प्रभु प्रेमियों ! गुरुसेवी स्वामी भागीरथ अभिनंदन ग्रंथ- 131 रंगीन + 9 ब्लैक चित्र, गुरुसेवी बाबा के जीवनी, महत्वपूर्ण घटनाएं, महापुरुषों के संस्मरण, संतमत साधना की संपूर्ण व्याख्या और प्रवचनों सहित संग्रहनीय ग्रंथ है। आई इस पुस्तक के बारे में संक्षिप्त जानकारी प्राप्त करें।
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गुरुसेवी स्वामी भागीरथ अभिनंदन ग्रंथ
गुरुसेवी स्वामी भागीरथ अभिनंदन ग्रंथ की बातें-
महर्षि मँहीँ आश्रम , कुप्पाघाट , भागलपुर ( बिहार ) में साधना - सिद्ध संत सद्गुरु के सान्निध्य में सत्संग - सुधा का पान कर अपनी गुह्य गुरु - ज्ञान- क्षुधा को करनेवाले गुरुसेवी स्वामी भगीरथजी महाराज आज स्वयं इस गुरु - आश्रम की आध्यात्मिक शोभा में अपनी आत्मीय आभा बिखेरकर चार चाँद लगा रहे हैं । इनकी गुरु - सेवा , साधना , संतमत - सत्संग - सेवा और समयनिष्ठा सराहनीय और अनुकरणीय है । अपने सद्गुरु के ' संतमत - सत्संग सुधा - घट ' को अपने सिर पर लिये गुरुसेवी स्वामी भगीरथजी महाराज अनवरत संसार को शाश्वत सुख और शान्ति का सात्त्विक - संदेश संचारित कर रहे हैं संतमत - सत्संग के एक दृढ़ स्तंभ के रूप में इनका योगदान अनिर्वचनीय और अविस्मरणीय है।
ऐसे महान गुरुसेवक गुरुसेवी स्वामी भगीरथजी महाराज के अपने जीवन के 75 वें वर्ष के उपलक्ष्य में संतमत सत्संग में उनके अमूल्य योगदान को दृष्टिगत रखते हुए तथा संतमत सत्संग के महान आचार्य संत सद्गुरु महर्षि मँहीँ परमहंसजी महाराज के ' निज - सेवक ' के रूप में इनकी गुरुतर गुरु - सेवा के लिए श्रद्धालु सत्संगियों की ओर से अखिल भारतीय संतमत सत्संग महासभा के द्वारा इनके सम्मान में ' गुरुसेवी स्वामी भगीरथ अभिनन्दन - ग्रंथ ' का प्रकाशन किया जा रहा है । इनकी 75 वीं जयन्ती के शुभ अवसर पर इनके उस गले में , जिनसे लिपटकर पूज्य गुरुदेव इनकी गोद में चला करते थे , अभिनन्दनग्रंथ रूपी हार समर्पित कर हमें अप्रतिम आनंद व गौरव का अनुभव हो रहा है ।
इस महान कार्य में महती योगदान देने हेतु समस्त श्रद्धालु सत्संगियों , पादकीय सलाहकारों , प्रबंधकों एवं संपादक - मंडल को महासभा धन्यवाद ज्ञापित करती है और गुरुदेव से प्रार्थना करती है । कि ऐसे गुरुसेवक संत गुरुसेवी स्वामी भगीरथ महाराज को लंबी स्वस्थ आयु प्रदान करें , ताकि सतमत - सत्संग के प्रचार का संचार इनक द्वारा अनवरत होता रहे और जगत् लाभान्वित हो । पूज्य गुरुसेवी बाबा की 75 वीं जयन्ती वर्षगाँठ के शुभ अवसर पर इन्हें महासभा की ओर से अनन्त शुभकामनाएँ । जय गुरु !"
आइए इस ग्रंथ के कुछ महत्वपूर्ण चित्रों को देखें-
गुरुसेवी स्वामी भागीरथ अभिनंदन ग्रंथ 01
गुरुसेवी स्वामी भागीरथ अभिनंदन ग्रंथ 02
गुरुसेवी स्वामी भागीरथ अभिनंदन ग्रंथ 03
गुरुसेवी स्वामी भागीरथ अभिनंदन ग्रंथ 04
गुरुसेवी स्वामी भागीरथ अभिनंदन ग्रंथ 05
गुरुसेवी स्वामी भागीरथ अभिनंदन ग्रंथ 06
गुरुसेवी स्वामी भागीरथ अभिनंदन ग्रंथ 07
गुरुसेवी स्वामी भागीरथ अभिनंदन ग्रंथ 08
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योग-संगीत : संत श्री श्यामाचरण लाहिड़ी जी के महान शिष्य योगाचार्य श्री श्री पंचानन भट्वाचार्य जी महाराज द्वारा रचित बंगाली भाषा का भारती (हिन्दी) भाषा में रूपान्तरित 119 पद्यों में साधनानुभूति की बात भरपूर गाई गई है। इस पुस्तक में साधना में प्रगति हो इसकी भी प्रेरणादायिनी वाणी है। पुज्य गुरुदेव महर्षिं मेँहीँ परमहंस जी महाराज अपने जीवन काल में अखिल भारतीय संतमत -सत्संग महाधिवेशन एवं जिलाधिवेशनों में योग-संगीत नामक पुस्तक से बंगला भजन साज-बाज के साथ गवाते थे। योग-संगीत का पद्य गुरुदेव को बहुत अच्छा लगता था। यह पुस्तक योगीराज श्री श्यामाचरण लाहिड़ी जी महाराज के महान शिष्य योगाचार्य पंडित पंचानन भट्राचार्य कृत 'योग-संगीत' जो की बंगाला भाषा में है उसी का भारती (हिन्दी) भाषा में लिप्यंतरण किया गया है। जिससे बंगाला भाषा में संतों का ज्ञान एवं भारती (हिन्दी) भाषा में संतों का ज्ञान का एकत्व का बोध कर आत्मकल्याण कर सके। ( ज्यादा जाने )
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OS02 गुरुसेवी स्वामी भागीरथ अभिनंदन ग्रंथ || 131 रंगीन + 9 ब्लैक चित्रयुक्त संम्पूर्ण जीवन चरित सह उपदेश
Reviewed by सत्संग ध्यान
on
11:37:00 am
Rating: 5
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प्रभु प्रेमियों ! कृपया वही टिप्पणी करें जो आप किसी संतवाणी से प्रूफ कर सके या समझ बनी हो किसी ऐसी बानी का उपयोग न करें जिनसे आपका भी समय खराब हो और हमारा भी जय गुरु महाराज
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