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शब्दकोष-51 सुरीला - सूर्ख तक के शब्दों के शब्दार्थादि || संतमत+मोक्ष-दर्शन का शब्दकोष

संतमत+मोक्ष-दर्शन का शब्दकोष / स

     प्रभु प्रेमियों ! ' संतमत+ मोक्ष - दर्शन का शब्दकोश ' नाम्नी प्रस्तुत लेख में ' मोक्ष - दर्शन ' + 'महर्षि मेंहीं पदावली शब्दार्थ भावार्थ और टिप्पणी सहित' + 'गीता-सार' + 'संतवाणी सटीक' आदि धर्म ग्रंथों में गद्यात्मक एवं पद्यात्मक वचनों में आये शब्दों के अर्थ लिखे गये हैं . कोष्ठकों में शब्दों के व्याकरणिक परिचय भी देने का प्रयास किया गया है और शब्दों से संबंधित कुछ सूक्तियों का संकलन किया गया है. जो पूज्यपाद लालदास जी महाराज द्वारा लिखित व संग्रहित  है । धर्मप्रेमियों के लिए यह कोष बड़ी ही उपादेय है । आईए इस कोष के बनाने वाले महापुरुष का दर्शन करें.

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सद्गुरु महर्षि में और बाबा लाल दास जी
लालदास जी और गुरु बाबाबाबा


सुरीला - सूर्ख    शब्द  तक के शब्द और उसके अर्थ


सुरीला - सूर्ख

 

सुरीला ( हिं ० वि ० ) = मीठे स्वरवाला । 

सुरीलापन ( हिं ० , पुं ० ) = सुरीला होने का भाव , मिठास , मीठापन ।

सुलभ ( सं ० , वि ० ) = जो सरलता से पाया जा सके ।  

सुषुप्त ( सं ० , वि ० ) = अच्छी तरह सोया हुआ । 

सुषुप्ति ( सं ० , स्त्री ० ) = अच्छी तरह या गहरी नींद में सोया हुआ होने का भाव । 

सुषुप्ति अवस्था ( सं ० , स्त्री ० ) = जाग्रत् और स्वप्न से भिन्न वह अवस्था जिसमें केवल चित्त इन्द्रिय रहती है और जिसमें कोई भाव - विचार उत्पन्न नहीं होता , गहरी नींद की अवस्था । 

सुहानी ( वि ० स्त्री ० ) = सुहावनी , अच्छी लगनेवाली । 

सूक्ष्म ( सं ० , वि ० ) = छोटा , महीन , योगदृष्टि से दिखलायी पड़नेवाला । जो स्थूल इन्द्रिय ( ज्ञानेन्द्रिय ) की पकड़ में नहीं आए । 

सूक्ष्म कारण महाकारण अरूप उपासना ( सं ० , स्त्री ० ) = अनहद नादों का ध्यान । 

सूक्ष्म दृष्टि ( सं ० , स्त्री ० ) = स्थूल दृष्टि से भिन्न वह दृष्टि जो एकविन्दुता प्राप्त करने पर खुलती है , योगदृष्टि , दिव्य दृष्टि , जिस दृष्टि के खुल जाने पर स्थूल संसार और सूक्ष्म संसार की सभी वस्तुएँ दिखलायी पड़ने लग जाती हैं , चाहे वे दूर हों या नजदीक।

सूक्ष्म धार ( स्त्री ० ) = महीन धारा , महीन शब्द - धारा ; जो कान से नहीं सुरत से सुनने में आए । 

सूक्ष्म ध्यानाभ्यास ( सं ० , पुं ० ) = ज्योतिर्मय विन्दु और अनहद नादों के ध्यान का अभ्यास । 

सूक्ष्म नाद ( सं ० , पुं ० ) = महीन ध्वनि , सूक्ष्म मंडल की ध्वनि , सुरत से सुनायी पड़नेवाली ध्वनि । 

सूक्ष्म मंडल ( सं ० , पुं ० ) = स्थूल मंडल से ऊपर का एक मंडल जिसमें अलौकिक प्रकाश की अवस्थिति है , जो स्थूल मंडल का कारणरूप है । 

सूक्ष्म सगुण अरूप ( सं ० , वि ० ) = जो सूक्ष्म , त्रय गुणों से बना हुआ और रूप - रहित हो ( पुं ० ) = अनहद नाद ।  

सूक्ष्म सगुण रूप ( सं ० , पुं ० ) = वह रूप जो सूक्ष्म और त्रय गुणों से बना हुआ हो , ज्योतिर्मय विन्दु । सूक्ष्म सूक्ष्मता ( सं ० , स्त्री ० ) होने का भाव ; छोटा , महीन या पतला होने का भाव , सूक्ष्म मंडल । 

सूक्ष्मातिसूक्ष्म ( सं ० , वि ० ) = महीन - से - महीन , छोटे - से - छोटा । 

सूर्ख ( फा ० , वि ० ) = लाल । ( पुं ० ) = गहरा लाल रंग ।



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     प्रभु प्रेमियों ! संतमत की बातें बड़ी गंभीर हैं । सामान्य लोग इसके विचारों को पूरी तरह समझ नहीं पाते । इन पोस्टों  में संत , संतमत , संतमत की उपयोगिता , जड़ प्रकृति , चेतन प्रकृति , आदिनाद , सृष्टि - क्रम , सृष्टि के मंडल , जीव , ब्रह्म , ईश्वर , परमेश्वर , ईश्वर की भक्ति , परम मुक्ति , संतमत की साधना - पद्धतियों ( मानस जप , मानस ध्यान , दृष्टियोग तथा शब्द - साधना ) , साधना - पद्धतियों के अभ्यास से उत्पन्न अनुभूतियों , सद्गुरु की महत्ता , यम - नियम , साधकों के आहार-विहार, सत्संग,   सुरीला, सुरीलापन, सुलभ, सुषुप्त, सुषुप्ति, सुषुप्ति-अवस्था, सुहानी, सुक्ष्म, सुक्ष्म कारण महाकारण आरूप उपासना, सूक्ष्म दृष्टि, सूक्ष्म धार, सूक्ष्म ध्यानाभ्यास, सूक्ष्म नाद, सूक्ष्म मंडल, सूक्ष्म सगुण अरूप, सूक्ष्म सगुण रूप, सूक्ष्मता, सूक्ष्मता, सूक्ष्मातिसूक्ष्म, सूर्ख,  आदि से संबंधित बातों पर चर्चा की गई हैं । 



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शब्दकोष-51 सुरीला - सूर्ख तक के शब्दों के शब्दार्थादि || संतमत+मोक्ष-दर्शन का शब्दकोष शब्दकोष-51  सुरीला - सूर्ख  तक के शब्दों के शब्दार्थादि  ||  संतमत+मोक्ष-दर्शन का शब्दकोष Reviewed by सत्संग ध्यान on 12/15/2021 Rating: 5

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