S465, मोक्ष क्या है? मोक्ष प्राप्ति का सरल और अनुभूत मार्ग -सद्गुरु महर्षि मेंही
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G06 (च) ध्यान में प्रत्याहार क्या है? मन कैसे बस में होता है ।। Bhagavad Gita- 6th Chapter
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11:44:00 pm
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G06 (ड•) ईश्वर-भक्ति की पूर्णता वाली असली समाधि क्या है ।। Bhagavad Gita- 6th Chapter
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G06 (घ) विंदु ध्यान या नासाग्र में कैसे देखते है, इसे अच्छी तरह समझें ।। Bhagavad Gita- 6th Chapter
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12:02:00 pm
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S250, (ग) संसार के सभी आनंदों से श्रेष्ठ है, ध्यान का आनंद -महर्षि मेंहीं
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7:23:00 pm
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S250, (ख) मैं ईश्वर भक्ति कराकर,देश की जड़ को मजबूत करता हूं । -महर्षि मेंहीं
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5:50:00 pm
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G06 (ख) ध्यान योग का सही स्वरूप और नासाग्र ध्यान का महत्व ।। Bhagavad Gita- 6th Chapter
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4:34:00 pm
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S250, (क) पंच पापों को छोड़ दीजिए, नहीं तो ईश्वरीय सजा से नहीं बचेंगे।
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G05 सन्यासी के कर्म और कर्मयोग की विशेषताएं ।। Shrimad Bhagwat Geeta- 5th Chapter
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G04 (घ) श्री कृष्ण-लीला और ज्ञान-यज्ञ की महिमा ।। Shrimad Bhagavad Gita- 4rth Chapter
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11:47:00 pm
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G04 (ग) अपानवायु को प्राणवायु में और प्राणवायु को अपानवायु में होमना ।। Bhagavad Gita- 4rth Chapter
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8:56:00 pm
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G10 परमात्मा की बिशेष विभूति और अष्ट सिद्धिं ।। Shreemad Bhagavad Gita- 10th Chapter
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G09 (क) भक्ति और भक्त के विविध प्रकार और मोक्ष दायक भक्ति ।। Shrimad Bhagavad Gita- 9th Chapter
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12:38:00 pm
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MS02-02 रामचरितमानस में दृष्टियोग की चर्चा ।। ज्ञान प्रसंग ।। चरणामृत क्या है ।। सद्गुरु महर्षि मेंहीं
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S466, (ख) मोक्ष क्या है? संतमत का सार, पापों को छोड़ें -सद्गुरु महर्षि मेंही
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S466, (क) मोक्ष क्या है? संतमत का सार, पापों को छोड़ें -सद्गुरु महर्षि मेंही
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9:51:00 am
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S467, ईश्वर भक्ति में तीन बातें परमावश्यक- स्तुति, प्रार्थना और उपासना -महर्षि मेंहीं
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S488, सत्संग में बाधा देने वाला ईश्वरीय दंड का अधिकारी है -महर्षि मेंहीं
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9:21:00 pm
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S323, आपस में मिलकर ईश्वर-स्तुति, संत-स्तुति और गुरु-स्तुति कीजिए -महर्षि मेंहीं
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MS01-03 ध्यान क्या है ।। विस्तार सहित शीघ्र सिद्धि देने वाले उपनिषद मंत्रों पर बिशेष चर्चाएं
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3:43:00 pm
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S469, (ख) सत्संग क्या है? सावित्री और सत्यवान की कथा। मनुष्य शरीर का सदुपयोग
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S469, (क) सत्संग क्या है? सावित्री और सत्यवान की कथा। मनुष्य शरीर का सदुपयोग
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S33, The basic mantra of promotion, freedom from fear and heaven hell fantasy or reality --सदगुरू महर्षि मेंहीं
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