प्रभु प्रेमियों ! सत्संग ध्यान के इस प्रवचन सीरीज में आपका स्वागत है। आइए आज जानते हैं-संतमत सत्संग के महान प्रचारक सद्गुरु महर्षि मेंहीं परमहंस जी महाराज के भारती (हिंदी) प्रवचन संग्रह "महर्षि मेंहीं सत्संग सुधा सागर" के प्रवचन नंबर S130, वां (ख) में बताया गया है कि ईश्वर के सगुण और निर्गुण रूप के दर्शन के बिना भक्ति पूरा नहीं। इस प्रवचन के पहले भाग को पढ़ने के लिए यहां दबाएं। तो आइए गुरु महाराज का प्रवचन का पाठ करें-
![]() |
| प्रवचन चित्र 4 |
![]() |
| प्रवचन चित्र 5 |
प्रभु प्रेमियों ! गुरु महाराज के इस प्रवचन का पाठ करके आपलोगों ने जाना कि सगुण और निर्गुण रूप के दर्शन के बिना भक्ति पूरा नहीं । इतनी जानकारी के बाद भी अगर आपके मन में किसी प्रकार का शंका या कोई प्रश्न है, तो हमें कमेंट करें। इस प्रवचन के बारे में अपने इष्ट मित्रों को भी बता दें, जिससे वे भी लाभ उठा सकें। सत्संग ध्यान ब्लॉग का सदस्य बने। इससे आपको आने वाले प्रवचन या पोस्ट की सूचना नि:शुल्क मिलती रहेगी। इस प्रवचन के शेष भाग को पढ़ने के लिए
यहां दबाएं।
S130, (ख) ईश्वर के सगुण और निर्गुण रूप का दर्शन -महर्षि मेंहीं
Reviewed by सत्संग ध्यान
on
9:06:00 pm
Rating:
Reviewed by सत्संग ध्यान
on
9:06:00 pm
Rating:



कोई टिप्पणी नहीं:
प्रभु प्रेमियों ! कृपया वही टिप्पणी करें जो आप किसी संतवाणी से प्रूफ कर सके या समझ बनी हो किसी ऐसी बानी का उपयोग न करें जिनसे आपका भी समय खराब हो और हमारा भी जय गुरु महाराज