सत्संग, सदाचार और समाज: देश, समाज और परिवार को क्या लाभ? - महर्षि मेँहीँ परमहंस जी
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सद्गुरु महर्षि मेँहीँ परमहंस जी महाराज का ज्ञान केवल व्यक्तिगत साधना तक सीमित नहीं था, बल्कि उसमें देश, समाज और परिवार के कल्याण का विराट दर्शन भी समाहित था। तत्कालीन राजनीतिक विचारधाराओं (कांग्रेस, सोशलिस्ट, साम्यवादी) के प्रश्नों का उत्तर देते हुए, गुरु महाराज ने सत्संग और सदाचार के महत्व को अत्यंत स्पष्टता से समझाया:
"आज आप क्या देखते हैं? देश में अनेक ख्याल-विचार-धाराएँ हैं। एक कांग्रेस है, जिसका राज्य शासन है, दूसरा सोसलिस्ट-समाजवादी और तीसरा साम्यवादी है। ये तीनों हमसे पूछते हैं कि तुम क्या कहते हो? तुम शरीर और संसार से अपने को छुड़ाने के लिए कहते हो, इससे देश को क्या फायदा होगा? इस प्रश्न का उत्तर सुन लीजिए और इसमें अगर देश को कोई फायदा हो तो चुन लीजिए।"
गुरु महाराज आगे कहते हैं कि सत्संग के उपदेशों का सार सदाचार है। वे स्पष्ट करते हैं:
"जो सदाचारी होगा, वह शरीर और संसार को छोड़ेगा, वही आत्मज्ञान में ऊँचा होगा और माया के आवरणों को पार करेगा। अपने को ऊँचा चढ़ावेगा, ऊँचे-से-ऊँचा पद जिसे मुक्ति कहते हैं, प्राप्त करेगा। जिसमें सदाचार की कमी है, वह मुक्ति-लाभ नहीं कर सकेगा।"
यहीं पर सत्संग का सामाजिक महत्व उभर कर आता है। गुरु महाराज बताते हैं कि सदाचार केवल व्यक्ति की मुक्ति का मार्ग नहीं, बल्कि सुदृढ़ समाज की नींव भी है:
"सदाचार जिस समाज में होगा, उसकी सामाजिक नीति बहुत अच्छी होगी। जहाँ की सामाजिक नीति उत्तम होगी, वहाँ की राजनीति अनुत्तम हो, संभव नहीं। सब सदाचारी होंगे, तो समाज अच्छा होगा। अच्छे समाज जब राजनीति को बनाएँगे, तो वह कितनी अच्छी होगी!"
यह युक्ति, जो बाबा देवी साहब ने 1909 ई० में बतलाई थी और महर्षि मेँहीँ ने आगे बढ़ाई, आज भी उतनी ही सत्य है। जब व्यक्ति सत्संग और ध्यान से अपने अंदर सदाचार को विकसित करता है, तो वह एक बेहतर नागरिक बनता है। ऐसे सदाचारी व्यक्तियों से मिलकर एक उत्तम समाज का निर्माण होता है, और एक उत्तम समाज ही श्रेष्ठ राजनीति को जन्म दे सकता है। इस प्रकार, सत्संग केवल आत्मिक उत्थान नहीं, बल्कि देश, समाज और परिवार को भी परम लाभ पहुँचाता है।
जय गुरु महाराज 🙏
सत्संग से देश, समाज और परिवार को क्या लाभ? 🤔
"सब सदाचारी होंगे, तो समाज अच्छा होगा... अच्छे समाज जब राजनीति को बनाएँगे, तो वह कितनी अच्छी होगी!"
सद्गुरु महर्षि मेँहीँ परमहंस जी के इन क्रांतिकारी विचारों को पढ़िए।
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📚 महर्षि मेँहीँ साहित्य सुमनावली
MS18 . महर्षि मेँहीँ सत्संग-सुधा सागर भाग 1: 1. महर्षि मेँहीँ सत्संग-सुधा सागर भाग 1 एक ऐसा ग्रंथ है जो मानव जीवन के दु:खों से छुटकारा दिलाने के लिए धर्मग्रंथों, साधु-संतों के वचनों और निजी अनुभूतियों से भरा हुआ है। 2. इस ग्रंथ का मनोयोगपूर्वक पाठ करने से व्यक्ति को ब्रह्म ज्ञान की प्राप्ति होती है, जिससे उसे मनुष्य शरीर का मिलना सुनिश्चित होता है। 3. शास्त्रों के अनुसार, ब्रह्म को जानने से मोक्ष की प्राप्ति होती है, अन्यथा बड़ी हानि होती है। 4. प्रवचनों का पाठ करने से व्यक्ति को ब्रह्म संबंधी ठोस और प्रमाणिक जानकारी मिलती है, जिससे उपर्युक्त लाभ अनिवार्य होता है। 5. इस ग्रंथ का प्रथम प्रकाशन वर्ष 2004 में हुआ था और इसमें गुरु महाराज के 323 प्रवचनों का संकलन है, जो ईश्वर, जीव ब्रह्म, साधना आदि आध्यात्मिक विषयों का ज्ञान प्रदान करते हैं। ( और जाने )
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जय गुरु महाराज🙏🙏
Reviewed by सत्संग ध्यान
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5:05:00 pm
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