6. चेतन-आत्मा क्या है?
प्यारे लोगो !
6. "अब यह साफ तरह से जना देता हूँ कि अनादि आदि परम तत्त्व परमात्मा केवल चैतन्य आत्मा से ही ग्रहण होने , पहचाने जाने योग्य है जबतक शरीर और इन्द्रियों के सहित चैतन्य आत्मा रहेगी , तबतक परमात्मा को नहीं पहचान सकेगी । आँख पर पट्टी बँधी हो , तो आँख में देखने की शक्ति रहने पर भी बाहरी दृश्य नहीं देखा जाता और आँख पर रंगीन चश्मा लगा रहने पर बाहर का यथार्थ रंग नहीं देखने में आता है , चश्मे के रंग के अनुरूप ही रंग बाहर में देखने में आता है । आँख पर से पट्टी और चश्मा उतार दो , बाहर के यथार्थ रंग देखने में आएंगे । शरीर और इन्द्रियों के आवरण से छूटते ही या यों कहो कि चैतन्य आत्मा पर से शरीर और इन्द्रियों की पट्टी और चश्मे उतरते ही चैतन्य आत्मा को परमात्म - स्वरूप की पहचान हो जाएगी । शरीर , इन्द्रिय और स्थूल , सूक्ष्म आदि मायिक सब आवरणों के उतर जाने पर , जो इस पिण्ड में बच जाता है , वही चेतन - आत्मा है और इनसे जो पहचाना जाता है , वही अनादि आदि तत्त्व परमात्मा है । "
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| महर्षि मेँहीँ सत्संग-सुधा सागर |
Reviewed by सत्संग ध्यान
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8:09:00 am
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