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​S02: 5. सत्संग में धर्मग्रंथों का पाठ: सभी संतों का एक ही मत – सद्गुरु महर्षि मेँहीँ परमहंस जी महाराज

​सत्संग में धर्मग्रंथों का पाठ: सभी संतों का एक ही मत – सद्गुरु महर्षि मेँहीँ परमहंस जी महाराज

प्रभु प्रेमियों ! गुरु महाराज के ये वचन धर्मग्रंथों और संत वाणियों के समन्वय तथा सांप्रदायिक सद्भाव का अद्भुत संदेश देते हैं। यह बताते हैं कि सभी महापुरुषों का लक्ष्य एक ही है, भले ही उनके मार्ग भिन्न दिखें।

सद्गुरु महर्षि मेँहीँ परमहंस जी सत्संग में विभिन्न धर्मग्रंथों और संत वाणियों की एकता का महत्व समझाते हुए।
महर्षि मेँहीँ: सभी संतों का एक ही मत

सत्संग में क्यों धर्मग्रंथों का पाठ करते हैं ? 

सद्गुरु महर्षि मेँहीँ परमहंस जी महाराज ने अपने सत्संगों में हमेशा सभी धर्मों और संत वाणियों के मूल सार को उजागर किया है। वेदों, उपनिषदों और संत कवियों की वाणियों का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि सभी महापुरुषों का अंतिम लक्ष्य एक ही है। इस विषय पर उनका प्रवचन अत्यंत महत्वपूर्ण है:

"अभी वेद-मंत्र - केन और कठ उपनिषदों के श्लोकों का पाठ हुआ। संत कबीर तथा गुरु नानक आदि संतों के वचनों का पाठ भी आपलोगों ने सुना। वेदमंत्र पढ़ना नहीं जाने तो संतों की वाणी को पढ़कर जान सकेंगे।"

सभी संतों का एक ही मत: 

​गुरु महाराज हमें इन सभी ग्रंथों और वाणियों को पढ़कर विचारने का आग्रह करते हैं:

"इन सबको पढ़कर विचारिए कि सबका मत एक है अथवा नहीं? अगर है तो जिस पदार्थ को प्राप्त करने कहते हैं, वह एक ही है या नहीं? काम का है या नहीं? काम का पदार्थ होगा तो लेना चाहिए, नहीं तो नहीं। अगर सबका मत नहीं मिलता है तो जो उसमें श्रेष्ठ जाना जाता है, उसे ही मानेंगे। अगर सबका एक ही मत हो तो साम्प्रदायिक भाव मिट जाए।"

साम्प्रदायिक भाव कैसे मिटेगा ? 

​यह गुरु महाराज की दूरदर्शिता थी कि उन्होंने न केवल सभी धर्मग्रंथों के पाठ का महत्व समझाया, बल्कि उनके मूल संदेश की एकता पर भी जोर दिया। वे कहते हैं कि भले ही ऊपर से सभी मत अलग-अलग दिखें, लेकिन उनका सार एक है:

"यह जो अलग-अलग मत का नाम सुनते हैं, इससे मालूम होगा कि इन सबका अलग-अलग मत है। लेकिन जैसे कोई गोरे, कोई काले हैं, किंतु मनुष्य ही हैं; वैसे ही सब संतों का मत है। सब एक ही मत के लोग हैं। तो फिर साम्प्रदायिक भाव के कारण जो लड़ाई होती है, मिट जाएगी।"


​गुरु महाराज का यह संदेश आज के समय में और भी अधिक प्रासंगिक है। जब हम विभिन्न धर्मों और संतों के वचनों का अध्ययन करते हैं, तो हमें पता चलता है कि सभी ने एक ही परम सत्य की ओर संकेत किया है। सत्संग हमें इस एकता को समझने और सांप्रदायिक भेदों से ऊपर उठकर प्रेम, सद्भाव तथा शांति स्थापित करने की प्रेरणा देता है। यही सच्ची आध्यात्मिक समझ है, जो विश्व में भाईचारा ला सकती है।

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प्रभु प्रेमियों ! गुरु महाराज के ये वचन धर्मग्रंथों और संत वाणियों के समन्वय तथा सांप्रदायिक सद्भाव का अद्भुत संदेश देते हैं। यह बताते हैं कि सभी महापुरुषों का लक्ष्य एक ही है, भले ही उनके मार्ग भिन्न दिखें।

क्या सभी धर्मों का मत एक है? 🤔

"जैसे कोई गोरे, कोई काले हैं, किंतु मनुष्य ही हैं; वैसे ही सब संतों का मत है।"

सद्गुरु महर्षि मेँहीँ परमहंस जी के इन वचनों से जानें सभी धर्मग्रंथों और संतों की वाणियों की एकता का रहस्य।

पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें: [https://www.satsangdhyan.com/2026/02/satsang-dharma-granth-ek-mat-sabhi-sant.html]

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🙏🍊🍐🍎🍏🍎 महर्षि मेँहीँ सत्संग सुधा सागर

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📚 महर्षि मेँहीँ साहित्य सुमनावली 

MS18 . महर्षि मेँहीँ सत्संग-सुधा सागर भाग 1 का मुख्य कवर पृष्ठ ।
          महर्षि मेँहीँ सत्संग-सुधा सागर
     MS18 . महर्षि मेँहीँ सत्संग-सुधा सागर भाग 1:  1. महर्षि मेँहीँ सत्संग-सुधा सागर भाग 1 एक ऐसा ग्रंथ है जो मानव जीवन के दु:खों से छुटकारा दिलाने के लिए धर्मग्रंथों, साधु-संतों के वचनों और निजी अनुभूतियों से भरा हुआ है।     2. इस ग्रंथ का मनोयोगपूर्वक पाठ करने से व्यक्ति को ब्रह्म ज्ञान की प्राप्ति होती है, जिससे उसे मनुष्य शरीर का मिलना सुनिश्चित होता है।     3. शास्त्रों के अनुसार, ब्रह्म को जानने से मोक्ष की प्राप्ति होती है, अन्यथा बड़ी हानि होती है।     4. प्रवचनों का पाठ करने से व्यक्ति को ब्रह्म संबंधी ठोस और प्रमाणिक जानकारी मिलती है, जिससे उपर्युक्त लाभ अनिवार्य होता है।     5. इस ग्रंथ का प्रथम प्रकाशन वर्ष 2004 में हुआ था और इसमें गुरु महाराज के 323 प्रवचनों का संकलन है, जो ईश्वर, जीव ब्रह्म, साधना आदि आध्यात्मिक विषयों का ज्ञान प्रदान करते हैं। ( और जाने )   

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जय गुरु महाराज🙏🙏

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