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S13. 6 || शान्ति और तृप्ति कैसे प्राप्त होती है? How to find peace and satisfaction?

शान्ति और तृप्ति कैसे प्राप्त होती है?

      प्रभु प्रेमियों ! यह प्रवचन बाँंका जिला, मंदार पहाड़ पर श्रीकीर्तिनारायण सिंह द्वारा आयोजित दिनांक-३१-३- १९५१ ई.के प्रातकाल के सत्संग में हुआ था। इस प्रवचन में सद्गुरु महर्षि मेँहीँ परमहंसी महाराज सत्संग के विषय में निम्नोक्त बातें कही थी-

योगी लोग क्या करते हैं? चित्रवृति का निरोध क्यों करते हैं?
योगी क्या करते हैं?

How to find peace and satisfaction?

     6. शान्ति , तृप्ति और मुक्ति के लिए कहते हैं कि चित्त की वृत्ति का निरोध करो। शरीर में रहते हुए इसका निरोध होने पर जीवन्मुक्ति तथा शरीर छूटने पर विदेहमुक्ति होती है। पुनः श्रीराम ने बताया-'मेरे स्वरूप का ध्यान करो। 


उपरोक्त बातें महर्षि मेँहीँ सत्संग सुधा सागर के प्रवचन नंबर 13 में कही गई है। पूरा प्रवचन पढ़ने के लिए  👉 यहाँ दवाएँ।


प्रभु प्रेमियों ! सद्गुरु महर्षि मेँहीँ परमहंसी महाराज के सभी प्रवचनों में कहाँ कौन सा विषय का वर्णन है? किस प्रवचन में किस प्रश्न का उत्तर है? इसे संक्षिप्त रूप में जानने के लिए  👉यहाँ दवाएँ। 



सद्गुरु महर्षि मेंही परमहंस जी महाराज के विविध विषयों पर विभिन्न स्थानों में दिए गए प्रवचनों का संग्रहनीय ग्रंथ महर्षि मेंहीं सत्संग-सुधा सागर
महर्षि मेँहीँ सत्संग-सुधा सागर
     प्रभु प्रेमियों ! उपरोक्त प्रवचनांश  'महर्षि मेँहीँ सत्संग-सुधा सागर"' से ली गई है। अगर आप इस पुस्तक से महान संत सद्गुरु महर्षि मेँहीँ परमहंस  जी महाराज के  अन्य प्रवचनों के बारे में जानना चाहते हैं या इस पुस्तक के बारे में विशेष रूप से जानना चाहते हैं तो    👉 यहां दबाएं।

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S13. 6 || शान्ति और तृप्ति कैसे प्राप्त होती है? How to find peace and satisfaction? S13. 6 ||  शान्ति और तृप्ति कैसे प्राप्त होती है? How to find peace and satisfaction? Reviewed by सत्संग ध्यान on 8:49:00 pm Rating: 5

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