai, गुरुदेव और संतसेवी जी महाराज
गुरुदेव और संतसेवी जी महाराज

मोक्ष दर्शन (52-59) असली भक्ति करना क्या है? bhakti kya hai,मोक्ष दर्शन पारा 52 से 57
मोक्ष दर्शन पारा 52 से 57

मोक्ष दर्शन (52-59) असली भक्ति करना क्या है? bhakti kya hai, मोक्ष दर्शन पारा 58
मोक्ष दर्शन पारा 58

मोक्ष दर्शन (52-59) असली भक्ति करना क्या है? bhakti kya hai, मोक्ष दर्शन
मोक्ष दर्शन

      मोक्ष दर्शन के पारा संख्या52 से 59 तक में हम लोगों ने जाना कि असल में भक्ति करना क्या है? भक्ति कैसे कर सकते हैं? भक्ति का क्या स्वरूप है आदि बातों को। इतनी जानकारी के बाद भी अगर आपके मन में किसी प्रकार का शंका या कोई प्रश्न है, तो हमें कमेंट करें। इस प्रवचन के बारे में अपने इष्ट मित्रों को भी बता दें, जिससे वे भी लाभ उठा सकें। सत्संग ध्यान ब्लॉग का सदस्य बने। इससे आपको आने वाले प्रवचन या पोस्ट की सूचना नि:शुल्क मिलती रहेगी

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मोक्ष दर्शन (52-59) असली भक्ति करना क्या है? bhakti kya hai मोक्ष दर्शन (52-59) असली भक्ति करना क्या है? bhakti kya hai Reviewed by सत्संग ध्यान on दिसंबर 30, 2018 Rating: 5

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