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शब्दकोष 10 || इति से ईश्वर शब्द तक के शब्दों के शब्दार्थादि || संतमत+मोक्ष-दर्शन का शब्दकोष

संतमत+मोक्ष-दर्शन का शब्दकोष / इ-ई

     प्रभु प्रेमियों ! ' संतमत+ मोक्ष - दर्शन का शब्दकोश ' नाम्नी प्रस्तुत लेख में ' मोक्ष - दर्शन ' + 'महर्षि मेंहीं पदावली शब्दार्थ भावार्थ और टिप्पणी सहित' + 'गीता-सार' + 'संतवाणी सटीक' आदि धर्म ग्रंथों में गद्यात्मक एवं पद्यात्मक वचनों में आये शब्दों के अर्थ लिखे गये हैं . कोष्ठकों में शब्दों के व्याकरणिक परिचय भी देने का प्रयास किया गया है और शब्दों से संबंधित कुछ सूक्तियों का संकलन किया गया है. जो पूज्यपाद लालदास जी महाराज द्वारा लिखित व संग्रहित  है । धर्मप्रेमियों के लिए यह कोष बड़ी ही उपादेय है । आईए इस कोष के बनाने वाले महापुरुष का दर्शन करें.

आदिनाद - आहत शब्द  तक के शब्दों का अर्थ पढ़ने के लिए   👉  यहां दवाएं

सद्गुरु महर्षि में और बाबा लाल दास जी
लालदास जी और गुरु बाबाबाबा


इति - ईश्वर    शब्द  तक के शब्द और उसके अर्थ


इति - ईश्वर


इ+ई


इति ( सं ० , स्त्री ० ) = पूर्णता , समाप्ति । ( अव्यय ) यह, इस प्रकार । 

इन्द्रिय ( सं ० , स्त्री ० ) = शरीर का वह अंग या अवयव जिससे प्राणी कोई काम करता है या सांसारिक विषय का ज्ञान प्राप्त करता है । 

(इन्द्रिय = कर्मेन्द्रियाँ और ज्ञानेन्द्रियाँ । P06 ) 

इन्द्रिय - मंडल ( सं ० , पुं ० ) = शरीर के अन्दर वह स्थान जहाँ तक जीवात्मा इन्द्रियों के साथ रहता है , वह स्थान जहाँ तक कोई इन्द्रिय अपना काम कर सकती है । ( त्रिकुटी या कारण मंडल तक इन्द्रिय मंडल है । ) 

इन्द्रियातीत ( सं ० वि ० ) = इन्द्रिय से या इन्द्रिय - ज्ञान से बाहर , इन्द्रिय के ग्रहण में नहीं आनेवाला । 

इम्पार्ट ( अँ ० , स ० क्रि ० ) = प्रदान करना ।

इम्ब्रेस ( अँ ० स ० क्रि ० ) छाती से लगाना । 

इश्क ( अ ० पुं ० ) प्रेम , मुहब्बत ।

इष्ट ( सं ० वि ० ) = इच्छित , मनचाहा । ( पुं ० ) वह जिसको हम प्राप्त करना चाहते हैं , वह जिसका हम ध्यान करते हैं । 

इष्टदेव ( सं ० , पॅ ० ) = देवता के समान आदरणीय पूजनीय इष्ट | 

ईश्वर ( सं ० , पॅ ० ) परमात्मा का वह अंश जो किसी स्थान विशेष तक ही अपना प्रभुत्व ( शासन , मालिकपना , स्वामित्व या अधिकार ) रखता हो ।


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     प्रभु प्रेमियों ! संतमत की बातें बड़ी गंभीर हैं । सामान्य लोग इसके विचारों को पूरी तरह समझ नहीं पाते । इन पोस्टों  में संत , संतमत , संतमत की उपयोगिता , जड़ प्रकृति , चेतन प्रकृति , आदिनाद , सृष्टि - क्रम , सृष्टि के मंडल , जीव , ब्रह्म , ईश्वर , परमेश्वर , ईश्वर की भक्ति , परम मुक्ति , संतमत की साधना - पद्धतियों ( मानस जप , मानस ध्यान , दृष्टियोग तथा शब्द - साधना ) , साधना - पद्धतियों के अभ्यास से उत्पन्न अनुभूतियों , सद्गुरु की महत्ता , यम - नियम , साधकों के आहार-विहार, सत्संग,  इति, इन्द्रिय, इन्द्रिय मंडल, इंद्रियातीत, इम्पार्ट, इम्ब्रेस, इश्क, इष्ट, इष्टदेव, ईश्वर,  आदि से संबंधित बातों पर चर्चा की गई हैं । ' 



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शब्दकोष 10 || इति से ईश्वर शब्द तक के शब्दों के शब्दार्थादि || संतमत+मोक्ष-दर्शन का शब्दकोष शब्दकोष 10  ||  इति से ईश्वर  शब्द तक के शब्दों के शब्दार्थादि  ||  संतमत+मोक्ष-दर्शन का शब्दकोष Reviewed by सत्संग ध्यान on 12/09/2021 Rating: 5

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