प्रभु प्रेमियों ! सत्संग ध्यान के इस प्रवचन सीरीज में आपका स्वागत है। आइए आज जानते हैं-संतमत सत्संग के महान प्रचारक सद्गुरु महर्षि मेंहीं परमहंस जी महाराज के हिंदी प्रवचन संग्रह "महर्षि मेंहीं सत्संग सुधा सागर" के प्रवचन नंबर S458, इसमें बताया गया है कि संतमत की साधना क्या है ? साधना को मानव जप से शुरू करके नादानुसंधान पर समाप्त किया जाता है। इन साधनाओं को बताने वाले संत और सद्गुरु होते हैं । जिनकी महिमा अपार है। इसलिए गुरु और संतों की महिमा के बारे में बताते हुए गुरु महाराज बिहार शब्द की उत्पत्ति के बारे में भी बताएं हैं। तो आइए इस प्रवचन को पूरे मन से सुने।
![]() |
| शांति संदेश कबर |
![]() |
| प्रवचन चित्र |
![]() |
| प्रवचन समाप्त |
प्रभु प्रेमियों ! गुरु महाराज के इस प्रवचन का पाठ करके आपलोगों ने जाना कि संतमत की साधना और संतों की महिमा व बिहार शब्द की उत्पत्ति के बारे में । इतनी जानकारी के बाद भी अगर आपके मन में किसी प्रकार का संका या कोई प्रश्न है, तो हमें कमेंट करें। इस प्रवचन के बारे में अपने इष्ट मित्रों को भी बता दें, जिससे वे भी लाभ उठा सकें। सत्संग ध्यान ब्लॉग का सदस्य बने। इससे आपको आने वाले प्रवचन या पोस्ट की सूचना नि:शुल्क मिलती रहेगी।
S458, संतमत की साधना और संतों की महिमा व बिहार -Maharshi Mehi
Reviewed by सत्संग ध्यान
on
4:08:00 pm
Rating:
Reviewed by सत्संग ध्यान
on
4:08:00 pm
Rating:



कोई टिप्पणी नहीं:
प्रभु प्रेमियों ! कृपया वही टिप्पणी करें जो आप किसी संतवाणी से प्रूफ कर सके या समझ बनी हो किसी ऐसी बानी का उपयोग न करें जिनसे आपका भी समय खराब हो और हमारा भी जय गुरु महाराज