MS12 सत्संग- सुधा भाग 1
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| सत्संग-सुधा भाग 1 |
सत्संग-सुधा भाग 1 में क्या है?
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| सत्संग सुधा भाग 2 |
MS13. सत्संग सुधा , द्वितीय भाग - इसका प्रथम प्रकाशन 1964 ईस्वी। ई0 में हुआ था। इसमें भी गुरु महाराज जी के 18 प्रवचनों का संकलन है। 60 वर्षों से बिंदु-नाद की साधना करते हुए संत- साहित्य के प्रमाणों के आधार पर सद्गुरु महर्षि मेँहीँ परमहंस जी महाराज ने अपने इन अट्ठारह प्रवचनों में सत्संग, ध्यान, ईश्वर, सद्गुरु, सदाचार एवं संसार में रहने की कला के बारे में बताया है। साथ ही यह भी बताया है कि वेद-उपनिषद एवं संत-साहित्य में वर्णित बातें बिल्कुल सत्य हैं और जांचने पर प्रत्यक्ष है। लोग इन साधनाओं को करके आप अपना इहलोक और परलोक के जीवन को सुखमय बना सकते हैं । जिन लोगों ने इसका अनुसरण किया वे धन्य धन्य हो रहे हैं । सत्संग-सुधा के दोनों भागों के पाठ से पाठकों को यह बोध होगा कि वेदों, उपनिषदों, गीता, सन्तवाणियों में सदा से ईश्वर-स्वरूप उसके साक्षात्कार करने की सद्युक्ति एवं अनिवार्य सदाचार-पालन के निर्देश बिल्कुल एक ही हैं। मानव-जीवन के सर्वांगीण और पूर्ण विकास तथा कल्याण के लिए ईश्वर भक्ति या अध्यात्म-ज्ञान की अनिवार्य आवश्यकता है। ( और जाने )
Reviewed by सत्संग ध्यान
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4:07:00 pm
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