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शब्दकोष-50 सारतत्व - सुरतशब्दयोग तक के शब्दों के शब्दार्थादि || संतमत+मोक्ष-दर्शन का शब्दकोष

संतमत+मोक्ष-दर्शन का शब्दकोष / स

     प्रभु प्रेमियों ! ' संतमत+ मोक्ष - दर्शन का शब्दकोश ' नाम्नी प्रस्तुत लेख में ' मोक्ष - दर्शन ' + 'महर्षि मेंहीं पदावली शब्दार्थ भावार्थ और टिप्पणी सहित' + 'गीता-सार' + 'संतवाणी सटीक' आदि धर्म ग्रंथों में गद्यात्मक एवं पद्यात्मक वचनों में आये शब्दों के अर्थ लिखे गये हैं . कोष्ठकों में शब्दों के व्याकरणिक परिचय भी देने का प्रयास किया गया है और शब्दों से संबंधित कुछ सूक्तियों का संकलन किया गया है. जो पूज्यपाद लालदास जी महाराज द्वारा लिखित व संग्रहित  है । धर्मप्रेमियों के लिए यह कोष बड़ी ही उपादेय है । आईए इस कोष के बनाने वाले महापुरुष का दर्शन करें.

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सद्गुरु महर्षि में और बाबा लाल दास जी
लालदास जी और गुरु बाबाबाबा


सारतत्व - सुरतशब्दयोग    शब्द  तक के शब्द और उसके अर्थ


सारतत्व - सुरतशब्दयोग

 

सारतत्त्व ( सं ० , पुं ० ) = सारभूत तत्त्व , वह तत्त्व जो किसी पदार्थ की स्थिति का कारण हो । 

सारधार ( स्त्री ० = सारशब्द की धारा , निर्मल चेतन शब्द ।

सारशब्द ( सं ० , ) = वह शब्द जो सृष्टि का सारतत्त्व है , वह शब्द जिससे सृष्टि हुई है और जिसके निकल जाने पर सृष्टि नष्ट हो जाती हैं , आदिनाद । 

साराधार ( सं ० , पूँ ० ) = सारतत्त्व और आधार , जो किसी पदार्थ का सारतत्त्व और उसके अस्तित्व का कारण हो । 

साहब ( अ ० , पुं ० ) = मालिक स्वामी , परमात्मा । 

सिंगी ( पुं ० ) = सींग का बनाया हुआ एक बाजा जो फूँककर बजाया जाता है । 

सितार ( फा ० , पुं ० ) = एक प्रसिद्ध बाजा जो उसके तारों को उँगली से झनकारने पर बजता है । 

सिद्क ( अ ० , पुं ० ) = सच्चाई , सत्यता ।  

सिद्ध ( सं ० , वि ० ) = सिद्धि प्राप्त किया हुआ , पका हुआ , प्रमाणित , सत्य ठहराया हुआ । 

सिफ़त ( अ ० , स्त्री ० ) = गुण , विशेषता , लक्षण । 

सिफ़ात ( अ ० ) =  ' सिफ़ात ' का बहुवचन , गुण - समूह ।

सिफ़ाती ( अ ० , वि ० ) = गुण संबंधी , विशेषता - संबंधी ।

सिफ़ाती नाम ( अ ० सं ० , पुं ० ) = गुण बतानेवाला नाम । ( परमात्मा के वर्णात्मक नाम उसके सिफ़ाती नाम हैं ; जैसे सर्वेश्वर , परब्रह्म परमेश्वर आदि । ) 

सिमटाव ( हिं ० , पुं ० ) = सिमटने का भाव , एकाग्र होने का भाव , सिकुड़ने या संकुचित होने का भाव , फैली हुई वृत्तियों के एक जगह जमा होने का भाव । 

सीमा ( सं ० , स्त्री ० ) = घेरा , परिधि , हृद ।  

सील = शील , सत्य और नम्र व्यवहार ।  (श्रीचंद वाणी

सुगम ( सं ० , वि ० ) = आसान , सरल , जहाँ जाना आसान हो ।

सुजान = सुंदर ज्ञानवाले , संत ।  (श्रीचंद वाणी

सुनाम ( सं ० , पुं ० ) = सुन्दर नाम । 

सुन्न ( हिं ० , पुं ० ) = शून्य , आन्तरिक । 

सुपैद = उजला , ब्राह्मण ।  (श्रीचंद वाणी

सुर ( सं ० , पुं ० ) = देवता । ब्रह्माण्ड का एक दर्जा । 

सुरखाई = सुर्ख , लाल , क्षत्रिय । (श्रीचंद वाणी

सुरत ( हिं ० , स्त्री ० ) = चेतन - आत्मा , चेतन वृत्ति , चेतन तत्त्व जिसके आधार पर शरीर जीवित रहता है और शरीर से जिसके निकल जाने पर शरीर मृतक हो जाता है । 

सुरतशब्दयोग ( पुं ० ) = ऐसी यौगिक क्रिया जिसमें शरीर के अन्दर होनेवाली अनहद ध्वनियों के बीच सारशब्द में सुरत को जोड़ने का अभ्यास किया जाता है , नादानुसंधान । 


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     प्रभु प्रेमियों ! संतमत की बातें बड़ी गंभीर हैं । सामान्य लोग इसके विचारों को पूरी तरह समझ नहीं पाते । इन पोस्टों  में संत , संतमत , संतमत की उपयोगिता , जड़ प्रकृति , चेतन प्रकृति , आदिनाद , सृष्टि - क्रम , सृष्टि के मंडल , जीव , ब्रह्म , ईश्वर , परमेश्वर , ईश्वर की भक्ति , परम मुक्ति , संतमत की साधना - पद्धतियों ( मानस जप , मानस ध्यान , दृष्टियोग तथा शब्द - साधना ) , साधना - पद्धतियों के अभ्यास से उत्पन्न अनुभूतियों , सद्गुरु की महत्ता , यम - नियम , साधकों के आहार-विहार, सत्संग,   सारतत्त्व, सारधार, सारशब्द, साराधार, साहब, सिंगी, सितार, सिद्क, सिद्ध, सिफत, सिफात, सिफती, सिखाते नाम, सिमटाव, सीमा, सुगम, सुनाम, सुन्न, सूर, सुरत, सुरतशब्दयोग,  आदि से संबंधित बातों पर चर्चा की गई हैं । 



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शब्दकोष-50 सारतत्व - सुरतशब्दयोग तक के शब्दों के शब्दार्थादि || संतमत+मोक्ष-दर्शन का शब्दकोष शब्दकोष-50  सारतत्व - सुरतशब्दयोग  तक के शब्दों के शब्दार्थादि  ||  संतमत+मोक्ष-दर्शन का शब्दकोष Reviewed by सत्संग ध्यान on 12/15/2021 Rating: 5

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