प्रभु प्रेमियों ! सद्गुरु महर्षि मेंहीं परमहंस जी महाराज के सानिध्य में रहने वाले संत पूज्यपाद संतसेवी जी महाराज की संक्षिप्त जीवनी एक आश्रम वासी ने लिखी है । उसी जीवनी को हम यहां प्रकाशित कर रहे हैं। यह कई भागों में होगा जिसका त्रितीय भाग यहां प्रकाशित किया जा रहा है। द्वितीय भाग का पाठ करने के लिए यहां दवाएं।
पूज्य पाद संतसेवी जी महाराज
पूज्यपाद संतसेवी जी महाराज एक परिचय
प्रभु प्रेमियों ! निम्नांकित चित्रों में आप पूज्य पाद संतसेवी जी महाराज के बारे में पढेंगे-
संतसेवी परिचय चित्र 9
संतसेवी परिचय चित्र 10
संतसेवी परिचय चित्र 11
संतसेवी परिचय चित्र 12
संतसेवी जी महाराज के विविध रूप
होता तो आपके लिए पूज्य पाद गुरु महाराज के हृदय में प्रेम कैसे उमरता।आप कैसे पहले ही मुलाकात में इनके प्रति आकर्षित हो गए । इसी प्रकार गुरु महाराज की सेवा भक्ति करते हुए 8 जून 1986 ईस्वी को सद्गुरु महर्षि मेंही परमहंस जी महाराज परीनिवृत हो गए। उनके बाद सर्वसम्मति से आप गुरु महाराज के सबसे वरिष्ठ शिष्य बनाये गये और संतमत का प्रचार-प्रसार करते हुए 4 जून 2007 ईस्वी को आप भी गुरु अपने पार्थिव शरीर का परित्याग कर इस मृत्युलोक को छोड़कर चले गए। क्योंकि इस बीच आपको गुरु महाराज का वियोग का दु:ख काफी होता था । श्री सतगुरु महाराज की जय। इति श्री।
प्रभु प्रेमियों ! पूज्य पाद संतसेवी जी महाराज के बारे में आप ने जाना कि ये कितने महान विभूति और जन्मजात साधु पुरुष थे। इतनी जानकारी के बाद भी अगर आपके मन में किसी प्रकार का शंका या कोई प्रश्न है, तो हमें कमेंट करें। इस लेख के बारे में अपने इष्ट मित्रों को भी बता दें, जिससे वे भी इससे लाभ उठा सकें। सत्संग ध्यान ब्लॉग का सदस्य बने। इससे आपको आने वाले पोस्ट की सूचना नि:शुल्क मिलती रहेगी। इस पद का पाठ किया गया है उसे सुननेे के लिए निम्नलिखित वीडियो देखें।
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3 पूज्य पाद संतसेवी जी महाराज का परिचय। Brief introduction of Pujya Pad Santsevi Ji Maharaj
Reviewed by सत्संग ध्यान
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7:09:00 pm
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प्रभु प्रेमियों ! कृपया वही टिप्पणी करें जो आप किसी संतवाणी से प्रूफ कर सके या समझ बनी हो किसी ऐसी बानी का उपयोग न करें जिनसे आपका भी समय खराब हो और हमारा भी जय गुरु महाराज
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प्रभु प्रेमियों ! कृपया वही टिप्पणी करें जो आप किसी संतवाणी से प्रूफ कर सके या समझ बनी हो किसी ऐसी बानी का उपयोग न करें जिनसे आपका भी समय खराब हो और हमारा भी जय गुरु महाराज