सत्संग ध्यान समाचार

सत्संग न्यूज़
समाचार लोड हो रहे हैं...
ध्यान न्यूज
जानकारी लोड हो रही है...

Ad1

MMS महर्षि मेँहीँ-शब्दकोश: आध्यात्मिक साधकों और संतमत प्रेमियों के लिए एक अनमोल उपहार

महर्षि मेँहीँ-शब्दकोशआध्यात्मिक साधकों और संतमत प्रेमियों के लिए एक अनमोल उपहार

​संतमत के महान विभूति सद्गुरु महर्षि मेँहीँ परमहंस जी महाराज का साहित्य ज्ञान का वह अगाध सागर है, जिसे समझना हर जिज्ञासु के लिए परम आवश्यक है। उनकी वाणी और लेखों में प्रयुक्त गूढ़ आध्यात्मिक शब्दों को सरल बनाने के लिए लेखक छोटेलाल दास ने एक भगीरथ प्रयास किया है— "महर्षि मेँहीँ-शब्दकोश"

महर्षि मेँहीँ-शब्धकोश पुस्तक का मुख्य पृष्ठ - लेखक छोटेलाल दास।
महर्षि मेँहीँ-शब्धकोश


महर्षि मेँहीँ शब्दकोश

0 / 0


क्यों खास है यह शब्दकोश?

​अक्सर आध्यात्मिक ग्रंथों को पढ़ते समय हमारे सामने ऐसे शब्द आते हैं जिनका अर्थ सामान्य शब्दकोशों में नहीं मिलता। यह पुस्तक विशेष रूप से महर्षि मेँहीँ-साहित्य से चुने गए 6,621 शब्दों का संग्रह है। इस ग्रंथ की रचना में लगभग 12 वर्षों का कठिन परिश्रम लगा है, जो इसकी प्रमाणिकता को दर्शाता है।

पुस्तक की मुख्य विशेषताएँ 

  • विस्तृत शब्द संग्रह: इसमें संस्कृत, हिंदी, अरबी, फारसी और अंग्रेजी के उन शब्दों को शामिल किया गया है जो आध्यात्मिक ग्रंथों में अक्सर उपयोग होते हैं।
  • व्याकरणिक परिचय: प्रत्येक शब्द के साथ उसका व्याकरण (जैसे- संज्ञा, विशेषण, क्रिया) भी दिया गया है ताकि पाठक शब्द के सही संदर्भ को समझ सकें।
  • सरल व्याख्या: गूढ़ दार्शनिक शब्दों को इतनी सहज भाषा में समझाया गया है कि एक सामान्य पाठक भी उसे आसानी से आत्मसात कर सके।
  • लेखक का समर्पण: लेखक छोटेलाल दास जी, जो स्वयं महर्षि मेँहीँ के शिष्य रहे हैं, उन्होंने अपनी साधना और गुरु-सेवा के अनुभव को इस पुस्तक में पिरोया है।

आध्यात्मिक ज्ञान का आधार

​इस शब्दकोश के अंत में महर्षि मेँहीँ परमहंस जी का एक बहुत ही सुंदर संदेश उद्धृत है: "मनुष्य कहते हैं विचारवान् को।" वे समझाते हैं कि पशु और पक्षी भी जीवन का आनंद लेते हैं, लेकिन मनुष्य की श्रेष्ठता उसके विचारवान होने और इंद्रियों पर काबू पाने में है। यह शब्दकोश हमें उसी वैचारिक गहराई तक पहुँचने में मदद करता है।


निष्कर्ष

​यदि आप संतमत के साहित्य का गहराई से अध्ययन करना चाहते हैं या गुरु महाराज के प्रवचनों का सही अर्थ समझना चाहते हैं, तो महर्षि मेँहीँ-शब्दकोश आपके संग्रह में जरूर होनी चाहिए। यह केवल एक शब्दकोश नहीं, बल्कि आध्यात्मिक यात्रा को सुगम बनाने वाली एक मार्गदर्शिका है। आइये इस शब्दकोश के कुछ मुख्य पृष्ठों का दर्शन करें- 


महर्षि मेँहीँ-शब्धकोश के आंतरिक पेज  1
महर्षि मेँहीँ-शब्धकोश 1

महर्षि मेँहीँ-शब्धकोश के आंतरिक पेज  2
महर्षि मेँहीँ-शब्धकोश 2

महर्षि मेँहीँ-शब्धकोश के आंतरिक पेज  3
महर्षि मेँहीँ-शब्धकोश 3

महर्षि मेँहीँ-शब्धकोश के आंतरिक पेज  4, महर्षि मेँहीँ-शब्धकोश के संकेत चिन्हों और व्याकरण का विवरण।
महर्षि मेँहीँ-शब्धकोश 4

महर्षि मेँहीँ-शब्धकोश के आंतरिक पेज  5
महर्षि मेँहीँ-शब्धकोश 5

महर्षि मेँहीँ-शब्धकोश के आंतरिक पेज  6
महर्षि मेँहीँ-शब्धकोश 6

महर्षि मेँहीँ-शब्धकोश के लास्ट सीन कवर पेज
महर्षि मेँहीँ-शब्धकोश लास्ट सीन


     'महर्षि मेँहीँ-शब्धकोशपुस्तक के बारे में इतनी अच्छी जानकारी के बाद आपके मन में अवश्य विचार आ रहा होगा कि यह पुस्तक हमारे पास अवश्य होना चाहिए। इसके लिए आप 'सत्संग ध्यान स्टोर' से इसे ऑनलाइन मंगा सकते हैं और महर्षि मेँहीँ आश्रम, कुप्पाघाट से भी इसे ऑफलाइन में खरीद सकते हैं। आपकी सुविधा के लिए 'सत्संग ध्यान स्टोर' का लिंक नीचे दे रहे हैं-


 'महर्षि मेँहीँ-शब्दकोश' पुस्तक को आप @satsangdhyanstore@amazon@instamojo की निम्नलिखित  वेवसाइड से अभी ऑनलाइन खरीद सकते हैं-


सुन्न


LS61 इस पुस्तक के सामान्य संस्करण के लिए- न्यूनतम सहयोग राशि- ₹ 150.00/- + शिपिंग चार्ज


शब्द कोश९
सत्संग ध्यान स्टोर पर 20%छूट



सुन्न


प्रभु प्रेमियों  ! इस पुस्तक के बारे में इतनी अच्छी जानकारी प्राप्त करने के बाद हमें विश्वास है कि आप इस पुस्तक को अवश्य खरीद कर आपने मोक्ष मार्ग के अनेक कठिनाईयों को दूर करने वाला एक सबल सहायक प्राप्त करेंगे. इस बात की जानकारी अपने इष्ट मित्रों को भी दे दें, जिससे वे भी इससे लाभ उठा सकें और आप इस ब्लॉग वेबसाइट को अवश्य सब्सक्राइब करेंजिससे आपको आने वाले पोस्ट की सूचना निशुल्क मिलती रहे और आप मोक्ष मार्ग पर होने वाले विभिन्न तरह के परेशानियों को दूर करने में एक और सहायक प्राप्त कर सके. नीचे के वीडियो  में इस पुस्तक के बारे में और कुछ जानकारी दी गई है . उसे भी अवश्य देख लें. फिर मिलते हैं दूसरे प्रसंग के दूसरे पोस्ट में . जय गुरु महाराज





महर्षि मेँहीँ शब्दकोश की सूची देखना

     प्रभु प्रेमियों ! महर्षि मेँहीँ शब्दकोश की विषय सूची को देखना एक बहुत ही गंभीर बात है। इसे सरल भाषा में जब तक नहीं समझ लेंगे, तब तक सर्वसाधारण को इस विषय में जानकारी नहीं हो सकता है, कि कहां क्या है? किसी भी शब्दकोश में  शब्दों को लिखने का क्रम निम्नलिखित प्रकार से होता है। इसी प्रकार से आपको इस विषय सूची में भी अपनी इच्छित शब्दों को ढूंढना चाहिए। समझने के लिए समझ लें कि सबसे पहले चंदबिंदु वाले शब्द, फिर अनुसार वाले शब्द फिर शुरू वाले शब्द और वाद  पहले शब्द में आने वाले वर्णमाला के हिसाब से आगे के शब्दों को रखा जाता है। इसी कर्म में शब्दकोश के शब्दों को सजाया जाता है।  नीचे के उदाहरण को देखकर के समझे कि आपका शब्द किस जगह मिल सकता है।  

1. महर्षि मेँहीँ शब्दकोश की विषय सूची को समझना आवश्यक है ताकि सर्वसाधारण को जानकारी मिल सके।

2. शब्दकोश में शब्दों का क्रम:  चंदबिंदु, अनुसार, शुरू के शब्द, और वाद के शब्दों के आधार पर होता है।

3. शब्दों को वर्णमाला के हिसाब से क्रमबद्ध किया जाता है।

स्वर वर्ण (Vowels)

  • : [ अँ+(ॐ से अ वर्ग | क वर्ग | च वर्ग | ​ट वर्ग | त वर्ग | प वर्ग | ​य-व वर्ग | श-ह वर्ग | संयुक्त वर्ग (क्ष, त्र, ज्ञ) के शब्द]  जैसे-  [ॐ-अंशी], [अंग-अंगीकरण], [अंजन-अंडरस्टैण्ड], [अंत - अंधेरी कोठरी], [ अंबर - अंशी  ]
  • आ: [आ+(अँ से अः वर्ग | क वर्ग | च वर्ग | ​ट वर्ग | त वर्ग | प वर्ग | ​य-व वर्ग | श-ह वर्ग | संयुक्त वर्ग (क्ष, त्र, ज्ञ) के शब्द]  जैसे- [ आँकना - आदरणीय ]
  • इ: [ इ+(अँ से अः वर्ग | क वर्ग | च वर्ग | ​ट वर्ग | त वर्ग | प वर्ग | ​य-व वर्ग | श-ह वर्ग | संयुक्त वर्ग (क्ष, त्र, ज्ञ) के शब्द]  जैसे- 
  • ई: [ ई+(अँ से अः वर्ग | क वर्ग | च वर्ग | ​ट वर्ग | त वर्ग | प वर्ग | ​य-व वर्ग | श-ह वर्ग | संयुक्त वर्ग (क्ष, त्र, ज्ञ) के शब्द]  जैसे- 
  • उ: [ उ+(अँ से अः वर्ग | क वर्ग | च वर्ग | ​ट वर्ग | त वर्ग | प वर्ग | ​य-व वर्ग | श-ह वर्ग | संयुक्त वर्ग (क्ष, त्र, ज्ञ) के शब्द]  जैसे- 
  • ऊ: [ ऊ+(अँ से अः वर्ग | क वर्ग | च वर्ग | ​ट वर्ग | त वर्ग | प वर्ग | ​य-व वर्ग | श-ह वर्ग | संयुक्त वर्ग (क्ष, त्र, ज्ञ) के शब्द]  जैसे- 
  • ए: [ ए+(अँ से अः वर्ग | क वर्ग | च वर्ग | ​ट वर्ग | त वर्ग | प वर्ग | ​य-व वर्ग | श-ह वर्ग | संयुक्त वर्ग (क्ष, त्र, ज्ञ) के शब्द]  जैसे- 
  • ऐ: [ ऐ+(अँ से अः वर्ग | क वर्ग | च वर्ग | ​ट वर्ग | त वर्ग | प वर्ग | ​य-व वर्ग | श-ह वर्ग | संयुक्त वर्ग (क्ष, त्र, ज्ञ) के शब्द]  जैसे- 
  • ओ: [ओ+(अँ से अः वर्ग | क वर्ग | च वर्ग | ​ट वर्ग | त वर्ग | प वर्ग | ​य-व वर्ग | श-ह वर्ग | संयुक्त वर्ग (क्ष, त्र, ज्ञ) के शब्द]  जैसे- 
  • औ: [ औ+(अँ से अः वर्ग | क वर्ग | च वर्ग | ​ट वर्ग | त वर्ग | प वर्ग | ​य-व वर्ग | श-ह वर्ग | संयुक्त वर्ग (क्ष, त्र, ज्ञ) के शब्द]  जैसे- 
  • अ: [अ:+(अँ से अः वर्ग | क वर्ग | च वर्ग | ​ट वर्ग | त वर्ग | प वर्ग | ​य-व वर्ग | श-ह वर्ग | संयुक्त वर्ग (क्ष, त्र, ज्ञ) के शब्द]  जैसे- 

व्यंजन वर्ण (Consonants)

  • क: [ क+(अँ से अः वर्ग | क वर्ग | च वर्ग | ​ट वर्ग | त वर्ग | प वर्ग | ​य-व वर्ग | श-ह वर्ग | संयुक्त वर्ग (क्ष, त्र, ज्ञ) के शब्द]  जैसे- 
  • ख: [ ख+(अँ से अः वर्ग | क वर्ग | च वर्ग | ​ट वर्ग | त वर्ग | प वर्ग | ​य-व वर्ग | श-ह वर्ग | संयुक्त वर्ग (क्ष, त्र, ज्ञ) के शब्द]  जैसे- 
  • ग: [ ग+(अँ से अः वर्ग | क वर्ग | च वर्ग | ​ट वर्ग | त वर्ग | प वर्ग | ​य-व वर्ग | श-ह वर्ग | संयुक्त वर्ग (क्ष, त्र, ज्ञ) के शब्द]  जैसे- 
  • घ: [ घ+(अँ से अः वर्ग | क वर्ग | च वर्ग | ​ट वर्ग | त वर्ग | प वर्ग | ​य-व वर्ग | श-ह वर्ग | संयुक्त वर्ग (क्ष, त्र, ज्ञ) के शब्द]  जैसे- 
  • च: [ च+(अँ से अः वर्ग | क वर्ग | च वर्ग | ​ट वर्ग | त वर्ग | प वर्ग | ​य-व वर्ग | श-ह वर्ग | संयुक्त वर्ग (क्ष, त्र, ज्ञ) के शब्द]  जैसे- 
  • छ: [ छ+(अँ से अः वर्ग | क वर्ग | च वर्ग | ​ट वर्ग | त वर्ग | प वर्ग | ​य-व वर्ग | श-ह वर्ग | संयुक्त वर्ग (क्ष, त्र, ज्ञ) के शब्द]  जैसे- 
  • ज: [ ज+(अँ से अः वर्ग | क वर्ग | च वर्ग | ​ट वर्ग | त वर्ग | प वर्ग | ​य-व वर्ग | श-ह वर्ग | संयुक्त वर्ग (क्ष, त्र, ज्ञ) के शब्द]  जैसे- 
  • झ: [ झ+(अँ से अः वर्ग | क वर्ग | च वर्ग | ​ट वर्ग | त वर्ग | प वर्ग | ​य-व वर्ग | श-ह वर्ग | संयुक्त वर्ग (क्ष, त्र, ज्ञ) के शब्द]  जैसे- 
  • त: [ त+(अँ से अः वर्ग | क वर्ग | च वर्ग | ​ट वर्ग | त वर्ग | प वर्ग | ​य-व वर्ग | श-ह वर्ग | संयुक्त वर्ग (क्ष, त्र, ज्ञ) के शब्द]  जैसे- 
  • थ:  [ थ+(अँ से अः वर्ग | क वर्ग | च वर्ग | ​ट वर्ग | त वर्ग | प वर्ग | ​य-व वर्ग | श-ह वर्ग | संयुक्त वर्ग (क्ष, त्र, ज्ञ) के शब्द]  जैसे- 
  • द: [ द+(अँ से अः वर्ग | क वर्ग | च वर्ग | ​ट वर्ग | त वर्ग | प वर्ग | ​य-व वर्ग | श-ह वर्ग | संयुक्त वर्ग (क्ष, त्र, ज्ञ) के शब्द]  जैसे- 
  • ध: [ ध+(अँ से अः वर्ग | क वर्ग | च वर्ग | ​ट वर्ग | त वर्ग | प वर्ग | ​य-व वर्ग | श-ह वर्ग | संयुक्त वर्ग (क्ष, त्र, ज्ञ) के शब्द]  जैसे- 
  • न: [ न+(अँ से अः वर्ग | क वर्ग | च वर्ग | ​ट वर्ग | त वर्ग | प वर्ग | ​य-व वर्ग | श-ह वर्ग | संयुक्त वर्ग (क्ष, त्र, ज्ञ) के शब्द]  जैसे- 
  • प: [ प+(अँ से अः वर्ग | क वर्ग | च वर्ग | ​ट वर्ग | त वर्ग | प वर्ग | ​य-व वर्ग | श-ह वर्ग | संयुक्त वर्ग (क्ष, त्र, ज्ञ) के शब्द]  जैसे- 
  • फ: [ फ+(अँ से अः वर्ग | क वर्ग | च वर्ग | ​ट वर्ग | त वर्ग | प वर्ग | ​य-व वर्ग | श-ह वर्ग | संयुक्त वर्ग (क्ष, त्र, ज्ञ) के शब्द]  जैसे- 
  • ब: [ च+(अँ से अः वर्ग | क वर्ग | च वर्ग | ​ट वर्ग | त वर्ग | प वर्ग | ​य-व वर्ग | श-ह वर्ग | संयुक्त वर्ग (क्ष, त्र, ज्ञ) के शब्द]  जैसे- 
  • भ: [ भ+(अँ से अः वर्ग | क वर्ग | च वर्ग | ​ट वर्ग | त वर्ग | प वर्ग | ​य-व वर्ग | श-ह वर्ग | संयुक्त वर्ग (क्ष, त्र, ज्ञ) के शब्द]  जैसे- 
  • म: [ म+(अँ से अः वर्ग | क वर्ग | च वर्ग | ​ट वर्ग | त वर्ग | प वर्ग | ​य-व वर्ग | श-ह वर्ग | संयुक्त वर्ग (क्ष, त्र, ज्ञ) के शब्द]  जैसे- 
  • य: [ य+(अँ से अः वर्ग | क वर्ग | च वर्ग | ​ट वर्ग | त वर्ग | प वर्ग | ​य-व वर्ग | श-ह वर्ग | संयुक्त वर्ग (क्ष, त्र, ज्ञ) के शब्द]  जैसे- 
  • र: [ र+(अँ से अः वर्ग | क वर्ग | च वर्ग | ​ट वर्ग | त वर्ग | प वर्ग | ​य-व वर्ग | श-ह वर्ग | संयुक्त वर्ग (क्ष, त्र, ज्ञ) के शब्द]  जैसे- 
  • ल: [ ल+(अँ से अः वर्ग | क वर्ग | च वर्ग | ​ट वर्ग | त वर्ग | प वर्ग | ​य-व वर्ग | श-ह वर्ग | संयुक्त वर्ग (क्ष, त्र, ज्ञ) के शब्द]  जैसे- 
  • व: [ व+(अँ से अः वर्ग | क वर्ग | च वर्ग | ​ट वर्ग | त वर्ग | प वर्ग | ​य-व वर्ग | श-ह वर्ग | संयुक्त वर्ग (क्ष, त्र, ज्ञ) के शब्द]  जैसे- 
  • श: [ श+(अँ से अः वर्ग | क वर्ग | च वर्ग | ​ट वर्ग | त वर्ग | प वर्ग | ​य-व वर्ग | श-ह वर्ग | संयुक्त वर्ग (क्ष, त्र, ज्ञ) के शब्द]  जैसे- 
  • ष: [ ष+(अँ से अः वर्ग | क वर्ग | च वर्ग | ​ट वर्ग | त वर्ग | प वर्ग | ​य-व वर्ग | श-ह वर्ग | संयुक्त वर्ग (क्ष, त्र, ज्ञ) के शब्द]  जैसे- 
  • स: [ स+(अँ से अः वर्ग | क वर्ग | च वर्ग | ​ट वर्ग | त वर्ग | प वर्ग | ​य-व वर्ग | श-ह वर्ग | संयुक्त वर्ग (क्ष, त्र, ज्ञ) के शब्द]  जैसे- 
  • ह: [ ह+(अँ से अः वर्ग | क वर्ग | च वर्ग | ​ट वर्ग | त वर्ग | प वर्ग | ​य-व वर्ग | श-ह वर्ग | संयुक्त वर्ग (क्ष, त्र, ज्ञ) के शब्द]  जैसे- 
  • क्ष: [ च+(अँ से अः वर्ग | क वर्ग | च वर्ग | ​ट वर्ग | त वर्ग | प वर्ग | ​य-व वर्ग | श-ह वर्ग | संयुक्त वर्ग (क्ष, त्र, ज्ञ) के शब्द]  जैसे- 
  • त्र: [ च+(अँ से अः वर्ग | क वर्ग | च वर्ग | ​ट वर्ग | त वर्ग | प वर्ग | ​य-व वर्ग | श-ह वर्ग | संयुक्त वर्ग (क्ष, त्र, ज्ञ) के शब्द]  जैसे- 
  • ज्ञ: [ च+(अँ से अः वर्ग | क वर्ग | च वर्ग | ​ट वर्ग | त वर्ग | प वर्ग | ​य-व वर्ग | श-ह वर्ग | संयुक्त वर्ग (क्ष, त्र, ज्ञ) के शब्द]  जैसे- 
🙏🍏🍎🍊🍊🍏🍎





 महर्षि मेँहीँ शब्दकोश - मुख्य सूची


1. महर्षि मेँहीँ शब्दकोश - मुख्य सूची

  • अँ से अः वर्ग | क वर्ग | च वर्ग
  • ​ट वर्ग | त वर्ग | प वर्ग
  • ​य-व वर्ग | श-ह वर्ग | संयुक्त वर्ग (क्ष, त्र, ज्ञ)

2. अँ-अः वर्ग (Swar Varg)

  • अ: [ॐ - अखरना], [अखाड़ा - अतुल], [अतृप्तिदायक - अनन्य दृष्टि ], [ अनुभव ज्ञान - अपान वायु ], [ अपार -            अमित तोष ], [अमित विलाशी - अवसान ],  [ अवस्था - अहोरात्र ]
  • आ: [आँकना - आदरणीय ], [आदर्श - आलोक ], [आलोचना - आह्वान ], 
  • इ:  [इक्ष्वाकु - इहलोक ]
  • ई: [ ईक्षण - ईस्टर्न स्टार  ], 
  • उ: [उक्त - उपसंहार], [ उपस्त - उष्ण] 
  • ऊ: [ ऊत - ऊर्धरेता ] 
  • ऋ: [ ऋग्वेद - ऋष्यमूक ]
  • ए: [ एक ओम् सतनाम - एहसानमंद ] 
  • ऐ: [ ऐकांतिक - ऐहिक ]
  • : [ ओंकार - ओर ]
  • औ: [ औंघी - औषधि ]

3. क-वर्ग (Ka Varg)

  • क: [कंकण - कल्पना-परम्परा ], [कल्पविटप - कुन], [कुफ्र - क्लेश], 
  • ख: [खंडन - ख्याल] 
  • ग: [गंगा - गूढता ], [गूढ़ रहस्य - ग्लानि ] 
  • घ: [घट - घ्राण]

4. च-वर्ग (Cha Varg)

  • च: [च - चेतना], [चेतना - चौदह विद्याएँ ] 
  • छ: [छंग - छूतरा ]
  • ज: [जँचना - जिनहार], [जिन्दगी - जौहरी ], [ ज्येष्ठ - ज्योतिर्विंदु ] 
  • झ:   [ झंझट - झूमर ]  

5. ट-वर्ग (Ta Varg)
  • ट:  [ टंकोर - टेलिपैथी ] 
  • ठ: [ ठाकुरसुहाती - ठाकुरबाड़ी ] 
  • ड: [डगर - डीम ] 
  • ढ:   [ ढहना - ढोंगी ]

6. त-वर्ग (Ta Varg)
  • त: [तंत्र - तामस तप], [तामस त्याग - त्वचा]
  • थ: [थकावट - यूपी ] 
  • द: [दंड - दीनबंधु], [दीनापन्न - विद्य-विद्या ], [ देव शरीर - द्वैतावस्था ]
  • ध: [धंधा - ध्वन्यात्मक शब्द ] 
  • न: [न - नासिका], [ नासिकाग्र - निरालंब],  [ निराश - निसिचर ], [ निशित - न्यून ], 

7. प-वर्ग (Pa Varg)

  • प: [पँचरंगी - परमपुरुष ], [परम प्रकांड पिंड - परमाकाश], [परमाक्षर - परोपकार], [ परोपकारार्थ - पुट ], [ पुण्य - प्रकाश डालना ], [ प्रकाशक - प्रबल ], [ प्रबलता - प्राप्त्यर्थ ], [ प्राप्य - प्राविट ] 
  • फ:  [फंदा- फ्लेटरर ] 
  • ब: [बंक - विगूचना], [ बिधुरना - ब्रह्मवाद], [ ब्रह्मवादी - ब्राह्मी स्थिति ]
  • भ: [ भंजन - भिन्नत्व ], [ भिन्न-भिन्न  - भ्रूमध्य ]     
  • म: [ मँगता - मनोनग्रह ], [ मनोनीत - मान], [ मान करना - मुकुंद ], [ मुक्त - मेड्युला ], [ मेधा - म्यूजिक ऑफ द स्पेयर्स ] 

    8. य-व वर्ग (Ya Varg)

    • य: [यंत्र - योगाभ्यास-साधन ], [ योगाभ्यास-साध्य - यौगिक होम ] 
    • र: [रंक - रारी ], [ रास्ता - रौशनी ] 
    • ल: [ लँगड़ा प्रत्याहार - लौलीन  ] 
    • ​व: [ वंग - वास्तविक ], [ वाहे गुरु - विभक्ति ], [ विभाग - विसर्ग ], [ विस्तार - व्यष्टि प्राण ],  [ व्यसन - व्हीलचेयर ]   

    9. श-ह वर्ग (Sa Varg)

    • श: [ शंकर - शास्त्रीय कर्म ], [ शास्त्रीय विधि - श्याम सुंदर  ],  [ श्रद्धा - श्रौत कर्म ], [ श्लोक - श्वेत-श्याम ]    
    • ​ष: [ षट् कर्म - षोडसी ] 
    • ​स: [ संकलित - सकल ], [ सकल सुखदायक - सनातन ], [ सनातन अंश - संप्रति ], [ संप्रत्यय - सहचर ], [ सहज - सर भक्ति ], [ सार गर्वित - सुमध्य ],  [ सुमन - स्थायी ],  [ स्थावर प्राणी - स्वाद ],  [ स्वाद चक्र - स्वाहा ]
    • ​ह: [हठयोग], [हंस - हौआ ] 

    10. संयुक्त वर्ग (Sanyukt Varg)

    • क्ष: [क्षण - क्षोभित ] 
    • त्र: [त्राटक - त्रैत]
    • ज्ञ: [ज्ञात - ज्ञ्येय वस्तु ] 

    🙏🍏🍊🍐🍎🍎



         प्रभु प्रेमियों ! पूज्यपाद स्वामी लालदास साहित्य सीरीज में आपने 'महर्षि मेँहीँ-शब्दकोष ' नामक पुस्तक के बारे में जानकारी प्राप्त की. आशा करता हूं कि आप इसके सदुपयोग से इससे से समुचित लाभ उठाएंगे. इतनी जानकारी के बाद भी अगर आपके मन में किसी प्रकार  का कोई शंका या कोई प्रश्न है, तो हमें कमेंट करें। इस लेख के बारे में अपने इष्ट मित्रों को भी बता दें, जिससे वे भी इससे लाभ उठा सकें। सत्संग ध्यान ब्लॉग का सदस्य बने। इससे आपको आने वाले हर पोस्ट की सूचना नि:शुल्क आपके ईमेल पर मिलती रहेगी। ऐसा विश्वास है । 






    सत्संग एवं ध्यान कार्यक्रमों के प्रचार-प्रसार हेतु विनम्र निवेदन

    📚 सत्संग ध्यान स्टोर सामग्री-सूची

         प्रभु प्रेमियों ! सद्गुरु महर्षि मेँहीँ सहित संतों की सभी पुस्तकें, चित्र, लॉकेट, कलम, आसनी एवं सत्संग ध्यान से संबंधित अन्य सभी सामग्री "सत्संग ध्यान स्टोर" पर ऑनलाइन एवं ऑफलाइन उपलब्ध है। इन सामग्रियों को खरीद कर आप मोक्ष-पर्यंत चलने वाले ध्यानाभ्यास कार्यक्रम में सहयोग करने का पुण्य प्राप्त करेंगे।  सद्गुरु महर्षि मेँहीँ परमहंस जी महाराज की पुस्तकें मुफ्त में पाने के लिए      👉  यहाँ दबाएँ। 

    🙏 हमारे आधिकारिक व्हाट्सएप चैनलों से जुड़ें 🙏

    📰 ताज़ा सत्संग समाचारों के लिए:     👉 जुड़ें: सत्संग ध्यान न्यूज़   

    🧘‍♂️ सामूहिक 

    ध्यान अभ्यास के लिए:      👉जुड़ें: मोक्षपर्यंत ध्यानाभ्यास   

    *चैनल खोलने के बाद ऊपर 'Follow' और 'घंटी' 🔔 का बटन जरूर दबाएं।

    जय गुरु महाराज🙏🙏

    MMS महर्षि मेँहीँ-शब्दकोश: आध्यात्मिक साधकों और संतमत प्रेमियों के लिए एक अनमोल उपहार MMS महर्षि मेँहीँ-शब्दकोश: आध्यात्मिक साधकों और संतमत प्रेमियों के लिए एक अनमोल उपहार Reviewed by सत्संग ध्यान on 7:55:00 am Rating: 5

    कोई टिप्पणी नहीं:

    प्रभु प्रेमियों ! कृपया वही टिप्पणी करें जो आप किसी संतवाणी से प्रूफ कर सके या समझ बनी हो किसी ऐसी बानी का उपयोग न करें जिनसे आपका भी समय खराब हो और हमारा भी जय गुरु महाराज

    Ad 2

    Blogger द्वारा संचालित.
    बंद करें (X)
    बंद करें (X)