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S02: 4. सत्संग की महिमा: जब दारोगा भी बने सदाचार के समर्थक –सद्गुरु महर्षि मेँहीँ परमहंस जी महाराज

​सत्संग की महिमा: जब दारोगा भी बने सदाचार के समर्थक – महर्षि मेँहीँ परमहंस जी महाराज

सद्गुरु महर्षि मेँहीँ परमहंस जी सत्संग में प्रवचन करते हुए, और पुलिसकर्मी उनसे प्रभावित होते हुए।
महर्षि मेँहीँ: सत्संग का प्रशासन पर प्रभाव

4. संस्मरण: सत्संग की महिमा साधु प्रेम दास और प्रसाशन,

सद्गुरु महर्षि मेँहीँ परमहंस जी महाराज के जीवन के संस्मरण सत्संग की अद्वितीय शक्ति और उसके समाजव्यापी प्रभाव का प्रमाण हैं। एक ऐसे ही अद्भुत प्रसंग में, साधु प्रेम दास जी और ब्रिटिशकालीन प्रशासन के बीच हुई घटना सत्संग की महिमा को उजागर करती है:

"सुल्तानगंज से पश्चिम बरियारपुर रेलवे स्टेशन के पास पुरुषोत्तमपुर बिलिया एक ग्राम है। वहाँ प्रेम दास नाम के मेरे एक प्रेमी साधु रहते थे। वे मुझे अपनी कुटिया में बुलाकर सत्संग करवाए। अंग्रेजों का समय था। कांग्रेस का दमन हो रहा था। संयोग से दारोगा साहब उसी ओर आ पहुँचे। देखा कि सामियाना टंगा है। चौकीदार को कहा कि साधु को बुलाओ। प्रेम दास गए। दारोगाजी ने पूछा- ऐ साधु! क्या हो रहा है? प्रेम दास ने उत्तर दिया- मेरे गुरु – साधु महाराज आए हैं, सत्संग होगा। ईश्वर का नाम लेंगे, उन्हें याद करेंगे। दारोगा साहब दफादार को वहीं छोड़ गए। दफादार सत्संग सुनकर बोले ऐसा सत्संग हो तो चोरी-डकैती सब बंद हो जाय। हमलोगों को पहरा भी नहीं देना पड़े।"


​यह संस्मरण दर्शाता है कि सत्संग का प्रभाव कितना गहरा होता है। एक पुलिस अधिकारी, जिसे कानून-व्यवस्था बनाए रखने की चिंता थी, वह भी सत्संग की शक्ति को समझ गया। दफादार के मुख से निकले ये शब्द कि "ऐसा सत्संग हो तो चोरी-डकैती सब बंद हो जाय। हमलोगों को पहरा भी नहीं देना पड़े", सत्संग के सामाजिक रूपांतरणकारी प्रभाव का प्रत्यक्ष प्रमाण है।

​गुरु महाराज ने इस बात को आगे बढ़ाते हुए कहा:

"मैंने उनसे कहा आप तो समझे, अब दारोगा साहब को जाकर कहिए। सत्संग में पाँच पाप - झूठ, चोरी, नशा, हिंसा और व्यभिचार छोड़ने के लिए कहते हैं। अगर सब सदाचारी बन जाएँगे, तो वहाँ झगड़ा मिट जाएगा। मुकदमा वगैरह भी नहीं होगा। शासन अच्छा हो जाएगा। शासनकर्ता को बहुत सुविधा होगी। इसलिए आपलोगों से प्रार्थना है कि अपने देश को ऊँचा उठाने के लिए सदाचारी बनिए।"


​यह घटना केवल एक कहानी नहीं, बल्कि एक शाश्वत सत्य है। जब व्यक्ति सत्संग के माध्यम से अपने भीतर सदाचार का विकास करता है, तो समाज से अपराध, झगड़े और कुरीतियाँ स्वतः समाप्त होने लगती हैं। एक सदाचारी समाज ही एक सुशासित और शांतिपूर्ण राष्ट्र का निर्माण कर सकता है। गुरु महाराज का यह आह्वान कि "अपने देश को ऊँचा उठाने के लिए सदाचारी बनिए", आज भी हम सभी के लिए एक मार्गदर्शक सिद्धांत है।

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जय गुरु महाराज! यह प्रसंग गुरु महाराज की वाणी में सत्संग की शक्ति और उसके प्रत्यक्ष प्रभाव का जीवंत उदाहरण है। यह दर्शाता है कि सत्संग कैसे समाज में सकारात्मक परिवर्तन ला सकता है, जहाँ पुलिस प्रशासन भी प्रभावित होता है।

सत्संग की महिमा!

जब दारोगा भी बोले, "ऐसा सत्संग हो तो चोरी-डकैती सब बंद हो जाय!"

सद्गुरु महर्षि मेँहीँ परमहंस जी के इस अद्भुत संस्मरण को पढ़िए, जहाँ सत्संग ने पुलिस प्रशासन को भी प्रभावित किया।

पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें: [https://www.satsangdhyan.com/2026/02/satsang-ki-mahima-sadhu-prem-das-prashasan.html]

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🙏🍊🍐🍎🍏🍎 महर्षि मेँहीँ सत्संग सुधा सागर

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📚 महर्षि मेँहीँ साहित्य सुमनावली 

MS18 . महर्षि मेँहीँ सत्संग-सुधा सागर भाग 1 का मुख्य कवर पृष्ठ ।
          महर्षि मेँहीँ सत्संग-सुधा सागर
     MS18 . महर्षि मेँहीँ सत्संग-सुधा सागर भाग 1:  1. महर्षि मेँहीँ सत्संग-सुधा सागर भाग 1 एक ऐसा ग्रंथ है जो मानव जीवन के दु:खों से छुटकारा दिलाने के लिए धर्मग्रंथों, साधु-संतों के वचनों और निजी अनुभूतियों से भरा हुआ है।     2. इस ग्रंथ का मनोयोगपूर्वक पाठ करने से व्यक्ति को ब्रह्म ज्ञान की प्राप्ति होती है, जिससे उसे मनुष्य शरीर का मिलना सुनिश्चित होता है।     3. शास्त्रों के अनुसार, ब्रह्म को जानने से मोक्ष की प्राप्ति होती है, अन्यथा बड़ी हानि होती है।     4. प्रवचनों का पाठ करने से व्यक्ति को ब्रह्म संबंधी ठोस और प्रमाणिक जानकारी मिलती है, जिससे उपर्युक्त लाभ अनिवार्य होता है।     5. इस ग्रंथ का प्रथम प्रकाशन वर्ष 2004 में हुआ था और इसमें गुरु महाराज के 323 प्रवचनों का संकलन है, जो ईश्वर, जीव ब्रह्म, साधना आदि आध्यात्मिक विषयों का ज्ञान प्रदान करते हैं। ( और जाने )   

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