प्रभु प्रेमियों ! 'महर्षि मेँहीँ साहित्य सूची' की चौदहवीं पुस्तक "सत्संग- सुधा भाग 3" है । इस पुस्तक में सद्गुरु महर्षि मेँहीँ परमहंस जी महाराज के 24 प्रवचन हैं। इन प्रवचनों में मानव-जीवन के सर्वांगीण और पूर्ण विकास तथा कल्याण के लिए ईश्वर भक्ति या अध्यात्म-ज्ञान की अनिवार्य आवश्यकता है। वेदों, उपनिषदों, गीता, सन्तवाणियों में सदा से ईश्वर - स्वरूप, उसके साक्षात्कार करने की सयुक्ति एवं अनिवार्य सदाचार- पालन के निर्देश बिल्कुल एक ही हैं, केवल भाषा, शैली और शब्द-योजनाओं का ही उनमें भेद हैं- - तथ्य और अर्थ सभी के साररूप में एक ही हैं। ऐसा बताया गया है। आइये इस पुस्तक का अवलोकन करते हैं--
महर्षि मेँहीँ साहित्य सीरीज की तेरहवीं पुस्तक "MS13 सत्संग- सुधा भाग 2 || 18 प्रवचनों में विंदु ध्यान और नाद ध्यान सहित व्यवहारिक ज्ञान भी है। " के बारे में जानने के लिए 👉 यहां दवाएँ।
सत्संग सुधा भाग 3
वेद-उपनिषद्, गीता-रामायण एवं सन्तवाणी सम्मत ईश्वर-भक्ति, सदाचार आदि का वर्णन
प्रभु प्रेमियों ! 60 वर्षों से बिंदु-नाद की साधना करते हुए संत- साहित्य के प्रमाणों के आधार पर सद्गुरु महर्षि मेँहीँ परमहंस जी महाराज ने अपने अट्ठारह प्रवचनों में सत्संग, ध्यान, ईश्वर, सद्गुरु, सदाचार एवं संसार में रहने की कला के बारे में बताये हैं। साथ ही यह भी बताया गया है कि वेद-उपनिषद एवं संत- साहित्य में वर्णित बातें बिल्कुल सत्य हैं और जांचने पर प्रत्यक्ष है। लोग इन साधनाओं को करके अपना इहलोक और परलोक के जीवन को सुखमय बना सकते हैं । जिन लोगों ने इसका अनुसरण किया वे धन्य धन्य हो रहे हैं । आप भी पीछे न रहे पढ़िये इन प्रवचनों को और मानव जीवन को धन्य-धन्य बनाइये।
सत्संग सुधा भाग 3.
.
MS14_आंतरिक_पेज_1
MS14_आंतरिक_पेज_ 2
MS14_आंतरिक_पेज_3
MS14_आंतरिक_पेज_4
MS14_आंतरिक_पेज_5
MS14_आंतरिक_पेज_6
MS14_आंतरिक_पेज_7
MS14_आंतरिक_पेज_8
सत्संग सुधा भाग 3 लास्ट कवर
सत्संग- सुधा भाग 3
विषय-सूची
क्र. विषय
सब कोई सत्संग में आइए
अंतःकरण को पवित्र रखो
ईश्वर प्राप्ति के लिए गुरु-ज्ञान चाहिए
ईश्वर से ही मांगो, किसी देव से नहीं
माया में सुख नहीं
यह शरीर भोग-विलास के लिए नहीं
जीवन काल में मुक्ति प्राप्त कीजिए
शांति अंदर में है
भगवान श्रीराम का राज्य किधर है ?
ईश्वर - भजन महाभय से बचाता है।
बात-बात में गुरु की आवश्यकता है।
केवल सुनिये नहीं, कीजिए भी
संतमत सनातन धर्म है
संसार दुःखमय है १४..
मूर्ति में ईश्वर है, मूर्ति ईश्वर नहीं
संतमत नहीं सिखाता कि गृहस्थी छोड़ दो
ईश्वर इन्द्रियों के ज्ञान से बाहर है
भीतर की सफाई ध्यान से होती
निर्विषय की ओर चलो
परमप्रभु परमात्मा एक है ।
ईश्वर की सेवा क्या है
तुम भी करो तो मालूम होगा
ईश्वर को प्रणाम कैसे करें
बाहर का रस फीका पड़ जाता है
---×---
उपरोक्त प्रवचनों को पढ़ने के लिए उपरोक्त प्रवचनों के बिषयों पर क्लिक करें--
प्रभु प्रेमियों ! महर्षि मेँहीँ साहित्य 📚 सीरीज के इस पोस्ट का पाठ पढ़कर आप लोगों ने जाना कि 👉 सद्गुरु महर्षि मेँहीँ परमहंस जी महाराज का प्रवचन वेद, उपनिषद, संतवाणी और धर्म शास्त्रों के कोटेशन से पुष्ट होता है और उसका पाठ करके उस पर आचरण करके मनुष्य जीवन के परम लक्ष्य को साधा जा सकता है । सत्संग, ईश्वर- भक्ति, सदाचार का पालन करना और अपनी जीवका के लिए कुछ उद्यम करना, जीवन के लक्ष्य साधने में आवश्यक कारक है। आदि बातें । इतनी जानकारी के बाद भी अगर आपके मन में किसी प्रकार का कोई संका या प्रश्न है तो हमें कमेंट करें। इस लेख के बारे में अपने इष्ट मित्रों को भी बताएं, जिससे वे भी लाभ उठा सकें। सत्संग ध्यान ब्लॉग के सदस्य बने । इससे आप आने वाले हर पोस्ट की सूचना अपने ईमेल पर नि:शुल्क भेज देंगे। ऐसा विश्वास है .। जय गुरु महाराज.!!
MS15 . सत्संग-सुधा , चतुर्थ भाग- इसका प्रकाशन वर्ष 2003 ई0। इसमें 26 प्रवचनों का संकलन है। इसमें मानव जीवन के सर्वांगीण विकास और कल्याण के लिए ईश्वर-भक्ति और आध्यात्मिक ज्ञान पर विशेष रूप से विश्लेषण हैं। आज विज्ञान का युग है। वैज्ञानिक आविष्कारों से नए-नए चमत्कार हो रहे हैं। सुख-सुविधाओं में अभिवृद्धि हो रही है। देश और काल की दूरी दूर हो गई है; परन्तु व्यक्ति के हृदय की दूरी बढ़ गई है। साहचर्य, सामंजस्य, सहयोग, सद्भाव आदि सद्गुणों का अभाव होता जा रहा है। जीवन के हर क्षेत्र में व्यक्ति-राग, रोष, घृणा-द्वेष से संचालित दीखता है। विशेषकर धार्मिक असहिष्णुता देश और समाज को कलंकित-विखंडित करने पर तुला है। ऐसी विषम परिस्थिति में संतों के ज्ञान की बड़ी आवश्यकता है। गोस्वामी तुलसीदासजी महाराज के शब्दों में हम कह सकेंगे- जो मारग श्रुति साधु दिखाये। तेहि मग चलत सबै सुख पावै ।। समाज और देश के कल्याण के लिए सदगुरु महाराज के इन प्रवचनों की बड़ी आवश्यकता है। इसी आवश्यकता की पूर्ति के लिए इसका प्रकाशन किया गया है ( और जाने )
सद्गुरु महर्षि मेँहीँ परमहंस जी महाराज की पुस्तकें मुफ्त में पाने के लिए शर्तों के बारे में जानने के लिए 👉 यहाँ दवाएँ।
---×---
MS14 सत्संग- सुधा भाग 3 || वेद-उपनिषद्, गीता-रामायण एवं सन्तवाणी सम्मत ईश्वर-भक्ति, सदाचार आदि का वर्णन
Reviewed by सत्संग ध्यान
on
6:55:00 am
Rating: 5
कोई टिप्पणी नहीं:
प्रभु प्रेमियों ! कृपया वही टिप्पणी करें जो आप किसी संतवाणी से प्रूफ कर सके या समझ बनी हो किसी ऐसी बानी का उपयोग न करें जिनसे आपका भी समय खराब हो और हमारा भी जय गुरु महाराज
कोई टिप्पणी नहीं:
प्रभु प्रेमियों ! कृपया वही टिप्पणी करें जो आप किसी संतवाणी से प्रूफ कर सके या समझ बनी हो किसी ऐसी बानी का उपयोग न करें जिनसे आपका भी समय खराब हो और हमारा भी जय गुरु महाराज