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शब्दकोष 26 || ध्यानाभ्यास से नशा तक के शब्दों के शब्दार्थ, व्याकरणिक परिचय और प्रयोग इत्यादि का वर्णन

महर्षि मेँहीँ+मोक्ष-दर्शन का शब्दकोष / ध

     प्रभु प्रेमियों ! ' महर्षि मेँहीँ+मोक्ष-दर्शन का शब्दकोश ' नाम्नी प्रस्तुत लेख में ' मोक्ष - दर्शन ' + 'महर्षि मेँहीँ पदावली शब्दार्थ भावार्थ और टिप्पणी सहित' + 'गीता-सार' + 'संतवाणी सटीक' आदि धर्म ग्रंथों में गद्यात्मक एवं पद्यात्मक वचनों में आये शब्दों के अर्थ लिखे गये हैं । उन शब्दों को शब्दार्थ सहित यहाँ लिखा गया है। ये शब्द किस वचन में किस लेख में प्रयुक्त हुए हैं, उसकी भी जानकारी अंग्रेजी अक्षर तथा संख्या नंबर देकर कोष्ठक में लिंक सहित दिया गया है। कोष्ठकों में शब्दों के व्याकरणिक परिचय भी देने का प्रयास किया गया है और शब्दों से संबंधित कुछ सूक्तियों का संकलन भी है। जो पूज्यपाद लालदास जी महाराज  द्वारा लिखित व संग्रहित  है । धर्मप्रेमियों के लिए यह कोष बड़ी ही उपयोगी है । आईए इस कोष के बनाने वाले महापुरुष का दर्शन करें--

दृष्टियोग - ध्यान-बल  तक के शब्दों का अर्थ पढ़ने के लिए   👉  यहां दवाएं

सद्गुरु महर्षि में और बाबा लाल दास जी
बाबा लालदास जी और सद्गुरु महाराज

महर्षि मेँहीँ+मोक्ष-दर्शन का शब्दकोष

ध्यानाभ्यास - नशा

 

ध्यानाभ्यास ( सं ०, पास) = देखे हुए इष्टदेव के स्थूल रूप को अपने मानस पटल पर ज्यों - का त्यों उगाने का प्रयास करना ।

ध्येय ( सं ० , वि ० ) = ध्यान करने के योग्य । ( पुं ० ) वह जिसका ध्यान किया जाए । 

ध्येय तत्त्व ( सं ० , पुं ० ) = वह तत्त्व ( प्राणी या पदार्थ ) जिसका ध्यान करने का अभ्यास किया जाए । 

ध्रुव निश्चित ( सं ० , वि ० ) = धुव तारे की तरह अटल , बिल्कुल सत्य ।  

ध्रुव - संभव ( सं ० , वि ० ) = ध्रुव - निश्चित , ध्रुव तारे की तरह अटल - स्थिर । ( पुं ० ) बिल्कुल सत्य बात । 

ध्वनित ( सं ० , वि ० ) = ध्वनि - युक्त , शब्दायमान । 

ध्वनि - धार ( स्त्री ० ) = शब्द की धारा । 

(ध्वनियोग = शब्दयोग । P07 ) 

(ध्वनि राम = राम ध्वनि , रामनाम , सर्वव्यापक ध्वनि , आदिनाद जो समस्त प्रकृति - मंडलों में फैला हुआ है । ( राम व्यापक ) P05 ) 

ध्वन्यात्मक अनाहत आदिशब्द ( सं ० , पुं ) = सृष्टि के पूर्व परमात्मा से उत्पन्न वह शब्द जो ध्वनिमय है और किसी पदार्थ के कंपन का फल नहीं है । 

ध्वन्यात्मक शब्द ( सं ० , पुं ० ) वह शब्द जिसके अक्षरों का पता नहीं लग सके कि वह किस - किस अक्षर के मेल से बना हुआ है , जो शब्द अक्षरों से नहीं , ध्वनि से बना हुआ हो ; जैसे पशु - पक्षी की आवाजें , किसी वाद्य यंत्र आदि की आवाजें । 


नकल ( अ ० , स्त्री ० ) = अनुकरण । 

नगाड़ा ( फा ० नक्कारः , पुं ० ) = डुगडुगी की तरह का एक बड़ा बाजा । 

नचावनिहारे ( हिं ० , वि ० ) = नचानेवाले । 

{नजर निहाल ( अरबी - फारसी ) = दृष्टि डालकर सभी इच्छाओं को पूर्ण कर देनेवाला या खुशहाल कर देनेवाला । P03 }

नजात ( अ ० , स्त्री ० ) = मुक्ति , छुटकारा । 

नट ( सं ० , पुं ० ) = नाचनेवाला , स्वाँग करनेवाला ।   

नटी ( वि ० स्त्री ० ) = नाचनेवाली । 

(नदरि = नजर , दृष्टि। नानक वाणी 52 )

(नन = बिना । नानक वाणी 53 

नफीरी ( फा ० , स्त्री ० ) = तुरही , शहनाई , एक प्रकार का लंबा बाजा जो मुँह से फूँककर बजाया जाता है , बाँसुरी की तरह का एक बाजा ।  

(नमामी =  नमामि , प्रणाम करता हूँ ।  P13  )

नमूना  ( फा०, पुं० ) = उदाहरण ।

(नमो = नमः , नमस्कार , प्रणाम । P03 )

नम्रता ( सं० , स्त्री ०) = नम्र होने का भाव, झुक कर रहने का भाव, अहंकार-रहित होकर रहने का भाव।

(न व्यक्त है = जो इन्द्रियों के ग्रहण में आनेयोग्य पदार्थों में से कुछ भी नहीं है । P06 ) 

नशा ( अ ० नश्शः , पुं ० ) = बीड़ी , सिगरेट , शराब आदि कोई नशीला पदार्थ , वह मानसिक अवस्था जो  नशीले पदार्थ के सेवन से होती है।


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    प्रभु प्रेमियों ! संतमत की बातें बड़ी गंभीर हैं । सामान्य लोग इनके विचारों को पूरी तरह समझ नहीं पाते । इस पोस्ट में  ध्यानाभ्यास, ध्येय, ध्येय तत्व, ध्रुव निश्चित, ध्रुव-संभव, ध्वनित, ध्वनि-धार, ध्वनात्मक अनाहत आदिशब्द, ध्वनात्मक शब्द, नकल, नगाड़ा, नचावनिहारे, नजात, नट, नटी, नफीरी, नमूना, नम्रता, नशा आदि से संबंधित बातों पर चर्चा की गई हैं । हमें विश्वास है कि इसके पाठ से आप संतमत को सहजता से समझ पायेंगे। इतनी जानकारी के बाद भी अगर आपके मन में किसी प्रकार का शंका या कोई प्रश्न है, तो हमें कमेंट करें। इस लेख के बारे में अपने इष्ट-मित्रों को भी बता दें, जिससे वे भी इससे लाभ उठा सकें। सत्संग ध्यान ब्लॉग का सदस्य बने। इससे आपको आने वाले  पोस्ट की सूचना नि:शुल्क मिलती रहेगी।




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शब्दकोष 26 || ध्यानाभ्यास से नशा तक के शब्दों के शब्दार्थ, व्याकरणिक परिचय और प्रयोग इत्यादि का वर्णन शब्दकोष 26  ||  ध्यानाभ्यास से नशा   तक के शब्दों के शब्दार्थ, व्याकरणिक परिचय और प्रयोग इत्यादि का वर्णन Reviewed by सत्संग ध्यान on 12/13/2021 Rating: 5

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