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शब्दकोष-19 चिदानंदमय - जड़ातीत तक के शब्दों के शब्दार्थादि || संतमत+मोक्ष-दर्शन का शब्दकोष

संतमत+मोक्ष-दर्शन का शब्दकोष / च

      प्रभु प्रेमियों ! ' संतमत+ मोक्ष - दर्शन का शब्दकोश ' नाम्नी प्रस्तुत लेख में ' मोक्ष - दर्शन ' + 'महर्षि मेंहीं पदावली शब्दार्थ भावार्थ और टिप्पणी सहित' + 'गीता-सार' + 'संतवाणी सटीक' आदि धर्म ग्रंथों में गद्यात्मक एवं पद्यात्मक वचनों में आये शब्दों के अर्थ लिखे गये हैं . कोष्ठकों में शब्दों के व्याकरणिक परिचय भी देने का प्रयास किया गया है और शब्दों से संबंधित कुछ सूक्तियों का संकलन किया गया है. जो पूज्यपाद लालदास जी महाराज द्वारा लिखित संपादित व संग्रहीत  है । धर्मप्रेमियों के लिए यह कोष बड़ी ही उपादेय है । आईए इस कोष के बनाने वाले महापुरुष का दर्शन करें.

चिदानंदमय - जड़ातीत  तक के शब्दों का अर्थ पढ़ने के लिए   👉  यहां दवाएं।
   

सद्गुरु महर्षि में और बाबा लाल दास जी
लालदास जी और गुरु बाबाबाबा


चिदानंदमय - जड़ातीत    शब्द  तक के शब्द और उसके अर्थ


चिदानंदमय - जड़ातीत

 

चिदानन्दमय ( सं ० , वि ० ) = ज्ञान और आनन्द से भरपूर ।

चिदानन्दमय शरीर ( सं ० , पुं ० ) जो शरीर परिवर्त्तन - रहित , ज्ञानमय और आनन्दमय हो , चेतन शरीर , कैवल्य शरीर । 

चिह्न ( सं ० , पुं ० ) = लक्षण , वह जिससे किसी पदार्थ की पहचान हो जाए , धब्बा , दाग । 

चिह्नित ( सं ० , वि ० ) किया हुआ , चिह्न - युक्त । 

चूड़ा = हाथ में पहनने का एक आभूषण ।  (श्रीचंद वाणी

चेतन ( सं ० , वि ० पुं ० ) = ज्ञानवान् । ( पुं ० ) वह तत्त्व जो अपना भी ज्ञान कर सके और दूसरे का भी , चेतन प्रकृति , परा प्रकृति । 

चेतन प्रकृति ( सं ० , स्त्री ० ) ज्ञानमयी प्रकृति , परा प्रकृति ।

चेतन धार ( स्त्री ० ) = चेतन तत्त्व की धारा , सुरत । 

चेतनवृत्ति ( सं ० , स्त्री ० ) = सुरत , वह चेतन तत्त्व जिसके सहारे शरीर टिका हुआ रहता है । 

चेतनात्मक निर्गुण प्रकृति ( सं ० , स्त्री ० ) जो प्रकृति ज्ञानमयी और त्रय गुण - रहित हो , परा प्रकृति , चेतन प्रकृति ।  

चेतो =चेताओ , जगाओ ।  (श्रीचंद वाणी)

चैतन्य ( सं ० वि ० ) = चेतन , ज्ञानमय ( पुं ० ) सुरत , चेतनवृत्ति , चेतनता , ज्ञानमय होने का भाव , ज्ञान , जागृति । 

चैतन्य क्षेत्र ( सं ० , पुं ० ) = चेतन मंडल । 

चैतन्य तत्त्व ( सं ० , पुं ० ) = चेतनता रखनेवाला पदार्थ , चेतन तत्त्व । 

चैतन्यातीत ( सं ० , वि ० ) = चेतन प्रकृति - मंडल से रहित ।

चोरी ( स्त्री ० ) = किसी की कोई वस्तु उसकी अनुमति के बिना छिपाकर ले लेना । 

 


जंगाली ( फा ० जंगारी , वि ० ) = तूतिये के रंग का हरा या नीला रंग । 

जग ( सं ० , पुं ० ) = संसार । 

जगद्गुरु ( सं ० , वि ० ) = संसार के लोगों को ज्ञान देनेवाला ।

जगमगाना ( अ ० क्रि ० ) = जगमग करना , प्रकाशित होना , चमकना । 

जगाना ( स ० क्रि ० ) = सोये हुए को उठाना , प्रकट करना , उत्तेजित करना , भड़काना । 

जड़ ( वि ० ) = अज्ञानमय । ( पुं ० ) वह पदार्थ जो न अपना ज्ञान कर सके और न दूसरे का ; जड़ प्रकृति , अपरा प्रकृति । 

जड़ शरीर ( पुं ० ) = स्थूल , सूक्ष्म , कारण और महाकारण ये चार शरीर । 

जड़ातीत ( वि ० ) = जड़ात्मक प्रकृति-मंडलों से रहित । 


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     प्रभु प्रेमियों ! संतमत की बातें बड़ी गंभीर हैं । सामान्य लोग इसके विचारों को पूरी तरह समझ नहीं पाते । इन पोस्टों  में संत , संतमत , संतमत की उपयोगिता , जड़ प्रकृति , चेतन प्रकृति , आदिनाद , सृष्टि - क्रम , सृष्टि के मंडल , जीव , ब्रह्म , ईश्वर , परमेश्वर , ईश्वर की भक्ति , परम मुक्ति , संतमत की साधना - पद्धतियों ( मानस जप , मानस ध्यान , दृष्टियोग तथा शब्द - साधना ) , साधना - पद्धतियों के अभ्यास से उत्पन्न अनुभूतियों , सद्गुरु की महत्ता , यम - नियम , साधकों के आहार-विहार, सत्संग,  चिदानंदमय, चिदानंदमय शरीर, चिन्ह, चिन्हित, चेतन, चेतन प्रकृति, चेतन-धार, चेतनवृत्ति, चेतनात्मक निर्गुण प्रकृति, चैतन्य, चैतन्य क्षेत्र, चैतन्य तत्व, चैतन्यातीत, चोरी, जंगाली, जग, जगद्गुरू, जगमगाना, जागाना, जड़, जड़ शरीर, जड़ातीत, आदि से संबंधित बातों पर चर्चा की गई हैं । 



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शब्दकोष-19 चिदानंदमय - जड़ातीत तक के शब्दों के शब्दार्थादि || संतमत+मोक्ष-दर्शन का शब्दकोष शब्दकोष-19  चिदानंदमय - जड़ातीत   तक के शब्दों के शब्दार्थादि  ||  संतमत+मोक्ष-दर्शन का शब्दकोष Reviewed by सत्संग ध्यान on 12/13/2021 Rating: 5

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