अंग का मतलब क्या है? महर्षि मेँहीँ शब्दकोश एवं संतमत में इसका अर्थ
प्रभु प्रेमियों ! शब्दकोश की इस कड़ी में आज हम 'अंग' (Ang) शब्द की व्याख्या करेंगे। व्युत्पत्ति के अनुसार 'अंग' शब्द का अर्थ 'उपकारक' होता है, जो किसी वस्तु के स्वरूप को जानने में सहायक हो।
प्रभु प्रेमियों ! शब्दकोश की इस कड़ी में आज हम 'अंग' (Ang) शब्द की व्याख्या करेंगे। व्युत्पत्ति के अनुसार 'अंग' शब्द का अर्थ 'उपकारक' होता है, जो किसी वस्तु के स्वरूप को जानने में सहायक हो।
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अंग: व्याकरण और विभिन्न अर्थ
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अंग: देह, शरीर, अवयव, अंश, भाग । अंग संस्कृत मूल का पुल्लिंग शब्द है।
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अंग: देह, शरीर, अवयव, अंश, भाग । अंग संस्कृत मूल का पुल्लिंग शब्द है।
- शारीरिक अर्थ: शरीर के विभिन्न अवयव जैसे आँख, कान, हाथ आदि।
- वैदिक अर्थ: वेद के अध्ययन के लिए आवश्यक 6 विषय (शिक्षा, कल्प, व्याकरण, निरुक्त, छन्द और ज्योतिष), जिन्हें 'वेदांग' कहा जाता है।
- साधना का अर्थ: योग साधना के आठ भाग (यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान और समाधि), जिन्हें अष्टांग योग के 'अंग' कहते हैं।
सद्गुरु महर्षि मेँहीँ के अनुसार शरीर और साधना
सद्गुरु महर्षि मेँहीँ परमहंस जी महाराज के अनुसार, यह शरीर (अंग) साधन का धाम है। उन्होंने बताया है कि:
"यह शरीर साधनों का भंडार और मोक्ष का द्वार है।"
जब तक जीव इन जड़ शरीरों (अंगों) के बंधनों में लिपटा रहता है, वह परमात्मा के वास्तविक स्वरूप को नहीं पहचान सकता। मुक्ति के लिए इन आवरणों से ऊपर उठना आवश्यक है।
सद्गुरु महर्षि मेँहीँ परमहंस जी महाराज के अनुसार, यह शरीर (अंग) साधन का धाम है। उन्होंने बताया है कि:
"यह शरीर साधनों का भंडार और मोक्ष का द्वार है।"
जब तक जीव इन जड़ शरीरों (अंगों) के बंधनों में लिपटा रहता है, वह परमात्मा के वास्तविक स्वरूप को नहीं पहचान सकता। मुक्ति के लिए इन आवरणों से ऊपर उठना आवश्यक है।
महर्षि मेँहीँ पदावली में अंग की चर्चा
अंग = शरीर ।
वह परमात्मा सदा हमारे शरीर के अंदर हमारे साथ रहता है, फिर भी वह कभी हमारे लिए प्रकट नहीं होता है । अभ्यासी उसे खोजते हुए परेशान हो जाता है, फिर भी वह शीघ्र दिखलायी नहीं पड़ता है ॥२॥ " -- पदावली / 117
अंश-अंग, अवयव, भाग, जो किसी का अवयव हो, जीवात्मा। पदावली / 27
निष्कर्ष और निवेदन
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Reviewed by सत्संग ध्यान
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7:04:00 pm
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