संतमत की विशेषता: बेद पुरान संतमत भाखौं
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यहाँ न पच्छपात कछुराखौं। बेद पुरान संतमत भाखौं।
बहुत पहले राजा लोग देश को टुकड़े-टुकड़े करके अलग-अलग रहते थे। आपस में लड़ते-झगड़ते थे तो दूसरे देश के लोग आकर चढ़ बैठे। 'घर फूटे गँवार लूटे' - यह बात बहुत दिनों से चली आ रही है। किंतु वे इस ज्ञान को अपने काम में नहीं लाए। पचास वर्षों से बेशी कोशिश करने के बाद अब अपना देश स्वतंत्र हुआ है।
शासनकर्ता कहते हैं- साम्प्रदायिकता का भाव एक होने नहीं देता। हमलोगों की तरफ देखिए - मोक्ष, परलोक, ईश्वर को रखते हुए संसार के सारे लोग एकता में रहें, साम्प्रदायिकता का भेद-भाव मिटकर एक हो जाए तो उसका नाम क्या कहा जायगा? संतमत। यह कोई नयी बात या नया नाम नहीं है-
"यहाँ न पच्छपात कछुराखौं। बेद पुरान संतमत भाखौं।"
गोस्वामी तुलसीदासजी ने रामायण में लिखा है। 'घर फूटे गँवार लूटे' कहकर भी जैसे उसे कार्यान्वित नहीं करते; उसी प्रकार संतमत को मानते हुए भी भेद-भाव रखते हैं, यह अच्छा नहीं।
संतमत की विशेषता: बेद पुरान संतमत भाखौं साम्प्रदायिकता का भेद-भाव मिटाकर मानवता को एक सूत्र में पिरोने का नाम ही संतमत है। सद्गुरु महर्षि मेँहीँ परमहंस जी महाराज के अनमोल विचार पढ़ने के लिए नीचे दिए लिंक पर क्लिक करें: [https://www.satsangdhyan.com/2026/02/santmat-ki-vishesta-bed-puran-vichaar.html]
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MS18 . महर्षि मेँहीँ सत्संग-सुधा सागर भाग 1: 1. महर्षि मेँहीँ सत्संग-सुधा सागर भाग 1 एक ऐसा ग्रंथ है जो मानव जीवन के दु:खों से छुटकारा दिलाने के लिए धर्मग्रंथों, साधु-संतों के वचनों और निजी अनुभूतियों से भरा हुआ है। 2. इस ग्रंथ का मनोयोगपूर्वक पाठ करने से व्यक्ति को ब्रह्म ज्ञान की प्राप्ति होती है, जिससे उसे मनुष्य शरीर का मिलना सुनिश्चित होता है। 3. शास्त्रों के अनुसार, ब्रह्म को जानने से मोक्ष की प्राप्ति होती है, अन्यथा बड़ी हानि होती है। 4. प्रवचनों का पाठ करने से व्यक्ति को ब्रह्म संबंधी ठोस और प्रमाणिक जानकारी मिलती है, जिससे उपर्युक्त लाभ अनिवार्य होता है। 5. इस ग्रंथ का प्रथम प्रकाशन वर्ष 2004 में हुआ था और इसमें गुरु महाराज के 323 प्रवचनों का संकलन है, जो ईश्वर, जीव ब्रह्म, साधना आदि आध्यात्मिक विषयों का ज्ञान प्रदान करते हैं। ( और जाने )
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जय गुरु महाराज🙏🙏
Reviewed by सत्संग ध्यान
on
5:20:00 am
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