MS14 सत्संग- सुधा भाग 3 || वेद-उपनिषद्, गीता-रामायण एवं सन्तवाणी सम्मत ईश्वर-भक्ति, सदाचार आदि का वर्णन
MS14 सत्संग-सुधा भाग 3
वेद-उपनिषद्, गीता-रामायण एवं सन्तवाणी सम्मत ईश्वर-भक्ति, सदाचार आदि का वर्णन
प्रभु प्रेमियों ! 60 वर्षों से बिंदु-नाद की साधना करते हुए संत- साहित्य के प्रमाणों के आधार पर सद्गुरु महर्षि मेँहीँ परमहंस जी महाराज ने अपने अट्ठारह प्रवचनों में सत्संग, ध्यान, ईश्वर, सद्गुरु, सदाचार एवं संसार में रहने की कला के बारे में बताये हैं। साथ ही यह भी बताया गया है कि वेद-उपनिषद एवं संत- साहित्य में वर्णित बातें बिल्कुल सत्य हैं और जांचने पर प्रत्यक्ष है। लोग इन साधनाओं को करके अपना इहलोक और परलोक के जीवन को सुखमय बना सकते हैं । जिन लोगों ने इसका अनुसरण किया वे धन्य धन्य हो रहे हैं । आप भी पीछे न रहे पढ़िये इन प्रवचनों को और मानव जीवन को धन्य-धन्य बनाइये। आइये इस पुस्तक का दर्शन करें--
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| सत्संग सुधा भाग 3. |
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सद्गुरु महर्षि मेँहीँ साहित्य सूची
MS15 . सत्संग-सुधा , चतुर्थ भाग- इसका प्रकाशन वर्ष 2003 ई0। इसमें 26 प्रवचनों का संकलन है। इसमें मानव जीवन के सर्वांगीण विकास और कल्याण के लिए ईश्वर-भक्ति और आध्यात्मिक ज्ञान पर विशेष रूप से विश्लेषण हैं। आज विज्ञान का युग है। वैज्ञानिक आविष्कारों से नए-नए चमत्कार हो रहे हैं। सुख-सुविधाओं में अभिवृद्धि हो रही है। देश और काल की दूरी दूर हो गई है; परन्तु व्यक्ति के हृदय की दूरी बढ़ गई है। साहचर्य, सामंजस्य, सहयोग, सद्भाव आदि सद्गुणों का अभाव होता जा रहा है। जीवन के हर क्षेत्र में व्यक्ति-राग, रोष, घृणा-द्वेष से संचालित दीखता है। विशेषकर धार्मिक असहिष्णुता देश और समाज को कलंकित-विखंडित करने पर तुला है। ऐसी विषम परिस्थिति में संतों के ज्ञान की बड़ी आवश्यकता है। गोस्वामी तुलसीदासजी महाराज के शब्दों में हम कह सकेंगे- जो मारग श्रुति साधु दिखाये। तेहि मग चलत सबै सुख पावै ।। समाज और देश के कल्याण के लिए सदगुरु महाराज के इन प्रवचनों की बड़ी आवश्यकता है। इसी आवश्यकता की पूर्ति के लिए इसका प्रकाशन किया गया है ( और जाने )
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Reviewed by सत्संग ध्यान
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7:55:00 am
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