प्रभु प्रेमियों ! सत्संग ध्यान के इस प्रवचन सीरीज में आपका स्वागत है। आइए आज जानते हैं-संतमत सत्संग के महान प्रचारक सद्गुरु महर्षि मेंहीं परमहंस जी महाराज के भारती (हिंदी) प्रवचन संग्रह "महर्षि मेंहीं सत्संग सुधा सागर" के प्रवचन नंबर S488 वां, इसमें बताया गया है कि सत्संग में बाधा देने वाला ईश्वरीय दंड का अधिकारी है। जो लोग सत्संग में बाधा देते हैं अगर उसे सरकार दंड नहीं देती है, तो वह ईश्वरीय दंड का अधिकारी होता है । उसे ईश्वर का दंड अवश्य मिलता है। यह बात गुरु महाराज ने तीन बार कहा है । संत लोग बीच-बीच में आकर चेताते रहते हैं । इसलिए संतों की भी स्तुति होनी चाहिए । इन सबसे बड़ी बात है । ईश्वर परमात्मा के ध्वनात्मक और वर्णनात्मक दोनों नामों का जाप होना चाहिए । दोनों नामों की पहचान होनी चाहिए, यही असली भक्ति है।
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| शांति संदेश |
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| प्रवचन चित्र |
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| प्रवचन समाप्त |
प्रभु प्रेमियों ! गुरु महाराज के इस प्रवचन का पाठ करके आपलोगों ने जाना कि सत्संग में बाधा देने वाला ईश्वरीय दंड का अधिकारी है। जो लोग सत्संग में बाधा देते हैं अगर उसे सरकार दंड नहीं देती है, तो वह ईश्वरीय दंड का अधिकारी होता है । इतनी जानकारी के बाद भी अगर आपके मन में किसी प्रकार का शंका या कोई प्रश्न है, तो हमें कमेंट करें। इस प्रवचन के बारे में अपने इष्ट मित्रों को भी बता दें, जिससे वे भी लाभ उठा सकें। सत्संग ध्यान ब्लॉग का सदस्य बने। इससे आपको आने वाले प्रवचन या पोस्ट की सूचना नि:शुल्क मिलती रहेगी।
S488, सत्संग में बाधा देने वाला ईश्वरीय दंड का अधिकारी है -महर्षि मेंहीं
Reviewed by सत्संग ध्यान
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