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S465, मोक्ष क्या है? मोक्ष प्राप्ति का सरल और अनुभूत मार्ग -सद्गुरु महर्षि मेंही

प्रभु प्रेमियों ! सत्संग ध्यान के इस प्रवचन सीरीज में आपका स्वागत है। आइए आज जानते हैं- संतमत सत्संग के महान प्रचारक सद्गुरु महर्षि मेंहीं...
- 9:47:00 am
S465, मोक्ष क्या है? मोक्ष प्राप्ति का सरल और अनुभूत मार्ग -सद्गुरु महर्षि मेंही S465, मोक्ष क्या है? मोक्ष प्राप्ति का सरल और अनुभूत मार्ग  -सद्गुरु महर्षि मेंही Reviewed by सत्संग ध्यान on 9:47:00 am Rating: 5

G06 (च) ध्यान में प्रत्याहार क्या है? मन कैसे बस में होता है ।। Bhagavad Gita- 6th Chapter

श्रीगीता-योग-प्रकाश 06/ (च)     प्रभु प्रेमियों ! वराह पुराण में श्रीमद्भागवतगीता की महिमा गाते में लिखा गया है-   " यः श्रृणोति च गीत...
- 11:44:00 pm
G06 (च) ध्यान में प्रत्याहार क्या है? मन कैसे बस में होता है ।। Bhagavad Gita- 6th Chapter G06 (च) ध्यान में प्रत्याहार क्या है?  मन कैसे बस में होता है ।। Bhagavad Gita- 6th Chapter Reviewed by सत्संग ध्यान on 11:44:00 pm Rating: 5

G06 (ड•) ईश्वर-भक्ति की पूर्णता वाली असली समाधि क्या है ।। Bhagavad Gita- 6th Chapter

श्रीगीता-योग-प्रकाश  / 06 (ड•) प्रभु प्रेमियों !  वराह पुराण में श्रीमद्भागवतगीता की महिमा गाते में लिखा गया है-- " मलनिर्मोचनं पुंसा...
- 7:05:00 pm
G06 (ड•) ईश्वर-भक्ति की पूर्णता वाली असली समाधि क्या है ।। Bhagavad Gita- 6th Chapter G06 (ड•)  ईश्वर-भक्ति की पूर्णता वाली असली समाधि क्या है ।।  Bhagavad Gita- 6th Chapter Reviewed by सत्संग ध्यान on 7:05:00 pm Rating: 5

G06 (घ) विंदु ध्यान या नासाग्र में कैसे देखते है, इसे अच्छी तरह समझें ।। Bhagavad Gita- 6th Chapter

श्रीगीता-योग-प्रकाश / 6 (घ) प्रभु प्रेमियों ! धर्म शास्त्रों में लिखा है- " भारतामृतसर्वस्वं विष्णोर्वक्त्राद्विनि:सृतम्‌ । गीतागड्रोद...
- 12:02:00 pm
G06 (घ) विंदु ध्यान या नासाग्र में कैसे देखते है, इसे अच्छी तरह समझें ।। Bhagavad Gita- 6th Chapter G06 (घ) विंदु ध्यान या नासाग्र में कैसे देखते है, इसे अच्छी तरह समझें ।। Bhagavad Gita- 6th Chapter Reviewed by सत्संग ध्यान on 12:02:00 pm Rating: 5

S250, (ग) संसार के सभी आनंदों से श्रेष्ठ है, ध्यान का आनंद -महर्षि मेंहीं

प्रभु प्रेमियों ! सत्संग ध्यान के इस प्रवचन सीरीज में आपका स्वागत है। आइए आज जानते हैं-संतमत सत्संग के महान प्रचारक सद्गुरु महर्षि मेंहीं ...
- 7:23:00 pm
S250, (ग) संसार के सभी आनंदों से श्रेष्ठ है, ध्यान का आनंद -महर्षि मेंहीं S250, (ग) संसार के सभी आनंदों से श्रेष्ठ है, ध्यान का आनंद -महर्षि मेंहीं Reviewed by सत्संग ध्यान on 7:23:00 pm Rating: 5

S250, (ख) मैं ईश्वर भक्ति कराकर,देश की जड़ को मजबूत करता हूं । -महर्षि मेंहीं

प्रभु प्रेमियों ! सत्संग ध्यान के इस प्रवचन सीरीज में आपका स्वागत है। आइए आज जानते हैं-संतमत सत्संग के महान प्रचारक सद्गुरु महर्षि मेंहीं ...
- 5:50:00 pm
S250, (ख) मैं ईश्वर भक्ति कराकर,देश की जड़ को मजबूत करता हूं । -महर्षि मेंहीं S250, (ख) मैं ईश्वर भक्ति कराकर,देश की जड़ को मजबूत करता हूं । -महर्षि मेंहीं Reviewed by सत्संग ध्यान on 5:50:00 pm Rating: 5

G06 (ख) ध्यान योग का सही स्वरूप और नासाग्र ध्यान का महत्व ।। Bhagavad Gita- 6th Chapter

श्रीगीता-योग-प्रकाश / 6 (ख) प्रभु प्रेमियों ! श्रीमद्भागवत गीता की महिमा के बारे में धर्मशास्त्रों में लिखा है- "गीताशास्त्रमिदं _ पु...
- 4:34:00 pm
G06 (ख) ध्यान योग का सही स्वरूप और नासाग्र ध्यान का महत्व ।। Bhagavad Gita- 6th Chapter G06 (ख) ध्यान योग का सही स्वरूप और नासाग्र ध्यान का महत्व ।।  Bhagavad Gita- 6th Chapter Reviewed by सत्संग ध्यान on 4:34:00 pm Rating: 5

S250, (क) पंच पापों को छोड़ दीजिए, नहीं तो ईश्वरीय सजा से नहीं बचेंगे।

      प्रभु प्रेमियों ! सत्संग ध्यान के इस प्रवचन सीरीज में आपका स्वागत है। आइए आज जानते हैं- संतमत सत्संग के महान प्रचारक सद्गुरु महर्षि ...
- 3:04:00 pm
S250, (क) पंच पापों को छोड़ दीजिए, नहीं तो ईश्वरीय सजा से नहीं बचेंगे। S250, (क) पंच पापों को छोड़ दीजिए, नहीं तो ईश्वरीय सजा से नहीं बचेंगे। Reviewed by सत्संग ध्यान on 3:04:00 pm Rating: 5

G05 सन्यासी के कर्म और कर्मयोग की विशेषताएं ।। Shrimad Bhagwat Geeta- 5th Chapter

श्री-गीता-योग-प्रकाश / 05  प्रभु प्रेमियों !  भारत ही नहीं, वरंच विश्व-विख्यात  श्रीमद्भागवत  गीता भगवान श्री कृष्ण द्वारा गाया हुआ गीत है।...
- 7:08:00 pm
G05 सन्यासी के कर्म और कर्मयोग की विशेषताएं ।। Shrimad Bhagwat Geeta- 5th Chapter G05  सन्यासी के कर्म और कर्मयोग की विशेषताएं  ।। Shrimad Bhagwat Geeta- 5th Chapter Reviewed by सत्संग ध्यान on 7:08:00 pm Rating: 5

G04 (घ) श्री कृष्ण-लीला और ज्ञान-यज्ञ की महिमा ।। Shrimad Bhagavad Gita- 4rth Chapter

श्रीगीता-योग-प्रकाश / 4 (घ)       प्रभु प्रेमियों ! वराह पुराण बताया गया है- गीतायाः पुस्तकं यत्र पाठः प्रवर्तते- तत्र सर्वाणि तीर्थानि प...
- 11:47:00 pm
G04 (घ) श्री कृष्ण-लीला और ज्ञान-यज्ञ की महिमा ।। Shrimad Bhagavad Gita- 4rth Chapter G04 (घ)  श्री कृष्ण-लीला और ज्ञान-यज्ञ की महिमा ।। Shrimad  Bhagavad Gita- 4rth Chapter Reviewed by सत्संग ध्यान on 11:47:00 pm Rating: 5

G04 (ग) अपानवायु को प्राणवायु में और प्राणवायु को अपानवायु में होमना ।। Bhagavad Gita- 4rth Chapter

श्री गीता योग प्रकाश / 4 (ग) प्रभु प्रेमियों !  श्री वेदव्यास जी ने महाभारत में गीता का वर्णन करने के उपरांत कहा है-- गीता सुनीता कर्तब्य...
- 8:56:00 pm
G04 (ग) अपानवायु को प्राणवायु में और प्राणवायु को अपानवायु में होमना ।। Bhagavad Gita- 4rth Chapter G04 (ग) अपानवायु को प्राणवायु में और प्राणवायु को अपानवायु में होमना  ।।  Bhagavad Gita- 4rth Chapter Reviewed by सत्संग ध्यान on 8:56:00 pm Rating: 5

G10 परमात्मा की बिशेष विभूति और अष्ट सिद्धिं ।। Shreemad Bhagavad Gita- 10th Chapter

श्रीगीता-योग-प्रकाश / 10 प्रभु प्रेमियों ! भारत ही नहीं, वरंच विश्व-विख्यात सुविख्यात श्रीमद्भागवत गीता भगवान श्री कृष्ण द्वारा गाया हुआ ...
- 1:09:00 pm
G10 परमात्मा की बिशेष विभूति और अष्ट सिद्धिं ।। Shreemad Bhagavad Gita- 10th Chapter G10  परमात्मा की बिशेष विभूति और अष्ट सिद्धिं  ।। Shreemad Bhagavad Gita- 10th Chapter Reviewed by सत्संग ध्यान on 1:09:00 pm Rating: 5

G09 (क) भक्ति और भक्त के विविध प्रकार और मोक्ष दायक भक्ति ।। Shrimad Bhagavad Gita- 9th Chapter

श्रीगीता-योग-प्रकाश / 09 क प्रभु प्रेमियों ! भारत ही नहीं, वरंच विश्व-विख्यात सुविख्यात श्रीमद्भागवत गीता भगवान श्री कृष्ण द्वारा गाया हुआ...
- 12:38:00 pm
G09 (क) भक्ति और भक्त के विविध प्रकार और मोक्ष दायक भक्ति ।। Shrimad Bhagavad Gita- 9th Chapter G09 (क) भक्ति और भक्त के विविध प्रकार और मोक्ष दायक भक्ति ।।  Shrimad Bhagavad Gita- 9th Chapter Reviewed by सत्संग ध्यान on 12:38:00 pm Rating: 5

MS02-02 रामचरितमानस में दृष्टियोग की चर्चा ।। ज्ञान प्रसंग ।। चरणामृत क्या है ।। सद्गुरु महर्षि मेंहीं

रामचरितमानस-सार-सटीक / 02 प्रभु प्रेमियों !  संतमत सत्संग के महान प्रचारक सद्गुरु महर्षि मेंहीं परमहंस जी महाराज के भारती (हिंदी) पुस्तक ...
- 10:39:00 am
MS02-02 रामचरितमानस में दृष्टियोग की चर्चा ।। ज्ञान प्रसंग ।। चरणामृत क्या है ।। सद्गुरु महर्षि मेंहीं MS02-02  रामचरितमानस में दृष्टियोग की चर्चा  ।। ज्ञान प्रसंग ।।  चरणामृत क्या है ।। सद्गुरु महर्षि मेंहीं Reviewed by सत्संग ध्यान on 10:39:00 am Rating: 5

S466, (ख) मोक्ष क्या है? संतमत का सार, पापों को छोड़ें -सद्गुरु महर्षि मेंही

प्रभु प्रेमियों ! सत्संग ध्यान के इस प्रवचन सीरीज में आपका स्वागत है। आइए आज जानते हैं-संतमत सत्संग के महान प्रचारक सद्गुरु महर्षि मेंहीं ...
- 10:08:00 am
S466, (ख) मोक्ष क्या है? संतमत का सार, पापों को छोड़ें -सद्गुरु महर्षि मेंही S466, (ख) मोक्ष क्या है? संतमत का सार, पापों को छोड़ें  -सद्गुरु महर्षि मेंही Reviewed by सत्संग ध्यान on 10:08:00 am Rating: 5

S466, (क) मोक्ष क्या है? संतमत का सार, पापों को छोड़ें -सद्गुरु महर्षि मेंही

प्रभु प्रेमियों ! सत्संग ध्यान के इस प्रवचन सीरीज में आपका स्वागत है। आइए आज जानते हैं-संतमत सत्संग के महान प्रचारक सद्गुरु महर्षि मेंहीं ...
- 9:51:00 am
S466, (क) मोक्ष क्या है? संतमत का सार, पापों को छोड़ें -सद्गुरु महर्षि मेंही S466, (क) मोक्ष क्या है? संतमत का सार, पापों को छोड़ें  -सद्गुरु महर्षि मेंही Reviewed by सत्संग ध्यान on 9:51:00 am Rating: 5

S467, ईश्वर भक्ति में तीन बातें परमावश्यक- स्तुति, प्रार्थना और उपासना -महर्षि मेंहीं

प्रभु प्रेमियों ! सत्संग ध्यान के इस प्रवचन सीरीज में आपका स्वागत है। आइए आज जानते हैं-संतमत सत्संग के महान प्रचारक सद्गुरु महर्षि मेंहीं ...
- 8:04:00 am
S467, ईश्वर भक्ति में तीन बातें परमावश्यक- स्तुति, प्रार्थना और उपासना -महर्षि मेंहीं S467, ईश्वर भक्ति में तीन बातें परमावश्यक- स्तुति, प्रार्थना और उपासना -महर्षि मेंहीं Reviewed by सत्संग ध्यान on 8:04:00 am Rating: 5

S488, सत्संग में बाधा देने वाला ईश्वरीय दंड का अधिकारी है -महर्षि मेंहीं

प्रभु प्रेमियों ! सत्संग ध्यान के इस प्रवचन सीरीज में आपका स्वागत है। आइए आज जानते हैं-संतमत सत्संग के महान प्रचारक सद्गुरु महर्षि मेंहीं ...
- 9:21:00 pm
S488, सत्संग में बाधा देने वाला ईश्वरीय दंड का अधिकारी है -महर्षि मेंहीं S488, सत्संग में बाधा देने वाला ईश्वरीय दंड का अधिकारी है -महर्षि मेंहीं Reviewed by सत्संग ध्यान on 9:21:00 pm Rating: 5

S323, आपस में मिलकर ईश्वर-स्तुति, संत-स्तुति और गुरु-स्तुति कीजिए -महर्षि मेंहीं

प्रभु प्रेमियों ! सत्संग ध्यान के इस प्रवचन सीरीज में आपका स्वागत है। आइए आज जानते हैं- संतमत सत्संग के महान प्रचारक सद्गुरु महर्षि मेंहीं...
- 8:45:00 pm
S323, आपस में मिलकर ईश्वर-स्तुति, संत-स्तुति और गुरु-स्तुति कीजिए -महर्षि मेंहीं S323, आपस में मिलकर ईश्वर-स्तुति, संत-स्तुति और गुरु-स्तुति कीजिए -महर्षि मेंहीं Reviewed by सत्संग ध्यान on 8:45:00 pm Rating: 5

MS01-03 ध्यान क्या है ।। विस्तार सहित शीघ्र सिद्धि देने वाले उपनिषद मंत्रों पर बिशेष चर्चाएं

सत्संग योग भाग एक / 03         प्रभु प्रेमियों ! भारतीय साहित्य में वेद, उपनिषद, उत्तर गीता,  श्रीमद्भगवद्गीता , आदि सदग्रंथों का बड़ा महत्व...
- 3:43:00 pm
MS01-03 ध्यान क्या है ।। विस्तार सहित शीघ्र सिद्धि देने वाले उपनिषद मंत्रों पर बिशेष चर्चाएं MS01-03  ध्यान क्या है ।। विस्तार सहित शीघ्र सिद्धि देने वाले उपनिषद मंत्रों पर बिशेष चर्चाएं Reviewed by सत्संग ध्यान on 3:43:00 pm Rating: 5

S469, (ख) सत्संग क्या है? सावित्री और सत्यवान की कथा। मनुष्य शरीर का सदुपयोग

प्रभु प्रेमियों ! सत्संग ध्यान के इस प्रवचन सीरीज में आपका स्वागत है। आइए आज जानते हैं-  संतमत सत्संग के महान प्रचारक सद्गुरु महर्षि मेंही...
- 10:02:00 am
S469, (ख) सत्संग क्या है? सावित्री और सत्यवान की कथा। मनुष्य शरीर का सदुपयोग S469, (ख) सत्संग क्या है? सावित्री और सत्यवान की कथा। मनुष्य शरीर का सदुपयोग Reviewed by सत्संग ध्यान on 10:02:00 am Rating: 5

S469, (क) सत्संग क्या है? सावित्री और सत्यवान की कथा। मनुष्य शरीर का सदुपयोग

प्रभु प्रेमियों ! सत्संग ध्यान के इस प्रवचन सीरीज में आपका स्वागत है। आइए आज जानते हैं-संतमत सत्संग के महान प्रचारक सद्गुरु महर्षि मेंहीं ...
- 9:40:00 am
S469, (क) सत्संग क्या है? सावित्री और सत्यवान की कथा। मनुष्य शरीर का सदुपयोग S469, (क) सत्संग क्या है? सावित्री और सत्यवान की कथा। मनुष्य शरीर का सदुपयोग Reviewed by सत्संग ध्यान on 9:40:00 am Rating: 5

S33, The basic mantra of promotion, freedom from fear and heaven hell fantasy or reality --सदगुरू महर्षि मेंहीं

महर्षि मेंहीं सत्संग सुधा सागर" /33       प्रभु प्रेमियों !  संतमत सत्संग  के महान प्रचारक  सद्गुरु महर्षि मेंहीं परमहंस  जी महा...
- 4:24:00 pm
S33, The basic mantra of promotion, freedom from fear and heaven hell fantasy or reality --सदगुरू महर्षि मेंहीं S33, The basic mantra of promotion, freedom from fear and heaven hell fantasy or reality --सदगुरू महर्षि मेंहीं Reviewed by सत्संग ध्यान on 4:24:00 pm Rating: 5

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