MS18 महर्षि मेँहीँ सत्संग सुधा-सागर
प्रभु प्रेमियों ! ' संतों के हृदय में पायी जाती हैं - ' लोककल्याण की कामना । ' इसीलिए संत का लक्षण बतलाते हुए गोस्वामी तुलसीदासजी को कहना पड़ा- ' विश्व उपकारहित व्यग्रचित सर्वदा ' और ' पर उपकार वचन मन काया ' । संतों की सिद्धावस्था के बाद का जीवन ' सत्य धर्म की संस्थापना के द्वारा लोककल्याण ' के लिए पूर्णत : समर्पित हो जाता है । इसी सार्वभौमिक सिद्धान्त के साकार रूप थे- सद्गुरु महर्षि में ही परमहंस जी महाराज | अध्यात्म विज्ञान पर गंभीर प्रयोग कर उन्होंने ईश्वर प्राप्ति का जो शुद्ध , सत्य , संक्षिप्त और निरापद मार्ग उद्घाटित किया , उसे जन - जन तक पहुँचाने के लिए उन्होंने गंभीर कष्ट सहा । जाड़ा , गर्मी और बरसात का विकट मौसम , देहात की ऊँची - नीची कच्ची सड़कें , बैलगाड़ी की सवारी , कभी पैदल यात्रा , रहने को टूटी - फूटी झोपड़ी , पीने को नदी का जल तथा खाने को रूखा - सूखा भोजन ; फिर भी चेहरे पर गहरा संतोष और बाल सुलभ आनन्द , यह थी सद्गुरु महर्षि मेंहीं परमहंस जी महाराज की परोपकार रत भावना का प्रत्यक्ष प्रमाण।
संत साकार ब्रह्म होने के कारण उनकी वाणी को ब्रह्मवाणी कहना अयुक्त नहीं है । महर्षि में ही सत्संग - सुधा - सागर उन्हीं ब्रह्मवाणी का संकलन है । वह ब्रह्मवाणी क्या है ? अमरता प्रदान करनेवाला अमृत ही है , जो महर्षि में हीँ परमहंसजी महाराज के श्रीमुख से प्रवचन के क्रम में निःसृत हुआ करता था । जो व्यक्ति इस ज्ञानामृत का प्रसाद ग्रहण करेंगे , वे अंधकार से प्रकाश में , असत् से सत् में और मृत्यु से अमृत में प्रतिष्ठित होकर सर्वसुख-शांति के भागी होंगे ।
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| ...सुधा सागर भाग- 2 |
MS19 . महर्षि मेँहीँ सत्संग-सुधा सागर भाग 2- महर्षि मेँहीँ सत्संग - सुधा सागर भाग-2 में महर्षि मेँहीँ सत्संग - सुधा सागर भाग- 1 के प्रकाशन के बाद जो प्रवचन और उपलब्ध थे, उसका ही संकलन किया गया है। यह पुस्तक केवल पीडीएफ रूप में उपलब्ध है। इसका एक बार भी प्रशासन अभी तक ( 2025 ई. तक ) नहीं हुआ है। महर्षि मेँहीँ सत्संग सुधा सागर" में गुरु महाराज के सभी प्रवचनों का संग्रह है। जो प्रवचन पूज्यपाद संतसेवी जी महाराज द्वारा एवं अन्य महापुरुषों के द्वारा लिखा गया है। उन सभी प्रवचनों को संग्रहित करके दो भागों में प्रकाशित किया गया है। ( और जाने )
Reviewed by सत्संग ध्यान
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9:18:00 am
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