अंकित का मतलब क्या है? जानिए इसका आध्यात्मिक और शाब्दिक अर्थ
प्रभु प्रेमियों ! सन्तमत और अध्यात्म के जिज्ञासुओं के लिए शब्दों के गहरे अर्थों को समझना अत्यंत आवश्यक है। आज हम 'अंकित' शब्द की गहराई में उतरेंगे, जो न केवल हमारे दैनिक जीवन का हिस्सा है, बल्कि पूज्य महर्षि मेँहीँ परमहंस जी महाराज के साहित्य में भी विशेष स्थान रखता है।
प्रभु प्रेमियों ! सन्तमत और अध्यात्म के जिज्ञासुओं के लिए शब्दों के गहरे अर्थों को समझना अत्यंत आवश्यक है। आज हम 'अंकित' शब्द की गहराई में उतरेंगे, जो न केवल हमारे दैनिक जीवन का हिस्सा है, बल्कि पूज्य महर्षि मेँहीँ परमहंस जी महाराज के साहित्य में भी विशेष स्थान रखता है।
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| अंकित का मतलब क्या है? |
अंकित का अर्थ
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अंकित (सं०, वि०) = लिखित, लिखा हुआ, खुदा हुआ, गोद में लिया हुआ, चिह्नित, चिह्न किया हुआ।
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अंकित (सं०, वि०) = लिखित, लिखा हुआ, खुदा हुआ, गोद में लिया हुआ, चिह्नित, चिह्न किया हुआ।
नमस्ते ! आपने 'अंकित' शब्द की जो व्याख्या और संदर्भ (मोक्ष दर्शन एवं महर्षि मेँहीँ पदावली से) प्रस्तुत किए हैं, वे अत्यंत ज्ञानवर्धक हैं। आपकी आवश्यकतानुसार, इस शब्द के आध्यात्मिक और व्यावहारिक अर्थों को समाहित करते हुए एक विस्तृत जानकारी यहाँ पर है।
अंकित संस्कृत भाषा का विशेषण शब्द है। इसका मतलब है लिखित, लिखा हुआ, खुदा हुआ, गोद में लिया हुआ, चिन्हित, चिन्ह किया हुआ।
अंकित शब्द की व्युत्पत्ति और शाब्दिक अर्थ
'अंकित' संस्कृत भाषा का एक विशेषण शब्द है। सरल शब्दों में इसका अर्थ होता है—जिस पर कोई अंक या चिह्न लगाया गया हो। शब्दकोश के अनुसार इसके मुख्य अर्थ निम्नलिखित हैं:
- लिखित या लिखा हुआ: जो कलम या किसी उपकरण से उकेरा गया हो।
- चिह्नित (Marked): जिस पर पहचान के लिए कोई निशान लगाया गया हो।
- खुदा हुआ (Engraved): जैसे पत्थरों या धातुओं पर अक्षर उकेरे जाते हैं।
- गोद में लिया हुआ: 'अंक' का एक अर्थ 'गोद' भी होता है, अतः जिसे गोद में स्थान मिला हो।
- मुहर लगा हुआ: जो प्रमाणित हो।
'अंकित' संस्कृत भाषा का एक विशेषण शब्द है। सरल शब्दों में इसका अर्थ होता है—जिस पर कोई अंक या चिह्न लगाया गया हो। शब्दकोश के अनुसार इसके मुख्य अर्थ निम्नलिखित हैं:
- लिखित या लिखा हुआ: जो कलम या किसी उपकरण से उकेरा गया हो।
- चिह्नित (Marked): जिस पर पहचान के लिए कोई निशान लगाया गया हो।
- खुदा हुआ (Engraved): जैसे पत्थरों या धातुओं पर अक्षर उकेरे जाते हैं।
- गोद में लिया हुआ: 'अंक' का एक अर्थ 'गोद' भी होता है, अतः जिसे गोद में स्थान मिला हो।
- मुहर लगा हुआ: जो प्रमाणित हो।
. 'मोक्ष दर्शन' के प्रकाश में 'अंकित' का आध्यात्मिक संदर्भ
महर्षि मेँहीँ परमहंस जी महाराज द्वारा रचित 'मोक्ष दर्शन' में इस शब्द का प्रयोग अत्यंत गूढ़ आध्यात्मिक सत्य को बताने के लिए किया गया है। पुस्तक के चतुर्थ पाराग्राफ में वर्णन है:
"...जिस विशेष साधन - नादानुसन्धान अर्थात् सुरत - शब्द - योग का गौरव सन्तमत को है , वे तो अति प्राचीन काल के इसी भित्ति पर अंकित होकर जगमगा रहे हैं।"
व्याख्या: यहाँ 'अंकित' होने का अर्थ है कि वह परम ज्ञान (सुरत-शब्द-योग) अत्यंत प्राचीन काल से ही वेदों और उपनिषदों की आधारशिला पर मजबूती से लिखा हुआ है। यह कोई नई कल्पना नहीं, बल्कि शाश्वत सत्य है जो समय की भित्ति पर सदैव के लिए अंकित है।
( ४ ) "शान्ति प्राप्त करने का प्रेरण मनुष्यों के हृदय में स्वाभाविक ही है । प्राचीन काल में ऋषियों ने इसी प्रेरण से प्रेरित होकर इसकी पूरी खोज की और इसकी प्राप्ति के विचारों को उपनिषदों में वर्णन किया । इन्हीं विचारों से मिलते हुए विचारों को कबीर साहब और गुरु नानक साहब आदि सन्तों ने भी भारती और पंजाबी आदि भाषाओं में सर्व - साधारण के उपकारार्थ वर्णन किया ; इन विचारों को ही सन्तमत कहते हैं ; परन्तु सन्तमत की मूल भित्ति तो उपनिषद् के वाक्यों को ही मानने पड़ते हैं ; क्योंकि जिस ऊँचे ज्ञान का तथा उस ज्ञान के पद तक पहुँचाने के जिस विशेष साधन - नादानुसन्धान अर्थात् सुरत - शब्द - योग का गौरव सन्तमत को है , वे तो अति प्राचीन काल के इसी भित्ति पर अंकित होकर जगमगा रहे हैं ।" (मोक्ष-दर्शन)
महर्षि मेँहीँ परमहंस जी महाराज द्वारा रचित 'मोक्ष दर्शन' में इस शब्द का प्रयोग अत्यंत गूढ़ आध्यात्मिक सत्य को बताने के लिए किया गया है। पुस्तक के चतुर्थ पाराग्राफ में वर्णन है:
"...जिस विशेष साधन - नादानुसन्धान अर्थात् सुरत - शब्द - योग का गौरव सन्तमत को है , वे तो अति प्राचीन काल के इसी भित्ति पर अंकित होकर जगमगा रहे हैं।"
व्याख्या: यहाँ 'अंकित' होने का अर्थ है कि वह परम ज्ञान (सुरत-शब्द-योग) अत्यंत प्राचीन काल से ही वेदों और उपनिषदों की आधारशिला पर मजबूती से लिखा हुआ है। यह कोई नई कल्पना नहीं, बल्कि शाश्वत सत्य है जो समय की भित्ति पर सदैव के लिए अंकित है।
( ४ ) "शान्ति प्राप्त करने का प्रेरण मनुष्यों के हृदय में स्वाभाविक ही है । प्राचीन काल में ऋषियों ने इसी प्रेरण से प्रेरित होकर इसकी पूरी खोज की और इसकी प्राप्ति के विचारों को उपनिषदों में वर्णन किया । इन्हीं विचारों से मिलते हुए विचारों को कबीर साहब और गुरु नानक साहब आदि सन्तों ने भी भारती और पंजाबी आदि भाषाओं में सर्व - साधारण के उपकारार्थ वर्णन किया ; इन विचारों को ही सन्तमत कहते हैं ; परन्तु सन्तमत की मूल भित्ति तो उपनिषद् के वाक्यों को ही मानने पड़ते हैं ; क्योंकि जिस ऊँचे ज्ञान का तथा उस ज्ञान के पद तक पहुँचाने के जिस विशेष साधन - नादानुसन्धान अर्थात् सुरत - शब्द - योग का गौरव सन्तमत को है , वे तो अति प्राचीन काल के इसी भित्ति पर अंकित होकर जगमगा रहे हैं ।" (मोक्ष-दर्शन)
'महर्षि मेँहीँ पदावली' में अंकित शब्द
पदावली के संदर्भ (P08) में 'अंकित होकर' का अर्थ 'लिखित होकर' या 'लिखा जाकर' लिया गया है। सन्तमत के साहित्य में जब कोई साधना का अनुभव या गुरु की महिमा हृदय पटल पर अंकित होती है, तो वह साधक के जीवन का अटूट हिस्सा बन जाती है।
अंकित होकर= लिखित होकर , लिखा जाकर । P08,
पदावली के संदर्भ (P08) में 'अंकित होकर' का अर्थ 'लिखित होकर' या 'लिखा जाकर' लिया गया है। सन्तमत के साहित्य में जब कोई साधना का अनुभव या गुरु की महिमा हृदय पटल पर अंकित होती है, तो वह साधक के जीवन का अटूट हिस्सा बन जाती है।
अंकित होकर= लिखित होकर , लिखा जाकर । P08,
नाम के रूप में 'अंकित' का महत्व
भारतीय समाज में 'अंकित' एक अत्यंत लोकप्रिय नाम है।
- विशिष्टता: इसका अर्थ 'प्रसिद्ध' या 'विशिष्ट' भी होता है।
- विजय: कुछ संदर्भों में इसे 'विजय प्राप्त' करने वाले के रूप में भी देखा जाता है।
- स्वभाव: माना जाता है कि 'अंकित' नाम वाले व्यक्ति स्पष्टवादी और अपने सिद्धांतों पर अडिग रहने वाले होते हैं, जैसे पत्थर पर अंकित लकीर।
अंकित शब्द से जुड़े अन्य महत्वपूर्ण तथ्य
| श्रेणी | विवरण |
|---|---|
| व्याकरण | विशेषण (Adjective) |
| विलोम शब्द | अनंकित (Unmarked) |
| पर्यायवाची | चिह्नित, लिपिबद्ध, उत्कीर्ण, मुद्रित |
| सम्बन्धित शब्द | अंकगणित (पहले), अंकुश (बाद में) |
निष्कर्ष: जीवन की भित्ति पर क्या अंकित करें?
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क्या आपको यह जानकारी उपयोगी लगी? कृपया नीचे कमेंट बॉक्स में अपनी राय दें और इस ज्ञान को अन्य साधकों के साथ भी साझा करें। फिर मिलते हैं अगले पोस्ट में। जय गुरु !
Reviewed by सत्संग ध्यान
on
6:42:00 pm
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