3. ईश्वर को कौन जान सकता है?
संत मत के अनुसार यह संपूर्ण सृष्टि पंच विषयों में बंटी है और इन्हें ग्रहण करने के लिए हमारे पास पांच ज्ञानेंद्रियां हैं। रूप, रस, गन्ध, स्पर्श और शब्द—इनमें से प्रत्येक को ग्रहण करने के लिए विशिष्ट इन्द्रिय निर्धारित है। आँख से रूप, जिभ्या से रस, नासिका से गन्ध, त्वचा से स्पर्श और कान से शब्द ग्रहण किए जाते हैं। इन इन्द्रियों के अतिरिक्त अन्य किसी भी माध्यम से इन पाँचों विषयों को नहीं जाना जा सकता।
ठीक इसी प्रकार, वह ईश्वर पूर्णतः आत्मगम्य है। ईश्वर को किसी भी बाहरी साधन या भौतिक इन्द्रिय से नहीं जाना जा सकता। शरीर के भीतर जो निवास करती है, वह केवल चेतन-आत्मा है। जो तत्व इस चेतन-आत्मा के अतिरिक्त और किसी भी सांसारिक साधन से पकड़ा न जा सके, वही परमात्मा है।
 | | चेतन- आत्मा और इन्द्रियाँ |
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चेतन-आत्मा और परमात्मा का स्वरूप
ऋषियों और संतों का स्पष्ट मत है कि शरीर के भीतर आप स्वयं चेतन-आत्मा हैं। उस विशुद्ध अंतरात्मा से जो परम आनंद और परम तत्व प्राप्त होता है, उसी को परमात्मा कहते हैं। इन्द्रियों की एक निश्चित सीमा है, वे केवल जड़ प्रकृति के विषयों को ग्रहण कर सकती हैं। परंतु जो चेतन है, उसे केवल चेतन ही जान सकता है। इसलिए केवल चेतन-आत्मा से ही उस अविनाशी परमात्मा को जाना जाता है। इन बातों को अच्छी तरह समझने के लिए निम्नलिखित प्रवचन को मनोयोग पूर्वक पूरा पढ़ें-
3. प्यारे लोगो ! वह ईश्वर आत्मगम्य है । केवल चेतन - आत्मा से
जाना जाता है । शरीर के भीतर आप चेतन - आत्मा हैं और उस आत्मा से जो प्राप्त होता है , उसी को परमात्मा कहते हैं । रूप , रस , गन्ध , स्पर्श और शब्द ; इन पाँचों में से प्रत्येक को ग्रहण करने के लिए जो - जो इन्द्रिय हैं अर्थात् आँख से रूप , जिभ्या से रस , नासिका से गन्ध , त्वचा से स्पर्श और कान से शब्द ; इन इन्द्रियों के अतिरिक्त और किसी से ये पाँचो विषय ग्रहण नहीं किए जाते हैं । इसी प्रकार जो चेतन - आत्मा के अतिरिक्त और किसी से नहीं पकड़ा जाय , वही परमात्मा है ।
प्रभु प्रेमियों ! सद्गुरु महर्षि मेँहीँ परमहंसी महाराज का यह प्रवचन ग्राम डोभाघाट (जिला पूर्णियाँ) अ० भा० सं० स० विशेषाधिवेशन के अवसर पर दिनांक ५.१२.१६४६ ई० के सत्संग में हुआ था ।जिसमें उन्होंने उपरोक्त बातें कही थी । महर्षि मेँहीँ सत्संग सुधा सागर के सभी प्रवचनों में कहाँ क्या है? किस प्रवचन में किस प्रश्न का उत्तर है? इसे संक्षिप्त रूप में जानने के लिए 👉यहाँ दवाएँ।
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