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शब्दकोष-20 जड़ातीत - ज्ञाता तक के शब्दों के शब्दार्थादि || संतमत+मोक्ष-दर्शन का शब्दकोष

संतमत+मोक्ष-दर्शन का शब्दकोष / ज

      प्रभु प्रेमियों ! ' संतमत+ मोक्ष - दर्शन का शब्दकोश ' नाम्नी प्रस्तुत लेख में ' मोक्ष - दर्शन ' + 'महर्षि मेंहीं पदावली शब्दार्थ भावार्थ और टिप्पणी सहित' + 'गीता-सार' + 'संतवाणी सटीक' आदि धर्म ग्रंथों में गद्यात्मक एवं पद्यात्मक वचनों में आये शब्दों के अर्थ लिखे गये हैं . कोष्ठकों में शब्दों के व्याकरणिक परिचय भी देने का प्रयास किया गया है और शब्दों से संबंधित कुछ सूक्तियों का संकलन किया गया है. जो पूज्यपाद लालदास जी महाराज द्वारा लिखित संपादित व संग्रहीत  है । धर्मप्रेमियों के लिए यह कोष बड़ी ही उपादेय है । आईए इस कोष के बनाने वाले महापुरुष का दर्शन करें.


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सद्गुरु महर्षि में और बाबा लाल दास जी
लालदास जी और गुरु बाबाबाबा


जड़ातीत - ज्ञाता    शब्द  तक के शब्द और उसके अर्थ


जड़ातीत - ज्ञाता

 

जड़ातीत ( वि ० ) = जड़ात्मक प्रकृति-मंडलों से रहित । 

जड़ात्मक आच्छादन - मंडल ( पुं ० ) - वह आच्छादन - मंडल ( आवरण मंडल ) जो जड़ हो ; जैसे स्थूल मंडल , सूक्ष्म मंडल , कारण मंडल और महाकारण मंडल । 

जड़ात्मक आवरण ( पुं ० ) = जड़ प्रकृति के मंडलों का आवरण ; जैसे स्थूल , सूक्ष्म , कारण और महाकारण - मंडल । 

जड़ात्मक प्रकृति ( स्त्री ० ) = वह प्रकृति जिसका स्वरूप अज्ञानमय हो , जड़ प्रकृति , अपरा प्रकृति । 

जड़ात्मक मूल प्रकृति ( स्त्री ० ) साम्यावस्थाधारिणी जड़ात्मिका मूल प्रकृति जिसमें सत्त्व , रज और तम- ये तीनों गुण समान समान मात्रा में रहते हैं । 

जड़ात्मक सगुण प्रकृति ( स्त्री ० ) = वह प्रकृति जो अज्ञानमयी और त्रय गुणों से बनी हुई हो , जड़ प्रकृति , अपरा प्रकृति । 

जत = यतिपन , इन्द्रिय संयम , त्याग , वैराग्य , यम-नियम ।(श्रीचंद वाणी   

जरद ( फा ० जर्द , वि ० ) = पीला । {जरद = पीला , वैश्य । (श्रीचंद वाणी)}     

जाग्रत् अवस्था ( सं ० , स्त्री ० ) जगी हुई अवस्था , जिस अवस्था में जीवात्मा चौदहो इन्द्रियों के साथ रहता है , जिस अवस्था में प्राणी को अपने शरीर और बाहरी संसार का भी ज्ञान होता है ।

जाग्रत् दृष्टि ( सं ० , स्त्री ० ) = वह दृष्टि जिससे जगी हुई अवस्था मे  कुछ देखते हैं । 

जाती ( अ ० , वि ० ) = अपना , निज व्यक्तिगत , अपना खास ।

जाती नाम ( अ ० सं ० , पुं ० ) अपना खास नाम , अपना असली नाम ( ध्वन्यात्मक सारशब्द परमात्मा का जाती नाम है ; क्योंकि सुरत से पकड़े जाने पर यह नाम साधक को परमात्मा से मिला देता है । ) 

जानकारी ( स्त्री ० ) = ज्ञान । 

जारी ( अ ० , वि ० ) = प्रवाहित , बहता हुआ , प्रचलित ।  

जीव ( सं ० , पुं ० ) = प्रत्येक शरीर में व्याप्त परमात्मा का अंश , जीवात्मा , चेतन- आत्मा । 

जीवता ( सं ० , स्त्री ० ) जीव भाव , जीव - दशा , जीव होने का = भाव । 

जीवन - काल ( सं ० , पुं ० ) = जन्म से लेकर मृत्यु तक का समय । 

जीवन - मुक्त ( सं ० , वि ० ) जीवन्मुक्त , जीते - जी मुक्त , जो जीवन - काल में ही शरीर और संसार से ऊपर उठ गया हो । 

जोर ( फा ० , पुं ० ) = बल , शक्ति । 

ज्ञप्तिमनीनयत् ( सं ० , क्रियापद ) - ज्ञान करा दिया । 

ज्ञात ( सं ० , वि ० ) = जाना हुआ । जिसकी जानकारी हुई हो ।

ज्ञाता ( सं ० , वि ० ) = ज्ञान रखनेवाला, जानकार ।


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     प्रभु प्रेमियों ! संतमत की बातें बड़ी गंभीर हैं । सामान्य लोग इसके विचारों को पूरी तरह समझ नहीं पाते । इन पोस्टों  में संत , संतमत , संतमत की उपयोगिता , जड़ प्रकृति , चेतन प्रकृति , आदिनाद , सृष्टि - क्रम , सृष्टि के मंडल , जीव , ब्रह्म , ईश्वर , परमेश्वर , ईश्वर की भक्ति , परम मुक्ति , संतमत की साधना - पद्धतियों ( मानस जप , मानस ध्यान , दृष्टियोग तथा शब्द - साधना ) , साधना - पद्धतियों के अभ्यास से उत्पन्न अनुभूतियों , सद्गुरु की महत्ता , यम - नियम , साधकों के आहार-विहार, सत्संग,  जड़ात्मक आच्छादन-मंडल, जड़ात्मक आवरण, जड़ात्मक प्रकृति, जड़ात्मक मूल प्रकृति, जड़ात्मक सगुन प्रकृति, जरद, जाग्रत अवस्था, जाग्रत दृष्टि, जाति, जाति नाम, जानकारी, जारी, जीव, जीवता, जीवन-काल, जीवन-मुक्त, जोर, ज्ञप्तिमनीनयत्, ज्ञात, ज्ञाता,  आदि से संबंधित बातों पर चर्चा की गई हैं । 



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शब्दकोष-20 जड़ातीत - ज्ञाता तक के शब्दों के शब्दार्थादि || संतमत+मोक्ष-दर्शन का शब्दकोष शब्दकोष-20  जड़ातीत - ज्ञाता   तक के शब्दों के शब्दार्थादि  ||  संतमत+मोक्ष-दर्शन का शब्दकोष Reviewed by सत्संग ध्यान on 12/13/2021 Rating: 5

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