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वेदों में सत्संग ध्यान की चर्चा -सद्गुरु महर्षि मेंही

 सत्संग योग, प्रथम भाग

    प्रभु प्रेमियों ! सद्गुरु महर्षि मेंहीं परमहंस जी महाराज के सबसे चर्चित एवं लोकप्रिय पुस्तक सत्संग योग पहला पेज से यहां वर्णन किया जा रहा है। इसमें सत्संग ध्यान के बारे में क्या चर्चा किया गया है। तो आइए गुरु महाराज के दर्शन के साथ इसका पाठ करें-

ध्यानस्थ गुरुदेव
ध्यानस्थ गुरुदेव

वेदों में सत्संग ध्यान की चर्चा

     निम्नांकित चित्र का पाठ करके आप समझ जाएंगे, कि वेदों में सत्संग-ध्यान की चर्चा किस रूप में हुई है।

सत्संग योग चित्र 1
सत्संग योग चित्र 1

विशेष अर्थ-

     एक शब्द है- लंबोदर। जिसका अर्थ होता है- लंबा हो उदर जिसका। लेकिन लंबोदर शब्द का विशेष अर्थ है गणेश जी । जहां कहीं भी लंबोदर लिखा रहता है तो उसके लिए भगवान गणेश जी ही अर्थ लिया जाता है।


सत्संग योग चित्र दो
सत्संग योग चित्र दो

धर्म गुरुओं की बातें-

     इसी तरह है योग शास्त्र में धर्मगुरुओं के द्वारा योग शास्त्र में वर्णित विशेष प्रसंग में विशेष अर्थ का विधान है। जो शिष्य परंपरा से ही जाना, समझा जा सकता है।


सत्संग योग चित्र 3
सत्संग योग चित्र 3

रहस्य की बातें-

     इन (चित्रों में वर्णित) वेद वाक्यों में जो रहस्य की बातें हैं, उसको साधारण भाषा में सद्गुरु महर्षि मेंहीं परमहंस जी महाराज ने बदलाने की कृपा की है।

सत्संग योग चित्र 4
सत्संग योग चित्र 4

     प्रभु प्रेमियों ! आप लोगों ने वेदों के माध्यम से जाना कि वेदों में सत्संग और ध्यान के बारे में क्या कहा गया है । इतनी जानकारी के बाद भी अगर आपके मन में किसी प्रकार का कोई प्रश्न है। तो आप हमें कमेंट करें । हम गुरु महाराज के शब्दों में ही उत्तर देने का प्रयास करेंगे आप इस ब्लॉक का सदस्य भी बने। जिससे आने वाले पोस्टों की सूचना आपको नि:शुल्क सबसे पहले मिले।


वेदों में सत्संग ध्यान की चर्चा -सद्गुरु महर्षि मेंही वेदों में सत्संग ध्यान की चर्चा   -सद्गुरु महर्षि मेंही Reviewed by सत्संग ध्यान on फ़रवरी 17, 2018 Rating: 5

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