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LS36 gkms 247 || dosh doorgun se kaise bachen || हम कितना बचाएँगे || सबका लोहू एक है

गुरदेव के मधुर संस्मरण // 247

     प्रभु प्रेमियों  ! 'गुरदेव के मधुर संस्मरण' के इस भाग में हिन्दी शब्दकोश में दिये गये दुर्गुण शब्द की परिभाषा और पर्यायवाची की चर्चा नहीं मिलेगा न ही अंगद-रावण संवाद के 14 दुर्गुणों की चर्चा मिलेगी बल्कि यहाँ सदगुरु महर्षि मेंहीं परमहंसजी महाराज के उन बचनों की चर्चा मिलेगी जिसमें उन्होंने कहा था कि दोष-दुर्गनों से गुरु कबतक रक्षा कर सकते हैं? "हम कितना बचाएँगे " और एक दूसरे प्रसंग में "सबका लोहू एक है" पर चर्चा मिलेगी.


इस संस्मरण के पहले वाले संस्मरण को पढ़ने के लिए   
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अवगुण से बचने पर चर्चा

२४७. हम कितना बचाएँगे : 


     हमारे दोष - दुर्गुण हमारे जीवन को बर्बाद करते हैं । इसलिए जिसे अपने जीवन का निर्माण करने की इच्छा हो , उसे दोष - दुर्गुणों से बचकर रहना चाहिए । हमारे जीवन को बनाने - बिगाड़ने में सुसंग और कुसंग का बड़ा हाथ होता है । जो सुसंगति में रहता है , वह महान् बन जाता है और जो कुसंगति का सेवन करता है , वह नीचता को प्राप्त हो जाता है । जुआ खेलने , शराब पीने , परस्त्रीगमन करने आदि दुर्गुणों के शिकार व्यक्ति के उजड़ने में देर नहीं लगती ।

सद्गुरु महर्षि मेंहीं परमहंस जी महाराज
सदगुरु महर्षि मेंहीं

     युवावस्था में शारीरिक शक्ति विशेष रहती है । विशेष शारीरिक शक्ति रहने के कारण भी लोग पापों की ओर प्रवृत्त हो जाते हैं । काम भाव की प्रबलता भी युवावस्था में ही अधिक देखी जाती है । इसीलिए युवावस्था दोष - दुर्गुणों की खान कही जाती है । जो अपनी युवावस्था को सँभालकर नहीं रख पाता है , उसका बुढ़ापा विशेष कष्टकारक हो जाता है । 

     जो स्वयं दुर्गुणों से बचकर रहना नहीं चाहता है , उसे ब्रह्मा भी सुधार नहीं सकते । आप अपने बच्चे को दुर्गुणों से बचाकर रखना चाहते हैं , इसीलिए आप उसे हमेशा शिक्षा दिया करते हैं और उसके दोषों के लिए उसे डाँटते - फटकारते रहते हैं । वह जबतक आपके सामने रहता है , तबतक वह आपके भय से कोई गलती नहीं करता है ; परन्तु जब वह आपकी आँखों के सामने से हटता है , तो गलती कर बैठता है । वह गलती करना तभी छोड़ सकता है , जब उसे गलती की बुराइयाँ समझ में आ जाएँ और वह स्वयं गलती को छोड़ने के लिए तत्पर तथा प्रयत्नशील रहे । 

बाबा लालदास जी महाराज
संस्मरण लेखक

     जब बुरी आदत लगने लगे , तभी उसे प्रयत्नपूर्वक छोड़ देना चाहिए । जब आदत परिपक्व और पुरानी हो जाती है , तब उसे छोड़ पाना कठिन हो जाता है । बड़ों की सेवा में दिन - रात संलग्न रहनेवाले को बिगड़ने का मौका नहीं मिल पाता है ।

     गुरु भी शिष्यों को अज्ञात रूप से बुराइयों से बचाते हैं ; परन्तु यदि शिष्य कमर कसकर बुराई करने में लग जाए , तब गुरु कितना बचाएँगे ! एक दिन किसी की बुराई की चर्चा गुरुदेव के सामने हुई , तो वे बोले कि हम कितना बचाएँगे ! ∆


२४८. सबका लोहू एक है : 

     कभी - कभी गुरुदेव गुरु नानकदेवजी की निम्नलिखित वाणी अपने आप ऊँचे स्वर में गाया करते थे--

क्या मुरगी क्या गाय है , क्या अपनो जाया । 
सबका लोहू एक है , साहिब फरमाया ॥ 
पीर पैगम्बर औलिया , सब मरने आया । 
नाहक जीव न मारिये , पोषन कूँ काया ॥ ∆
स संस्मरण के बाद वाले संस्मरण को पढ़ने के लिए  


    प्रभु प्रेमियों ! इस लेख में Durgun Kaise Dur Kre, दुर्गुण दूर कैसे करे, दोष दूर्गुण से कैसे बचें,  अवगुण से कैसे बचें, अपने दोष और धुरगुणों को हटाइये, दोष का अर्थ, अवगुण का अर्थ, पाप क्या है, पाप का मतलब क्या है? पाप कैसे दूर करें? 10 पाप कौन से हैं? पाप का फल कब मिलता है?  जाना. आशा करता हूं कि आप इसके सदुपयोग से इससे समुचित लाभ उठाएंगे. इतनी जानकारी के बाद भी अगर आपके मन में किसी प्रकार  का कोई शंका या कोई प्रश्न है, तो हमें कमेंट करें। इस लेख के बारे में अपने इष्ट मित्रों को भी बता दें, जिससे वे भी इससे लाभ उठा सकें। सत्संग ध्यान ब्लॉग का सदस्य बने। इससे आपको आने वाले हर पोस्ट की सूचना नि:शुल्क आपके ईमेल पर मिलती रहेगी। . ऐसा विश्वास है. जय गुरु महाराज.


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