अँचला (Anchala) का अर्थ: साधु-संतों का विशेष कटि-वस्त्र
प्रभु प्रेमियों ! आध्यात्मिक मार्ग पर चलने वाले जिज्ञासुओं और गुरु प्रेमियों के लिए शब्दों के सही अर्थ समझना अत्यंत आवश्यक है। आज हम मेँहीँ साहित्य और संत वाणी में प्रयुक्त होने वाले एक विशेष शब्द 'अँचला' पर विस्तार से चर्चा करेंगे।
प्रभु प्रेमियों ! आध्यात्मिक मार्ग पर चलने वाले जिज्ञासुओं और गुरु प्रेमियों के लिए शब्दों के सही अर्थ समझना अत्यंत आवश्यक है। आज हम मेँहीँ साहित्य और संत वाणी में प्रयुक्त होने वाले एक विशेष शब्द 'अँचला' पर विस्तार से चर्चा करेंगे।
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अँचला का अर्थ
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अँचला (पुँ०) = कटि-वस्त्र, कपड़े का एक टुकड़ा जिसे साधु-संत धोती के स्थान पर कमर में लपेटे रहते हैं।
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अँचला (पुँ०) = कटि-वस्त्र, कपड़े का एक टुकड़ा जिसे साधु-संत धोती के स्थान पर कमर में लपेटे रहते हैं।
नमस्ते! आपके द्वारा दी गई जानकारी बहुत ही सटीक और आध्यात्मिक महत्व वाली है।
ध्यान का बटूआँ निरत का सूईदान। ब्रह्म अंचला लै पहिरे सुजान ॥" -बाबा श्रीचंद जी महाराज
अँचला शब्द की परिभाषा (Definition of Anchala)
हिंदी शब्दकोश के अनुसार, अँचला एक पुल्लिंग शब्द है। इसका सरल अर्थ है— 'कटि-वस्त्र'।
साधु-महात्मा और संन्यासी सामान्य धोती के स्थान पर कपड़े का जो एक छोटा टुकड़ा अपनी कमर (कटि) में लपेटकर रखते हैं, उसे ही 'अँचला' कहा जाता है। यह त्याग और सादगी का प्रतीक माना जाता है।
हिंदी शब्दकोश के अनुसार, अँचला एक पुल्लिंग शब्द है। इसका सरल अर्थ है— 'कटि-वस्त्र'।
साधु-महात्मा और संन्यासी सामान्य धोती के स्थान पर कपड़े का जो एक छोटा टुकड़ा अपनी कमर (कटि) में लपेटकर रखते हैं, उसे ही 'अँचला' कहा जाता है। यह त्याग और सादगी का प्रतीक माना जाता है।
आध्यात्मिक साहित्य में अँचला का संदर्भ
संतों की वाणी में अँचला शब्द का प्रयोग केवल वस्त्र के लिए ही नहीं, बल्कि प्रतीकात्मक रूप में भी किया गया है। गुरु नानक देव जी के पुत्र और उदासी संप्रदाय के प्रवर्तक बाबा श्रीचंद जी महाराज ने अपनी रचनाओं में इसका सुंदर वर्णन किया है:
"ध्यान का बटूआँ निरत का सूईदान।
ब्रह्म अंचला लै पहिरे सुजान ॥"
अर्थ: ध्यान का बटुआ है और अंतर की ओर सुरत की संलग्नता या प्रेमावेश में नृत्य करना ही सूईदान ( सूई रखने की डिबिया ) है । सुजान ( सुंदर ज्ञानवाले संत ) ब्रह्म ( परमात्मा ) का अँचला ( कटिवस्त्र , कमर का कपड़ा ) लेकर पहनते हैं । -संतवाणी सटीक
यहाँ अँचला को 'ब्रह्म' के स्वरूप से जोड़ा गया है, जिसे धारण करने वाला व्यक्ति सच्चा 'सुजान' (ज्ञानी) कहलाता है।
संतों की वाणी में अँचला शब्द का प्रयोग केवल वस्त्र के लिए ही नहीं, बल्कि प्रतीकात्मक रूप में भी किया गया है। गुरु नानक देव जी के पुत्र और उदासी संप्रदाय के प्रवर्तक बाबा श्रीचंद जी महाराज ने अपनी रचनाओं में इसका सुंदर वर्णन किया है:
"ध्यान का बटूआँ निरत का सूईदान।
ब्रह्म अंचला लै पहिरे सुजान ॥"
अर्थ: ध्यान का बटुआ है और अंतर की ओर सुरत की संलग्नता या प्रेमावेश में नृत्य करना ही सूईदान ( सूई रखने की डिबिया ) है । सुजान ( सुंदर ज्ञानवाले संत ) ब्रह्म ( परमात्मा ) का अँचला ( कटिवस्त्र , कमर का कपड़ा ) लेकर पहनते हैं । -संतवाणी सटीक
यहाँ अँचला को 'ब्रह्म' के स्वरूप से जोड़ा गया है, जिसे धारण करने वाला व्यक्ति सच्चा 'सुजान' (ज्ञानी) कहलाता है।
अँचला धारण करने का महत्व
संतमत और भारतीय साधु परंपरा में कम से कम वस्त्र धारण करने का विधान है। अँचला धारण करना निम्नलिखित बातों को दर्शाता है:
- अपरिग्रह: अनावश्यक वस्तुओं का त्याग।
- ब्रह्मचर्य और शुचिता: संयमित जीवन की पहचान।
- साधना में सुगमता: लंबे समय तक एक आसन में बैठने के लिए यह वस्त्र अत्यंत आरामदायक होता है।
संतमत और भारतीय साधु परंपरा में कम से कम वस्त्र धारण करने का विधान है। अँचला धारण करना निम्नलिखित बातों को दर्शाता है:
- अपरिग्रह: अनावश्यक वस्तुओं का त्याग।
- ब्रह्मचर्य और शुचिता: संयमित जीवन की पहचान।
- साधना में सुगमता: लंबे समय तक एक आसन में बैठने के लिए यह वस्त्र अत्यंत आरामदायक होता है।
अँचला और आँचल में अंतर (Difference between Anchal and Anchala)
अक्सर लोग इन दो शब्दों में भ्रमित हो जाते हैं, लेकिन अर्थ की दृष्टि से ये बिल्कुल भिन्न हैं:
- आँचल (स्त्रीलिंग): यह स्त्रियों के पहनावे (साड़ी या ओढ़नी) का वह छोर होता है जो छाती पर रहता है या जिससे सिर ढका जाता है।
- अँचला (पुल्लिंग): यह संतों द्वारा कमर में धारण किया जाने वाला वस्त्र है।
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शब्दकोश क्रम (Dictionary Order)
शब्दकोश के अनुसार 'अँचला' का स्थान इस प्रकार है:
- अँगोछा: अँचला से ठीक पहले आने वाला शब्द।
- अँचला: (वर्तमान शब्द)
- अंकगणित: अँचला के ठीक बाद आने वाला शब्द।
शब्दकोश के अनुसार 'अँचला' का स्थान इस प्रकार है:
- अँगोछा: अँचला से ठीक पहले आने वाला शब्द।
- अँचला: (वर्तमान शब्द)
- अंकगणित: अँचला के ठीक बाद आने वाला शब्द।
निष्कर्ष और निवेदन
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Reviewed by सत्संग ध्यान
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6:15:00 pm
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