प्रभु प्रेमियों ! सत्संग ध्यान के इस प्रवचन सीरीज में आपका स्वागत है। आइए आज जानते हैं-संतमत सत्संग के महान प्रचारक सद्गुरु महर्षि मेंहीं परमहंस जी महाराज के हिंदी प्रवचन संग्रह "महर्षि मेंहीं सत्संग सुधा सागर" के प्रवचन नंबर S232, इसमें बताया गया है कि सांसारिक और ईश्वरीय ज्ञान दोनों की आवश्यकता है । ज्ञान दो प्रकार के हैं- एक संसारिक दूसरा पारमार्थिक । पारमार्थिक ज्ञान में ईश्वर दर्शन और मोक्ष प्राप्ति के विषय में जानकारी होती है और सांसारिक ज्ञान में इस संसार में कैसे रहें, जिससे इस लोक में सुख से रह सके। संतमत का ज्ञान है संसार और परमार्थ दोनों में सुखी रहने का है। इसके लिए दोनों ज्ञान की अत्यंत आवश्यकता और तालमेल ज़रूरी है। इस बात की चर्चा इस प्रवचन में किया गया है।
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| प्रवचन चित्र एक |
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| प्रवचन चित्र दो |
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| प्रवचन समाप्त |
प्रभु प्रेमियों ! गुरु महाराज के इस प्रवचन का पाठ करके आपलोगों ने जाना कि सांसारिक और ईश्वरीय ज्ञान दोनों की आवश्यकता है । इतनी जानकारी के बाद भी अगर आपके मन में किसी प्रकार का संका या कोई प्रश्न है, तो हमें कमेंट करें। इस प्रवचन के बारे में अपने इष्ट मित्रों को भी बता दें, जिससे वे भी लाभ उठा सकें। सत्संग ध्यान ब्लॉग का सदस्य बने। इससे आपको आने वाले प्रवचन या पोस्ट की सूचना नि:शुल्क मिलती रहेगी।
S232, सांसारिक और ईश्वरीय ज्ञान दोनों की आवश्यकता -महर्षि मेंही प्रवचन
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