महर्षि मेँहीँ-शब्दकोश: आध्यात्मिक साधकों और संतमत प्रेमियों के लिए एक अनमोल उपहार
संतमत के महान विभूति सद्गुरु महर्षि मेँहीँ परमहंस जी महाराज का साहित्य ज्ञान का वह अगाध सागर है, जिसे समझना हर जिज्ञासु के लिए परम आवश्यक है। उनकी वाणी और लेखों में प्रयुक्त गूढ़ आध्यात्मिक शब्दों को सरल बनाने के लिए लेखक छोटेलाल दास ने एक भगीरथ प्रयास किया है— "महर्षि मेँहीँ-शब्दकोश"।

महर्षि मेँहीँ-शब्धकोश
महर्षि मेँहीँ शब्दकोश
संतमत के महान विभूति सद्गुरु महर्षि मेँहीँ परमहंस जी महाराज का साहित्य ज्ञान का वह अगाध सागर है, जिसे समझना हर जिज्ञासु के लिए परम आवश्यक है। उनकी वाणी और लेखों में प्रयुक्त गूढ़ आध्यात्मिक शब्दों को सरल बनाने के लिए लेखक छोटेलाल दास ने एक भगीरथ प्रयास किया है— "महर्षि मेँहीँ-शब्दकोश"।
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| महर्षि मेँहीँ-शब्धकोश |
क्यों खास है यह शब्दकोश?
अक्सर आध्यात्मिक ग्रंथों को पढ़ते समय हमारे सामने ऐसे शब्द आते हैं जिनका अर्थ सामान्य शब्दकोशों में नहीं मिलता। यह पुस्तक विशेष रूप से महर्षि मेँहीँ-साहित्य से चुने गए 6,621 शब्दों का संग्रह है। इस ग्रंथ की रचना में लगभग 12 वर्षों का कठिन परिश्रम लगा है, जो इसकी प्रमाणिकता को दर्शाता है।
पुस्तक की मुख्य विशेषताएँ
- विस्तृत शब्द संग्रह: इसमें संस्कृत, हिंदी, अरबी, फारसी और अंग्रेजी के उन शब्दों को शामिल किया गया है जो आध्यात्मिक ग्रंथों में अक्सर उपयोग होते हैं।
- व्याकरणिक परिचय: प्रत्येक शब्द के साथ उसका व्याकरण (जैसे- संज्ञा, विशेषण, क्रिया) भी दिया गया है ताकि पाठक शब्द के सही संदर्भ को समझ सकें।
- सरल व्याख्या: गूढ़ दार्शनिक शब्दों को इतनी सहज भाषा में समझाया गया है कि एक सामान्य पाठक भी उसे आसानी से आत्मसात कर सके।
- लेखक का समर्पण: लेखक छोटेलाल दास जी, जो स्वयं महर्षि मेँहीँ के शिष्य रहे हैं, उन्होंने अपनी साधना और गुरु-सेवा के अनुभव को इस पुस्तक में पिरोया है।
आध्यात्मिक ज्ञान का आधार
इस शब्दकोश के अंत में महर्षि मेँहीँ परमहंस जी का एक बहुत ही सुंदर संदेश उद्धृत है: "मनुष्य कहते हैं विचारवान् को।" वे समझाते हैं कि पशु और पक्षी भी जीवन का आनंद लेते हैं, लेकिन मनुष्य की श्रेष्ठता उसके विचारवान होने और इंद्रियों पर काबू पाने में है। यह शब्दकोश हमें उसी वैचारिक गहराई तक पहुँचने में मदद करता है।
निष्कर्ष
यदि आप संतमत के साहित्य का गहराई से अध्ययन करना चाहते हैं या गुरु महाराज के प्रवचनों का सही अर्थ समझना चाहते हैं, तो महर्षि मेँहीँ-शब्दकोश आपके संग्रह में जरूर होनी चाहिए। यह केवल एक शब्दकोश नहीं, बल्कि आध्यात्मिक यात्रा को सुगम बनाने वाली एक मार्गदर्शिका है। आइये इस शब्दकोश के कुछ मुख्य पृष्ठों का दर्शन करें-
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महर्षि मेँहीँ शब्दकोश की सूची देखना
प्रभु प्रेमियों ! महर्षि मेँहीँ शब्दकोश की विषय सूची को देखना एक बहुत ही गंभीर बात है। इसे सरल भाषा में जब तक नहीं समझ लेंगे, तब तक सर्वसाधारण को इस विषय में जानकारी नहीं हो सकता है, कि कहां क्या है? किसी भी शब्दकोश में शब्दों को लिखने का क्रम निम्नलिखित प्रकार से होता है। इसी प्रकार से आपको इस विषय सूची में भी अपनी इच्छित शब्दों को ढूंढना चाहिए। समझने के लिए समझ लें कि सबसे पहले चंदबिंदु वाले शब्द, फिर अनुसार वाले शब्द फिर शुरू वाले शब्द और वाद पहले शब्द में आने वाले वर्णमाला के हिसाब से आगे के शब्दों को रखा जाता है। इसी कर्म में शब्दकोश के शब्दों को सजाया जाता है। नीचे के उदाहरण को देखकर के समझे कि आपका शब्द किस जगह मिल सकता है।
1. महर्षि मेँहीँ शब्दकोश की विषय सूची को समझना आवश्यक है ताकि सर्वसाधारण को जानकारी मिल सके।
2. शब्दकोश में शब्दों का क्रम: चंदबिंदु, अनुसार, शुरू के शब्द, और वाद के शब्दों के आधार पर होता है।
3. शब्दों को वर्णमाला के हिसाब से क्रमबद्ध किया जाता है।
स्वर वर्ण (Vowels)
- अ: [ अँ+(ॐ से अ वर्ग | क वर्ग | च वर्ग | ट वर्ग | त वर्ग | प वर्ग | य-व वर्ग | श-ह वर्ग | संयुक्त वर्ग (क्ष, त्र, ज्ञ) के शब्द] जैसे- [ॐ-अंशी], [अंग-अंगीकरण], [अंजन-अंडरस्टैण्ड], [अंत - अंधेरी कोठरी], [ अंबर - अंशी ]
- आ: [आ+(अँ से अः वर्ग | क वर्ग | च वर्ग | ट वर्ग | त वर्ग | प वर्ग | य-व वर्ग | श-ह वर्ग | संयुक्त वर्ग (क्ष, त्र, ज्ञ) के शब्द] जैसे- [ आँकना - आदरणीय ]
- इ: [ इ+(अँ से अः वर्ग | क वर्ग | च वर्ग | ट वर्ग | त वर्ग | प वर्ग | य-व वर्ग | श-ह वर्ग | संयुक्त वर्ग (क्ष, त्र, ज्ञ) के शब्द] जैसे-
- ई: [ ई+(अँ से अः वर्ग | क वर्ग | च वर्ग | ट वर्ग | त वर्ग | प वर्ग | य-व वर्ग | श-ह वर्ग | संयुक्त वर्ग (क्ष, त्र, ज्ञ) के शब्द] जैसे-
- उ: [ उ+(अँ से अः वर्ग | क वर्ग | च वर्ग | ट वर्ग | त वर्ग | प वर्ग | य-व वर्ग | श-ह वर्ग | संयुक्त वर्ग (क्ष, त्र, ज्ञ) के शब्द] जैसे-
- ऊ: [ ऊ+(अँ से अः वर्ग | क वर्ग | च वर्ग | ट वर्ग | त वर्ग | प वर्ग | य-व वर्ग | श-ह वर्ग | संयुक्त वर्ग (क्ष, त्र, ज्ञ) के शब्द] जैसे-
- ए: [ ए+(अँ से अः वर्ग | क वर्ग | च वर्ग | ट वर्ग | त वर्ग | प वर्ग | य-व वर्ग | श-ह वर्ग | संयुक्त वर्ग (क्ष, त्र, ज्ञ) के शब्द] जैसे-
- ऐ: [ ऐ+(अँ से अः वर्ग | क वर्ग | च वर्ग | ट वर्ग | त वर्ग | प वर्ग | य-व वर्ग | श-ह वर्ग | संयुक्त वर्ग (क्ष, त्र, ज्ञ) के शब्द] जैसे-
- ओ: [ओ+(अँ से अः वर्ग | क वर्ग | च वर्ग | ट वर्ग | त वर्ग | प वर्ग | य-व वर्ग | श-ह वर्ग | संयुक्त वर्ग (क्ष, त्र, ज्ञ) के शब्द] जैसे-
- औ: [ औ+(अँ से अः वर्ग | क वर्ग | च वर्ग | ट वर्ग | त वर्ग | प वर्ग | य-व वर्ग | श-ह वर्ग | संयुक्त वर्ग (क्ष, त्र, ज्ञ) के शब्द] जैसे-
- अ: [अ:+(अँ से अः वर्ग | क वर्ग | च वर्ग | ट वर्ग | त वर्ग | प वर्ग | य-व वर्ग | श-ह वर्ग | संयुक्त वर्ग (क्ष, त्र, ज्ञ) के शब्द] जैसे-
व्यंजन वर्ण (Consonants)
- क: [ क+(अँ से अः वर्ग | क वर्ग | च वर्ग | ट वर्ग | त वर्ग | प वर्ग | य-व वर्ग | श-ह वर्ग | संयुक्त वर्ग (क्ष, त्र, ज्ञ) के शब्द] जैसे-
- ख: [ ख+(अँ से अः वर्ग | क वर्ग | च वर्ग | ट वर्ग | त वर्ग | प वर्ग | य-व वर्ग | श-ह वर्ग | संयुक्त वर्ग (क्ष, त्र, ज्ञ) के शब्द] जैसे-
- ग: [ ग+(अँ से अः वर्ग | क वर्ग | च वर्ग | ट वर्ग | त वर्ग | प वर्ग | य-व वर्ग | श-ह वर्ग | संयुक्त वर्ग (क्ष, त्र, ज्ञ) के शब्द] जैसे-
- घ: [ घ+(अँ से अः वर्ग | क वर्ग | च वर्ग | ट वर्ग | त वर्ग | प वर्ग | य-व वर्ग | श-ह वर्ग | संयुक्त वर्ग (क्ष, त्र, ज्ञ) के शब्द] जैसे-
- च: [ च+(अँ से अः वर्ग | क वर्ग | च वर्ग | ट वर्ग | त वर्ग | प वर्ग | य-व वर्ग | श-ह वर्ग | संयुक्त वर्ग (क्ष, त्र, ज्ञ) के शब्द] जैसे-
- छ: [ छ+(अँ से अः वर्ग | क वर्ग | च वर्ग | ट वर्ग | त वर्ग | प वर्ग | य-व वर्ग | श-ह वर्ग | संयुक्त वर्ग (क्ष, त्र, ज्ञ) के शब्द] जैसे-
- ज: [ ज+(अँ से अः वर्ग | क वर्ग | च वर्ग | ट वर्ग | त वर्ग | प वर्ग | य-व वर्ग | श-ह वर्ग | संयुक्त वर्ग (क्ष, त्र, ज्ञ) के शब्द] जैसे-
- झ: [ झ+(अँ से अः वर्ग | क वर्ग | च वर्ग | ट वर्ग | त वर्ग | प वर्ग | य-व वर्ग | श-ह वर्ग | संयुक्त वर्ग (क्ष, त्र, ज्ञ) के शब्द] जैसे-
- त: [ त+(अँ से अः वर्ग | क वर्ग | च वर्ग | ट वर्ग | त वर्ग | प वर्ग | य-व वर्ग | श-ह वर्ग | संयुक्त वर्ग (क्ष, त्र, ज्ञ) के शब्द] जैसे-
- थ: [ थ+(अँ से अः वर्ग | क वर्ग | च वर्ग | ट वर्ग | त वर्ग | प वर्ग | य-व वर्ग | श-ह वर्ग | संयुक्त वर्ग (क्ष, त्र, ज्ञ) के शब्द] जैसे-
- द: [ द+(अँ से अः वर्ग | क वर्ग | च वर्ग | ट वर्ग | त वर्ग | प वर्ग | य-व वर्ग | श-ह वर्ग | संयुक्त वर्ग (क्ष, त्र, ज्ञ) के शब्द] जैसे-
- ध: [ ध+(अँ से अः वर्ग | क वर्ग | च वर्ग | ट वर्ग | त वर्ग | प वर्ग | य-व वर्ग | श-ह वर्ग | संयुक्त वर्ग (क्ष, त्र, ज्ञ) के शब्द] जैसे-
- न: [ न+(अँ से अः वर्ग | क वर्ग | च वर्ग | ट वर्ग | त वर्ग | प वर्ग | य-व वर्ग | श-ह वर्ग | संयुक्त वर्ग (क्ष, त्र, ज्ञ) के शब्द] जैसे-
- प: [ प+(अँ से अः वर्ग | क वर्ग | च वर्ग | ट वर्ग | त वर्ग | प वर्ग | य-व वर्ग | श-ह वर्ग | संयुक्त वर्ग (क्ष, त्र, ज्ञ) के शब्द] जैसे-
- फ: [ फ+(अँ से अः वर्ग | क वर्ग | च वर्ग | ट वर्ग | त वर्ग | प वर्ग | य-व वर्ग | श-ह वर्ग | संयुक्त वर्ग (क्ष, त्र, ज्ञ) के शब्द] जैसे-
- ब: [ च+(अँ से अः वर्ग | क वर्ग | च वर्ग | ट वर्ग | त वर्ग | प वर्ग | य-व वर्ग | श-ह वर्ग | संयुक्त वर्ग (क्ष, त्र, ज्ञ) के शब्द] जैसे-
- भ: [ भ+(अँ से अः वर्ग | क वर्ग | च वर्ग | ट वर्ग | त वर्ग | प वर्ग | य-व वर्ग | श-ह वर्ग | संयुक्त वर्ग (क्ष, त्र, ज्ञ) के शब्द] जैसे-
- म: [ म+(अँ से अः वर्ग | क वर्ग | च वर्ग | ट वर्ग | त वर्ग | प वर्ग | य-व वर्ग | श-ह वर्ग | संयुक्त वर्ग (क्ष, त्र, ज्ञ) के शब्द] जैसे-
- य: [ य+(अँ से अः वर्ग | क वर्ग | च वर्ग | ट वर्ग | त वर्ग | प वर्ग | य-व वर्ग | श-ह वर्ग | संयुक्त वर्ग (क्ष, त्र, ज्ञ) के शब्द] जैसे-
- र: [ र+(अँ से अः वर्ग | क वर्ग | च वर्ग | ट वर्ग | त वर्ग | प वर्ग | य-व वर्ग | श-ह वर्ग | संयुक्त वर्ग (क्ष, त्र, ज्ञ) के शब्द] जैसे-
- ल: [ ल+(अँ से अः वर्ग | क वर्ग | च वर्ग | ट वर्ग | त वर्ग | प वर्ग | य-व वर्ग | श-ह वर्ग | संयुक्त वर्ग (क्ष, त्र, ज्ञ) के शब्द] जैसे-
- व: [ व+(अँ से अः वर्ग | क वर्ग | च वर्ग | ट वर्ग | त वर्ग | प वर्ग | य-व वर्ग | श-ह वर्ग | संयुक्त वर्ग (क्ष, त्र, ज्ञ) के शब्द] जैसे-
- श: [ श+(अँ से अः वर्ग | क वर्ग | च वर्ग | ट वर्ग | त वर्ग | प वर्ग | य-व वर्ग | श-ह वर्ग | संयुक्त वर्ग (क्ष, त्र, ज्ञ) के शब्द] जैसे-
- ष: [ ष+(अँ से अः वर्ग | क वर्ग | च वर्ग | ट वर्ग | त वर्ग | प वर्ग | य-व वर्ग | श-ह वर्ग | संयुक्त वर्ग (क्ष, त्र, ज्ञ) के शब्द] जैसे-
- स: [ स+(अँ से अः वर्ग | क वर्ग | च वर्ग | ट वर्ग | त वर्ग | प वर्ग | य-व वर्ग | श-ह वर्ग | संयुक्त वर्ग (क्ष, त्र, ज्ञ) के शब्द] जैसे-
- ह: [ ह+(अँ से अः वर्ग | क वर्ग | च वर्ग | ट वर्ग | त वर्ग | प वर्ग | य-व वर्ग | श-ह वर्ग | संयुक्त वर्ग (क्ष, त्र, ज्ञ) के शब्द] जैसे-
- क्ष: [ च+(अँ से अः वर्ग | क वर्ग | च वर्ग | ट वर्ग | त वर्ग | प वर्ग | य-व वर्ग | श-ह वर्ग | संयुक्त वर्ग (क्ष, त्र, ज्ञ) के शब्द] जैसे-
- त्र: [ च+(अँ से अः वर्ग | क वर्ग | च वर्ग | ट वर्ग | त वर्ग | प वर्ग | य-व वर्ग | श-ह वर्ग | संयुक्त वर्ग (क्ष, त्र, ज्ञ) के शब्द] जैसे-
- ज्ञ: [ च+(अँ से अः वर्ग | क वर्ग | च वर्ग | ट वर्ग | त वर्ग | प वर्ग | य-व वर्ग | श-ह वर्ग | संयुक्त वर्ग (क्ष, त्र, ज्ञ) के शब्द] जैसे-
महर्षि मेँहीँ शब्दकोश - मुख्य सूची
1. महर्षि मेँहीँ शब्दकोश - मुख्य सूची
- अँ से अः वर्ग | क वर्ग | च वर्ग
- ट वर्ग | त वर्ग | प वर्ग
- य-व वर्ग | श-ह वर्ग | संयुक्त वर्ग (क्ष, त्र, ज्ञ)
2. अँ-अः वर्ग (Swar Varg)
- अ: [ॐ - अखरना], [अखाड़ा - अतुल], [अतृप्तिदायक - अनन्य दृष्टि ], [ अनुभव ज्ञान - अपान वायु ], [ अपार - अमित तोष ], [अमित विलाशी - अवसान ], [ अवस्था - अहोरात्र ]
- आ: [आँकना - आदरणीय ], [आदर्श - आलोक ], [आलोचना - आह्वान ],
- इ: [इक्ष्वाकु - इहलोक ]
- ई: [ ईक्षण - ईस्टर्न स्टार ],
- उ: [उक्त - उपसंहार], [ उपस्त - उष्ण]
- ऊ: [ ऊत - ऊर्धरेता ]
- ऋ: [ ऋग्वेद - ऋष्यमूक ]
- ए: [ एक ओम् सतनाम - एहसानमंद ]
- ऐ: [ ऐकांतिक - ऐहिक ]
- ओ: [ ओंकार - ओर ]
- औ: [ औंघी - औषधि ]
3. क-वर्ग (Ka Varg)
- क: [कंकण - कल्पना-परम्परा ], [कल्पविटप - कुन], [कुफ्र - क्लेश],
- ख: [खंडन - ख्याल]
- ग: [गंगा - गूढता ], [गूढ़ रहस्य - ग्लानि ]
- घ: [घट - घ्राण]
4. च-वर्ग (Cha Varg)
- च: [च - चेतना], [चेतना - चौदह विद्याएँ ]
- छ: [छंग - छूतरा ]
- ज: [जँचना - जिनहार], [जिन्दगी - जौहरी ], [ ज्येष्ठ - ज्योतिर्विंदु ]
- झ: [ झंझट - झूमर ]
- ट: [ टंकोर - टेलिपैथी ]
- ठ: [ ठाकुरसुहाती - ठाकुरबाड़ी ]
- ड: [डगर - डीम ]
- ढ: [ ढहना - ढोंगी ]
- त: [तंत्र - तामस तप], [तामस त्याग - त्वचा]
- थ: [थकावट - यूपी ]
- द: [दंड - दीनबंधु], [दीनापन्न - विद्य-विद्या ], [ देव शरीर - द्वैतावस्था ]
- ध: [धंधा - ध्वन्यात्मक शब्द ]
- न: [न - नासिका], [ नासिकाग्र - निरालंब], [ निराश - निसिचर ], [ निशित - न्यून ],
7. प-वर्ग (Pa Varg)
- प: [पँचरंगी - परमपुरुष ], [परम प्रकांड पिंड - परमाकाश], [परमाक्षर - परोपकार], [ परोपकारार्थ - पुट ], [ पुण्य - प्रकाश डालना ], [ प्रकाशक - प्रबल ], [ प्रबलता - प्राप्त्यर्थ ], [ प्राप्य - प्राविट ]
- फ: [फंदा- फ्लेटरर ]
- ब: [बंक - विगूचना], [ बिधुरना - ब्रह्मवाद], [ ब्रह्मवादी - ब्राह्मी स्थिति ]
- भ: [ भंजन - भिन्नत्व ], [ भिन्न-भिन्न - भ्रूमध्य ]
- म: [ मँगता - मनोनग्रह ], [ मनोनीत - मान], [ मान करना - मुकुंद ], [ मुक्त - मेड्युला ], [ मेधा - म्यूजिक ऑफ द स्पेयर्स ]
8. य-व वर्ग (Ya Varg)
- य: [यंत्र - योगाभ्यास-साधन ], [ योगाभ्यास-साध्य - यौगिक होम ]
- र: [रंक - रारी ], [ रास्ता - रौशनी ]
- ल: [ लँगड़ा प्रत्याहार - लौलीन ]
- व: [ वंग - वास्तविक ], [ वाहे गुरु - विभक्ति ], [ विभाग - विसर्ग ], [ विस्तार - व्यष्टि प्राण ], [ व्यसन - व्हीलचेयर ]
9. श-ह वर्ग (Sa Varg)
- श: [ शंकर - शास्त्रीय कर्म ], [ शास्त्रीय विधि - श्याम सुंदर ], [ श्रद्धा - श्रौत कर्म ], [ श्लोक - श्वेत-श्याम ]
- ष: [ षट् कर्म - षोडसी ]
- स: [ संकलित - सकल ], [ सकल सुखदायक - सनातन ], [ सनातन अंश - संप्रति ], [ संप्रत्यय - सहचर ], [ सहज - सर भक्ति ], [ सार गर्वित - सुमध्य ], [ सुमन - स्थायी ], [ स्थावर प्राणी - स्वाद ], [ स्वाद चक्र - स्वाहा ]
- ह: [हठयोग], [हंस - हौआ ]
10. संयुक्त वर्ग (Sanyukt Varg)
- क्ष: [क्षण - क्षोभित ]
- त्र: [त्राटक - त्रैत]
- ज्ञ: [ज्ञात - ज्ञ्येय वस्तु ]
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जय गुरु महाराज🙏🙏
Reviewed by सत्संग ध्यान
on
7:55:00 am
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