गुरु महाराज कैसे प्रसन्न होते हैं? सद्गुरु महर्षि मेँहीँ परमहंस जी के अनमोल वचन
प्यारे भाइयो !
सद्गुरु महर्षि मेँहीँ परमहंस जी महाराज के वचनों में अगाध प्रेम और अपनत्व झलकता है। वे भक्तों और सत्संगियों को देखकर कितने प्रसन्न होते थे, इसका प्रमाण उनके इन शब्दों से मिलता है:
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| महर्षि मेँहीँ परमहंस जी महाराज का चित्र और गुरु वचन |
"आपलोगों के दर्शन से बहुत प्रफुल्लित होता हूँ। आप सब लोगों को मैं वन्दगी और प्रणाम करता हूँ।"
इन पंक्तियों में गुरु महाराज की महानता छिपी है। एक पूर्ण सद्गुरु होने के बावजूद, वे अपने भक्तों में भी परमात्मा का रूप देखते थे और उन्हें वन्दगी करते थे। गुरु महाराज की प्रसन्नता किसी बाहरी दिखावे में नहीं, बल्कि सत्संगियों के आपसी प्रेम, सेवा और साधना में निहित है।
जब हम गुरु महाराज के बताए मार्ग पर चलते हैं और आपस में प्रेमभाव रखते हैं, तभी हम उनके सच्चे सेवक कहलाते हैं। गुरु महाराज हमें यही सिखाते हैं कि विनम्रता ही भक्ति का आधार है।
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गुरु महाराज कैसे प्रसन्न होते हैं? 🙏
"आपलोगों के दर्शन से बहुत प्रफुल्लित होता हूँ..." जानिए गुरु महाराज के इन अमृत वचनों का गहरा अर्थ और उनकी प्रसन्नता का रहस्य।
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📚 महर्षि मेँहीँ साहित्य सुमनावली
MS18 . महर्षि मेँहीँ सत्संग-सुधा सागर भाग 1- 1. महर्षि मेँहीँ सत्संग-सुधा सागर भाग 1 एक ऐसा ग्रंथ है जो मानव जीवन के दु:खों से छुटकारा दिलाने के लिए धर्मग्रंथों, साधु-संतों के वचनों और निजी अनुभूतियों से भरा हुआ है। 2. इस ग्रंथ का मनोयोगपूर्वक पाठ करने से व्यक्ति को ब्रह्म ज्ञान की प्राप्ति होती है, जिससे उसे मनुष्य शरीर का मिलना सुनिश्चित होता है। 3. शास्त्रों के अनुसार, ब्रह्म को जानने से मोक्ष की प्राप्ति होती है, अन्यथा बड़ी हानि होती है। 4. प्रवचनों का पाठ करने से व्यक्ति को ब्रह्म संबंधी ठोस और प्रमाणिक जानकारी मिलती है, जिससे उपर्युक्त लाभ अनिवार्य होता है। 5. इस ग्रंथ का प्रथम प्रकाशन वर्ष 2004 में हुआ था और इसमें गुरु महाराज के 323 प्रवचनों का संकलन है, जो ईश्वर, जीव ब्रह्म, साधना आदि आध्यात्मिक विषयों का ज्ञान प्रदान करते हैं। ( और जाने )
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जय गुरु महाराज🙏🙏
Reviewed by सत्संग ध्यान
on
2:51:00 pm
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