8. साधु-महात्मा, संन्यासी का क्या कर्तव्य है?
प्यारे लोगो !
8. युद्ध भी करो और स्मरण भी करो। 'तन काम में मन राम में।' करम करै करता नहीं, दास कहावै सोय।' - कबीर साहब कर्म करते थे। उन्होंने अपने जीवन यापन के लिए किसी दूसरे पर भार नहीं दिया। 'थोड़ा बनिज बहुत है बाढ़ी उपजन लागे लाल मई।' संतोष उनको बहुत था। थोड़ा-सा काम करते थे, अपना जीवन-यापन जिससे हो। मतलब यह कि जो संन्यासी हो जाते हैं, उनका कर्तव्य हो जाता है कि वे संसार के पार को बतावें। संसार में सदा रहना नहीं है।
प्रभु प्रेमियों ! सद्गुरु महर्षि मेँहीँ परमहंसी महाराज का यह प्रवचन नालन्दा जिलान्तर्गत भगवान महावीर और भगवान बुद्ध के विहार स्थल राजगीर में ५८वाँ अखिल भारतीय संतमत सत्संग का विशेषाधिवेशन दिनांक २८.१०.१९६६ ई० के प्रातःकालीन सत्संग में हुआ था।जिसमें उन्होंने उपरोक्त बातें कही थी । महर्षि मेँहीँ सत्संग सुधा सागर के सभी प्रवचनों में कहाँ क्या है? किस प्रवचन में किस प्रश्न का उत्तर है? इसे संक्षिप्त रूप में जानने के लिए 👉यहाँ दवाएँ।
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| महर्षि मेँहीँ सत्संग-सुधा सागर |
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S245, 8. साधु-महात्मा, संन्यासी का क्या कर्तव्य है? What are the duties of a Sanyasi?
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