Ad

Ad

शब्दकोष-04 अनादि - अनुकूल तक के शब्दों के शब्दार्थादि || संतमत+मोक्ष-दर्शन का शब्दकोष

संतमत+मोक्ष-दर्शन का शब्दकोष / अ

प्रभु प्रेमियों ! ' संतमत+ मोक्ष - दर्शन का शब्दकोश ' नाम्नी प्रस्तुत लेख में ' मोक्ष - दर्शन ' + 'महर्षि मेंहीं पदावली शब्दार्थ भावार्थ और टिप्पणी सहित' + 'गीता-सार' + 'संतवाणी सटीक' आदि धर्म ग्रंथों में गद्यात्मक एवं पद्यात्मक वचनों में आये शब्दों के अर्थ लिखे गये हैं . कोष्ठकों में शब्दों के व्याकरणिक परिचय भी देने का प्रयास किया गया है और शब्दों से संबंधित कुछ सूक्तियों का संकलन किया गया है. जोजो पूज्यपाद लालदास जी महाराज  द्वारा लिखित व संग्रहित  है । धर्मप्रेमियों के लिए यह कोष बड़ी ही उपयोगी है । आईए इस कोष के बनाने वाले महापुरुष का दर्शन करें.

अतिरिक्त - अनादि   तक के शब्दों का अर्थ पढ़ने के लिए   👉  यहां दवाएं

सद्गुरु महर्षि मेंही और बाबा लाल दास जी
बाबा लालदास जी और गुरुदेव

अनादि - अनुकूल    ||   संतमत + मोक्ष-दर्शन का शब्दकोष


अनादि - अनुकूल


अनादि ( सं ० , वि ० पँ ० ) = आदि रहित, आरंभ रहित , आदि - मध्य तथा अन्त नहीं रखनेवाला , उत्पत्ति रहित , अपने पहले कुछ नहीं अनामी रखनेवाला । ( परमात्मा उत्पत्ति और देश - काल की भी दृष्टि से ( अनादि है । ) 

अनादि का आदि ( पुं ० ) = जो अनामी अनादि ( प्रकृति ) के आदि ( आरंभ ) में या आरंभ से हो , अनामी परमात्मा । 

अनादि सान्त ( सं ० , वि ० ) = आदि - रहित और अन्त सहित । ( पॅ ० ) प्रकृति जो देश - काल की दृष्टि से अनादि है और समीम ( हददार , सीमाबद्ध ) है । 

अनादि अनन्तस्वरूपी ( सं ० , वि ० ) = आदि - रहित और अन्त - रहित स्वरूप रखनेवाला । ( पुं ० ) परमात्मा । 

अनाद्या ( सं ० वि ० स्त्री ० ) = आदि - रहित , ' उत्पत्ति रहित , आदि - अन्त तथा मध्य - रहित , अपने आरंभ में दूसरा कुछ नहीं रखनेवाली । ( स्त्री ० ) प्रकृति जो देश - काल की दृष्टि से अनाद्या है ; परन्तु उत्पत्ति की दृष्टि से अनाद्या नहीं है । 

अनाम ( सं ० , वि ० ) = नाम रहित , शब्द - रहित । ( पुं ० ) अनाम पद , शब्दातीत पद , परमात्मा । 

अनाम पद ( सं ० , पुं ० ) = शब्दातीत  पद , शब्द - रहित पद , ध्वनि विहीन स्थान , परमात्म - पद । 

अनामी ( वि ० ) = नाम - रहित , शब्दातीत , शब्द से रहित , नाम से रहित ( पुं ० ) परमात्मा । 

अनामी पुरुष ( पुं ० ) = नाम से रहित पुरुष , शब्द - रहित पुरुष ,परम प्रभु परमात्मा ।  

अनामी पुरुषोत्तम ( सं ० , वि ० ) = जो शब्द - रहित है और क्षर पुरुष ( जड़ प्रकृति ) तथा अक्षर पुरुष ( चेतन प्रकृति ) से भी श्रेष्ठ  है । ( पुं० ) परमात्मा । 

अनावश्यक ( सं ० , वि ० ) = जो आवश्यक नहीं हो , जिसकी  आवश्यकता न हो । 

अनाहत ( सं ० वि ० ) = बिना चोट खाया हुआ , जिसने चोट नहीं खायी हो , जो घायल नहीं हुआ हो , जो ( शब्द ) किसी पदार्थ  कंपन से उत्पन्न नहीं हुआ हो ।

अनाहत चक्र ( सं ० , पुं ० ) = पिंड के एक चक्र का नाम , हृदय - चक्र |

अनाहू ( पुं ० ) = भँवर गुफा का शब्द । 

अनिवार्य ( सं ० , वि ० ) = जिसका निवारण नहीं किया जा सके , नहीं हटाने के योग्य , आवश्यक । 

अनीह ( सं ० , वि ० ) = इच्छा - रहित , चेष्टा - रहित , क्रिया - रहित ।

अनुकूल ( सं ० , वि ० ) = अनुरूप, किसी पक्ष का समर्थन करने वाला ।∆


अनुकूल - अपरम्पार    तक के शब्दों का अर्थ पढ़ने के लिए   👉  यहां दवाएं


     प्रभु प्रेमियों ! संतमत की बातें बड़ी गंभीर हैं । सामान्य लोग इसके विचारों को पूरी तरह समझ नहीं पाते । इन पोस्टों  में संत , संतमत , संतमत की उपयोगिता , जड़ प्रकृति , चेतन प्रकृति , आदिनाद , सृष्टि - क्रम , सृष्टि के मंडल , जीव , ब्रह्म , ईश्वर , परमेश्वर , ईश्वर की भक्ति , परम मुक्ति , संतमत की साधना - पद्धतियों ( मानस जप , मानस ध्यान , दृष्टियोग तथा शब्द - साधना ) , साधना - पद्धतियों के अभ्यास से उत्पन्न अनुभूतियों , सद्गुरु की महत्ता , यम - नियम , साधकों के आहार - विहार , सत्संग आदि से संबंधित बातों पर चर्चा की गई हैं । '



मोक्ष दर्शन का शब्दकोश
मोक्ष-दर्शन का शब्दकोष 

प्रभु प्रेमियों ! बाबा लालदास कृत  ' मोक्ष - दर्शन का शब्दकोश ' के बारे में विशेष जानकारी तथा इस पुस्तक को खरीदने के लिए   👉 यहां दबाएं


सद्गुरु महर्षि मेंहीं परमहंस जी महाराज की पुस्तकें मुफ्त में पाने के लिए  शर्तों के बारे में जानने के लिए   यहां दवाएं

---×---

शब्दकोष-04 अनादि - अनुकूल तक के शब्दों के शब्दार्थादि || संतमत+मोक्ष-दर्शन का शब्दकोष शब्दकोष-04   अनादि - अनुकूल   तक के शब्दों के शब्दार्थादि  ||  संतमत+मोक्ष-दर्शन का शब्दकोष Reviewed by सत्संग ध्यान on 12/07/2021 Rating: 5

कोई टिप्पणी नहीं:

सत्संग ध्यान से संबंधित प्रश्न ही पूछा जाए।

Popular Posts

Ad

Blogger द्वारा संचालित.