S209(ख) 3. ईश्वरीय खजाना प्राप्त करने का राज क्या है || खजाना प्राप्ति का राज || The secret to getting the treasure
3. ईश्वरीय खजाना प्राप्त करने का राज क्या है?
धर्मानुरागिनी प्यारी जनता !
लोगों का ऐसा ख्याल हो कि 'अगर हम अपने अंदर चलेंगे, तो हम संसार को कैसे पार कर सकते हैं? तो शरीर और संसार में बहुत संबंध है। शरीर जितने तत्त्वों से बना है, संसार भी उतने ही तत्त्वों से बना है। शरीर के जितने तल हैं, संसार के भी उतने तल हैं। शरीर के जिस तल पर जब हम रहते हैं, संसार के भी उसी तल पर तब हम रहते हैं। शरीर के जिस तल को जब हम छोड़ते हैं, संसार के भी उसी तल को तब हम छोड़ते हैं। इससे यह निर्णय हुआ कि यदि हम शरीर के सभी तलों को पार कर जाएँ, तो संसार के भी सभी तलों को पार कर जाएँगे। चाहे अनेक ब्रह्माण्ड हों, किंतु अंधकार, प्रकाश और शब्द; इनसे परे कुछ सृष्टि नहीं हो सकती। संतों ने शरीर के अंदर चलने कहा। शरीर के तलों को पार करो तो संसार के भी तलों को पार कर सकोगे।
प्रभु प्रेमियों ! सद्गुरु महर्षि मेँहीँ परमहंसी महाराज का यह प्रवचन मुरादाबाद स्थित श्रीसंतमत सत्संग मंदिर कानून गोयान मुहल्ले में दिनांक १२.४.१९६५ ई० को अपराह्नकालीन सत्संग में हुआ था। जिसमें उन्होंने उपरोक्त बातें कहा था।
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| महर्षि मेँहीँ सत्संग-सुधा सागर |
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