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S02, उपनिषदों में बिंदु ध्यान की महिमा।। यज्ञ-हवन, जप-तप सबसे श्रेष्ठतम फलदायक सुषुम्ना ध्यान

  सत्संग योग भाग एक / S02   

      प्रभु प्रेमियों ! भारतीय साहित्य में वेद, उपनिषद, उत्तर गीता, श्रीमद्भगवद्गीता, आदि सदग्रंथों का बड़ा महत्व है। इन्हीं सदग्रंथों  में से ध्यान योग से संबंधित कुछ श्लोकों को संग्रहित करके सद्गुरु महर्षि मेंहीं परमहंस जी महाराज ने 'सत्संग योग' नामक पुस्तक के पहले भाग में रखा है। जिसका टीका और व्याख्या भी किया गया है । उन्हीं श्लोकों में से कुछ श्लोकों का पाठ  और चिंतन हम लोग करेंगे । जिनमें योग शिखोपनिषद अध्याय 6 के कुछ मंत्रों का पाठ हमलोग ने निम्न वीडियो में देखें । इसका संक्षिप्त नाम S02, है।

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गुरु महाराज


विंदु-ध्यान की महिमा


     विंदु-ध्यान का थोड़ा अभ्यास के फल का 16 वें भाग के बराबर भी नहीं  है- हजारों अश्वमेध, बाजपेय यज्ञ।सुषुम्ना-ध्यान (विन्दु ध्यान) हजारों अश्वमेध यज्ञ से श्रेष्ठतम ही नहीं बल्कि हजारों अश्वमेध यज्ञ, हजारों बाजपेय यज्ञ का पुण्य फल है, उसको तराज़ू के एक पलड़े पर रखे और सुषुम्ना-ध्यान (विन्दु ध्यान) कैसे किया जाता है, इसका केवल चिंतन किया जाए। तो इस चिंतन का  जो फल होगा, उसको सोलह भाग करके उसका एक भाग को लेकर तराजू के दूसरे पलड़े पर रखा जाय तो आप पायेंगे कि सुषुम्ना-ध्यान (विन्दु ध्यान) का चिंतन वाला भाग ही भारी है। अर्थात् जो दीक्षा लेकर थोड़ा भी अभ्यास करते हैं तो वह  हजारों अश्वमेध यज्ञ, हजारों बाजपेय यज्ञ का पुण्य फल से भी ज्यादा अच्छा पुण्य प्राप्त करता हैं।



विंदू ध्यान महिमा श्लोक।। Vindu-meditation-of-glory-1
बिंदु ध्यान महिमा श्लोक

यज्ञ-हवन, पूजा-पाठ और ध्यान योग

      हमलोग बराबर देखते हैं कि बहुत तरह के पूजा-पाठ, यग्य-याग्य, होम-हवन होते रहता है । इन सबका अपना-अपना महत्व है । लेकिन सद्गुरु महर्षि मेंहीं परमहंस जी महाराज हम लोगों को जो ध्यान योग बतलाए हैं । वह सभी ग्रंथों , सभी संतों को मान्य है । इतना ही नहीं, यह विंदु-ध्यान करना और सभी तरह के पूजा-पाठ, जप-तप, होम-हवन इत्यादि से सर्वश्रेष्ठ है। इसका थोड़ा अभ्यास भी महान फलदायक है। उपनिषद के इन मंत्रों से भी यह बात सिद्ध होता है।

बिंदु ध्यान की महिमा श्लोक 1।।Vindu-meditation-of-glory
बिंदु ध्यान की महिमा श्लोक 1

     प्रभु प्रेमियों ! गुरु महाराज के भारती पुस्तक "सत्संग योग" के इस लेख का पाठ करके आपलोगों ने जाना कि  विंदु-ध्यान का थोड़ा अभ्यास के फल का 16 वें भाग के बराबर भी नहीं  है- हजारों अश्वमेध, बाजपेय यज्ञ । इतनी जानकारी के बाद भी अगर आपके मन में किसी प्रकार का शंका या कोई प्रश्न है, तो हमें कमेंट करें। इस लेख के बारे में अपने इष्ट मित्रों को भी बता दें, जिससे वे भी इससे लाभ उठा सकें। सत्संग ध्यान ब्लॉग का सदस्य बने। इससे आपको आने वाले  पोस्ट की सूचना नि:शुल्क मिलती रहेगी।


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S02, उपनिषदों में बिंदु ध्यान की महिमा।। यज्ञ-हवन, जप-तप सबसे श्रेष्ठतम फलदायक सुषुम्ना ध्यान S02, उपनिषदों में बिंदु ध्यान की महिमा।। यज्ञ-हवन, जप-तप सबसे श्रेष्ठतम फलदायक सुषुम्ना ध्यान Reviewed by सत्संग ध्यान on सितंबर 11, 2018 Rating: 5

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