Ad

Ad

MS02-38, रावण विभीषण संवाद सुमति कुमति वर्णन ।। Ramayan chaupai in hindi with meaning

रामचरितमानस सार सटीक / 38 

 प्रभु प्रेमियों ! भारतीय साहित्य में वेद, उपनिषद, उत्तर गीता, श्रीमद्भागवत् गीता, रामायण आदि सदग्रंथों का बड़ा महत्व है। इन्हीं सदग्रंथों में से ध्यान योग से संबंधित बातों को रामायण से संग्रहित करके सद्गुरु महर्षि मेंहीं परमहंस जी महाराज ने 'रामचरितमानस सार सटीक' नामक पुस्तक की रचना की है। जिसका टीका और व्याख्या भी किया गया है । उन्हीं प्रसंगों में से आज के प्रसंग में जानेंगे-राम रावण संवाद के ज्ञानमय उपदेश।

Ravan Vibhishan Samvad ।। Ramayan chaupai in hindi with meaning ।। रावण और विभीषण संवाद
रावण और विभीषण संवाद

रावण विभीषण संवाद- सुमति कुमति वर्णन

      इस प्रसंग  में बताया गया है कि  सुमति, कुमति सब के ह्रदय में रहता है । लेकिन सज्जन पुरुष वही है, जो ज्यादा-से-ज्यादा सुमति का आचरण करे । सुमति पर चले । यह बात विभीषन रावण को समझा रहे हैं । इस प्रसंग को पूरी तरह समझने के लिए निंलिखित विशेष प्रवचन पर दवाएं-  विशेष प्रवचन


रामायण ज्ञान-प्रसंग  38

दोहा - काम क्रोध मद लोभ सब , नाथ नरक कर पंथ ।   सब परिहरि रघुवीर ही, भजहु भजहिँ जेहि सन्त ॥ ८४ ॥ 

     हे नाथ ! काम , क्रोध , अहंकार और लोभ ; ये सब के सब नरक के मार्ग हैं । इन सबों को छोड़कर राम का भजन कीजिए , जिनको सन्त लोग भजते हैं । 

     विभीषण की बातें सुनकर रावण क्रोधित हो विभीषण से बोला कि तुम मेरे शत्रु का गुण गाते हो । फिर सभा की ओर देखकर बोला- ' है कोई ! इसे यहाँ से निकालो । ' विभीषण फिर हाथ जोड़कर कहने लगे 

सुमति कुमति सबके उर रहहीँ । नाथ पुरान निगम अस कहहीं ॥ ५८० ॥ * 

     हे नाथ ! पुराण और वेद ऐसा कहते हैं कि सद्बुद्धि और कुबुद्धि सबके हृदय में रहती है । 

जहाँ सुमति तहँ सम्पति नाना । जहाँ कुमति तहँ बिपति निदाना ॥ ५८१ ॥ 

     जहाँ सुबुद्धि रहती है , वहाँ बहुत प्रकार की सम्पत्ति रहती है और जहाँ कुबुद्धि होती है , वहाँ अन्त में विपत्ति आती है । 

      विभीषण ने बिना पूछे और भी अनेक हित- विचार रावण को दिए , पर उसका क्रोध बढ़ता ही गया । उसने कहा- ' तू शत्रु का गुण गाता है , जा उसी को नीति सिखा ' यह कह उसने विभीषण को लात मार दी । विभीषण इतने पर भी उसके चरण पकड़कर सविनय धर्मोपदेश करने लगे ।  यहाँ महादेवजी कहते हैं 

उमा सन्त कर इहइ मन्द बड़ाई । करत जो करइ भलाई ॥ ५८२ ॥

      हे उमा ! सन्तों की यही बड़ाई है कि उनके साथ जो बुराई करते हैं , वे उनके साथ भी भलाई करते हैं । 

     विभीषण रावण से बोले कि हे भाई ! तुम मेरे पिता के तुल्य हो । तुमने भले ही मुझे मारा , परन्तु रामजी का भजन करने  में तुम्हारी भलाई है । लो , मैं राम के पास जाता हूँ । ऐसा कह अपने मन्त्रियों के सहित आकाश में गए और सबको सुनाकर बोले कि अब मैं राम के पास जाता हूँ , मुझे कोई दोष मत देना । यहाँ महादेवजी कहते हैं -

अस कहि चला विभीषण जबहीं । आयू हीन भये सब तबहीं ॥ ५८३ ॥ 

     ऐसा कहकर विभीषणजी जैसे ही चले , सभी ( राक्षस ) आयुहीन हो गए । 

साधु अवज्ञा तुरत भवानी । कर कल्यान अखिल कै हानी ॥ ५८४ ।। 

     हे भवानी ! साधु पुरुषों का अनादर ( करना ) सम्पूर्ण कल्याण का नाश कर देता है । 

     विभीषण आकाश मार्ग से लंका से चलकर रामजी की सेना में आ मिले । सुग्रीव ने उनको एक जगह ठहरा रामजी से कहा कि रावण का भाई विभीषण आपसे मिलने आया है , • परन्तु मेरे मन में आता है कि वह हमलोगों का भेद लेने आया है । अतएव उसे बाँध रखना चाहिए । रामजी ने कहा- ' शरणागत की रक्षा करना मेरा प्रण है । ' और 

दोहा- सरनागत कहँ जे तजहिँ , निज अनहित अनुमानि । ते नर पामर पापमय , तिनहिँ बिलोकत हानि ॥ ८५ ॥ 

     जो अपना अनभल अनुमान कर शरण में आए हुए को त्याग देते हैं , वे मनुष्य नीच और पापमय हैं । उपको देखने से हानि होती है । रामजी की आज्ञा पाकर बन्दर लोग विभीषण को आदरपूर्वक रामजी के पास ले गए । विभीषण ने ' त्राहि शरणागत रक्षक ! ' कहकर रामजी को प्रणाम किया । रामजी ने उठकर उनको हृदय से लगा लिया .

---×---

      प्रभु प्रेमियों ! सद्गुरु महर्षि मेंहीं परमहंस जी महाराज के भारती पुस्तक "रामचरितमानस सार सटीक" के इस लेख का पाठ करके आपलोगों ने जाना कि जहाँ सुमति तहँ संपति नाना पर कहानी, सुमति कौन था, अहित न होई तुम्हार, निदाना का अर्थ, तव उर कुमति बसी बिपरीता, सुमति meaning in Hindi, जहां सुमति, गुण अवगुण सबके उर रहहीं, सुमति, कुमति सब के ह्रदय में रहता है । लेकिन सज्जन पुरुष वही है, जो ज्यादा-से-ज्यादा सुमति का अनुसरण करेइतनी जानकारी के बाद भी अगर आपके मन में किसी प्रकार का शंका या कोई प्रश्न है, तो हमें कमेंट करें। इस लेख के बारे में अपने इष्ट मित्रों को भी बता दें, जिससे वे भी इससे लाभ उठा सकें। सत्संग ध्यान ब्लॉग का सदस्य बने। इससे आपको आने वाले  पोस्ट की सूचना नि:शुल्क मिलती रहेगी। हमारा अगला पोस्ट पढ़ना ना भूलें। इस वीडियो में उपर्युक्त लेख को पाठ करके सुनाया गयाा है।



रामचरितमानस सार सटीक👉
प्रभु प्रेमियों रामचरितमानस सार सटीक के पुस्तक के अन्य लेखों और प्रसंगों को पढ़ने के लिए तथा इस पुस्तक के बारे में अन्य बातों की जानकारी के लिए इस पुस्तक को अवश्य खरीद ले. पुस्तक के बारे में जानकारी के लिए    👉 यहां दवाएं.

सद्गुरु महर्षि मेंहीं परमहंस जी महाराज की पुस्तकें मुफ्त में पाने के लिए  यहां दवाएं।
---×---

MS02-38, रावण विभीषण संवाद सुमति कुमति वर्णन ।। Ramayan chaupai in hindi with meaning MS02-38,  रावण विभीषण संवाद सुमति कुमति वर्णन ।। Ramayan chaupai in hindi with meaning Reviewed by सत्संग ध्यान on 6/19/2020 Rating: 5

कोई टिप्पणी नहीं:

सत्संग ध्यान से संबंधित प्रश्न ही पूछा जाए।

Popular Posts

Ad

Blogger द्वारा संचालित.