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मोक्ष दर्शन (67-70), दृष्टियोग की अनुभूति और शब्द अभ्यास -सद्गुरु महर्षि मेंहीं

 सत्संग योग भाग 4 मोक्ष दर्शन/07

      प्रभु प्रेमियों ! भारतीय साहित्य में वेद, उपनिषद, उत्तर गीता, भागवत गीता, रामायण आदि सदग्रंथों का बड़ा महत्व है। इन्हीं सदग्रंथों में से ध्यान योग से संबंधित बातों को संग्रहित करके सद्गुरु महर्षि मेंहीं परमहंस जी महाराज ने "सत्संग योग भाग 4"  नामक पुस्तक की रचना की है। इसमें जो मोक्ष से संबंधित उनकी निजी अनुभूति युक्त बातें हैं। उसे पारा संख्या देकर 'सत्संग योग' के चौथे भाग में व्यक्त किया गया है। उन्हीं प्रसंगोों में से आज के प्रसंग में जानेंगे- ‌पारा संख्या   67-70  के बारे में। इसमेें बताया गया है कि दृष्टियोग की अनुभूति और शब्द अभ्यास की शुरुआत कैसे करें।

मोक्ष दर्शन (67-70), दृष्टियोग की अनुभूति और शब्द अभ्यास -सद्गुरु महर्षि मेंहीं/सद्गुरु महर्षि
सद्गुरु महर्षि



दृष्टियोग की अनुभूति और शब्द अभ्यास
      दृष्टि योग की अनुभूति संतो के भिन्न-भिन्न हो सकती है ? परन्तु जो क्रिया गुरु महाराज के द्वारा बताया जाता है । उसके अनुसार गुरु महाराज को जो-जो अनुभव हुए हैं । उन बातों का खुलासा निम्नलिखित गद्यों में किया गया है । जो निम्न चित्र में प्रकाशित है-

मोक्ष दर्शन (67-70), दृष्टियोग की अनुभूति और शब्द अभ्यास -सद्गुरु महर्षि मेंहीं/मोक्ष दर्शन पारा 67 से 70
मोक्ष दर्शन पारा 67 से 70

     मोक्ष दर्शन के पारा संख्या  67-70  तक में हम लोगों ने जाना कि  दृष्टियोग की अनुभूति और शब्द अभ्यास थी शुरुआत कैसे करें । आदि बातों को। इतनी जानकारी के बाद भी अगर आपके मन में किसी प्रकार का शंका या कोई प्रश्न है, तो हमें कमेंट करें। इस अनुभूति युक्त बातें के बारे में अपने इष्ट मित्रों को भी बता दें, जिससे वे भी लाभ उठा सकें। सत्संग ध्यान ब्लॉग का सदस्य बने। इससे आपको आने वाले प्रवचन या पोस्ट की सूचना नि:शुल्क मिलती रहेगी। हमारा अगला पोस्ट अवश्य पढ़ें। जय गुरु महाराज।



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मोक्ष दर्शन (67-70), दृष्टियोग की अनुभूति और शब्द अभ्यास -सद्गुरु महर्षि मेंहीं मोक्ष दर्शन (67-70), दृष्टियोग की अनुभूति और शब्द अभ्यास -सद्गुरु महर्षि मेंहीं Reviewed by सत्संग ध्यान on जनवरी 12, 2019 Rating: 5

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