आत्मनिर्भरता और एकता: महर्षि मेँहीँ परमहंस जी का जीवन दर्शन
S02: 9. आत्मनिर्भरता और एकता:
" बौद्ध संन्यासी नागसेन ने राजा मिलिन्द से पूछा - आप किस पर आए ? राजा बोला - रथ पर । क्या पहिया रथ है ? धूरी रथ है ? जुआ रथ है ? पहिए धूरी आदि जितने यंत्र हैं , सब मिलाकर रथ है । उसी प्रकार आपका शरीर है । वैसे कोई अकेला नहीं हो सकता । अद्वैत पद में जाकर ही अकेला हो सकता है । संसार में अकेला रह नहीं सकता ।
बाबा साहब ( बाबा देवी साहब ) ने मुझसे पूछा था - तुलसी सिस्टम में रहना चाहते हो या स्वावलंबन में ? मैंने कहा - तुलसी सिस्टम में । जिसे सुनकर सब हँस पड़े । बल्कि एक सत्संगी ने तो मुरादाबाद में ऐसा कहा कि माँगकर लाओगे तो फेंक दूंगा ।
मैंने पौन दो वर्षों तक लड़कों को पढ़ाया । मैं स्वयं खेती का काम भी देखता हूँ । उपदेश यह है - अपने जीवन - निर्वाह के लिए उपार्जन करो । गुरु महाराज का जोर था कि अपने जीवन - निर्वाह के लिए कमाओ । काम करते रहो , निठल्ला मत बैठो । भजन - सत्संग का काम करो । अपने गुजारा के लिए भी काम करो । झूठ , चोरी , नशा , हिंसा और व्यभिचार से बचने का प्रयास करते रहो । बाबा साहब डाकघर में काम किए , खेती भी किए । बैंक में कुछ जमा हुआ , फिर बैंक फेल भी हो गया । अपनी कमाई से ही अपना गुजारा करो । सदाचार से रहो , ईश्वर की भक्ति करो । जीवात्मा बहुत हैं , ईश्वर कोई नहीं है कोई ऐसा भी कहते हैं , किंतु यह बात भीतर नहीं जाती । यहाँ आध्यात्मिक , राजनीति किसी के लिए विरोध नहीं है । आपको संतमत कहना पसंद नहीं है तो आर्यसमाज या संन्यासी जो कहिए । किंतु मैं तो कहूँगा कि अपने में पृथक - पृथक की भावना न हो , एक मिल - जुलकर रहें । हम देश की रिवाज नहीं तोड़ते । आप सबका छुआ खाइए या स्वयं पाकी बनिए । इसके लिए सत्संग को कोई दखल नहीं । देश में छोटा - बड़ा बहुत दिनों से रहा है । देश में नया विधान हो , इसके लिए मुझे कोई लड़न्त - भिड़न्त नहीं ।"
आत्मनिर्भरता का मार्ग
महाराज जी अपने जीवन का उदाहरण देते हुए कहते हैं कि बाबा साहब (बाबा देवी साहब) ने उनसे पूछा था - "तुलसी सिस्टम में रहना चाहते हो या स्वावलंबन में?" महाराज जी ने 'तुलसी सिस्टम' में रहने की बात कही, जिस पर लोग हँसे। उन्होंने अपने अनुभव बताए कि कैसे उन्होंने पौने दो वर्षों तक लड़कों को पढ़ाया और स्वयं खेती का काम भी देखा।
उनका उपदेश स्पष्ट है: "अपने जीवन-निर्वाह के लिए उपार्जन करो। गुरु महाराज का जोर था कि अपने जीवन-निर्वाह के लिए कमाओ। काम करते रहो, निठल्ला मत बैठो। भजन-सत्संग का काम करो। अपने गुजारा के लिए भी काम करो।" वे झूठ, चोरी, नशा, हिंसा और व्यभिचार से बचने का भी लगातार प्रयास करने को कहते हैं। बाबा साहब ने स्वयं डाकघर में काम किया, खेती की, बैंक में जमा पूंजी रखी, भले ही वह बाद में फेल हो गया। यह सब अपनी कमाई से गुजारा करने और सदाचार से रहने का पाठ सिखाता है।
एकता और सहिष्णुता
महर्षि जी उन विचारों पर भी बात करते हैं जहाँ कुछ लोग कहते हैं कि "जीवात्मा बहुत हैं, ईश्वर कोई नहीं है।" वे इस बात को स्वीकार नहीं करते। उनका कहना है कि यहाँ आध्यात्मिक या राजनीतिक किसी के लिए कोई विरोध नहीं है। यदि किसी को 'संतमत' कहना पसंद नहीं है, तो वे उसे 'आर्यसमाज' या 'संन्यासी' भी कह सकते हैं।
उनका मुख्य संदेश यह है कि "अपने में पृथक-पृथक की भावना न हो, एक मिल-जुलकर रहें।" वे देश की सामाजिक रीती-रिवाजों को तोड़ने के पक्ष में नहीं हैं, जैसे कि छुआछूत या स्वयं-पाकी बनना। सत्संग इन व्यक्तिगत पसंदों में दखल नहीं देता। देश में छोटे-बड़े का भेद बहुत दिनों से रहा है, और यदि देश में नया विधान हो, तो इसके लिए उन्हें कोई "लड़न्त-भिड़न्त" नहीं है।
सार यह है कि महर्षि मेँहीँ परमहंस जी महाराज हमें आत्मनिर्भरता, सदाचार और सभी मनुष्यों में एकता की भावना के साथ ईश्वर की भक्ति करने का मार्ग दिखाते हैं।
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📚 महर्षि मेँहीँ साहित्य सुमनावली
MS18 . महर्षि मेँहीँ सत्संग-सुधा सागर भाग 1: 1. महर्षि मेँहीँ सत्संग-सुधा सागर भाग 1 एक ऐसा ग्रंथ है जो मानव जीवन के दु:खों से छुटकारा दिलाने के लिए धर्मग्रंथों, साधु-संतों के वचनों और निजी अनुभूतियों से भरा हुआ है। 2. इस ग्रंथ का मनोयोगपूर्वक पाठ करने से व्यक्ति को ब्रह्म ज्ञान की प्राप्ति होती है, जिससे उसे मनुष्य शरीर का मिलना सुनिश्चित होता है। 3. शास्त्रों के अनुसार, ब्रह्म को जानने से मोक्ष की प्राप्ति होती है, अन्यथा बड़ी हानि होती है। 4. प्रवचनों का पाठ करने से व्यक्ति को ब्रह्म संबंधी ठोस और प्रमाणिक जानकारी मिलती है, जिससे उपर्युक्त लाभ अनिवार्य होता है। 5. इस ग्रंथ का प्रथम प्रकाशन वर्ष 2004 में हुआ था और इसमें गुरु महाराज के 323 प्रवचनों का संकलन है, जो ईश्वर, जीव ब्रह्म, साधना आदि आध्यात्मिक विषयों का ज्ञान प्रदान करते हैं। ( और जाने )
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जय गुरु महाराज🙏🙏
Reviewed by सत्संग ध्यान
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8:47:00 am
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