प्रभु प्रेमियों ! सत्संग ध्यान के इस प्रवचन सीरीज में आपका स्वागत है। आइए आज जानते हैं- संतमत सत्संग के महान प्रचारक सद्गुरु महर्षि मेंहीं परमहंस जी महाराज के भारती (हिंदी) प्रवचन संग्रह "महर्षि मेंहीं सत्संग सुधा सागर" के प्रवचन नंबर S320, इसमें बताया गया है कि परा प्रकृति,अपरा प्रकृति,क्षर पुरुष,अक्षर पुरुष व सत्संग क्या है। सुबह के सत्संग में ईश स्तुति में पाठ होता है- सब क्षेत्र क्षर अपरा परा पर ..... इसमें जो अपरा और परा प्रकृति का वर्णन हुआ है और क्षर, अक्षर पुरुष का वर्णन हुआ है यह क्या है, इसे समझाते हुए इस पर प्रकाश डाला गया है, इस प्रवचन में।
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| शांति संदेश |
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| प्रवचन चित्र |
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| प्रवचन समाप्त |
प्रभु प्रेमियों ! गुरु महाराज के इस प्रवचन का पाठ करके आपलोगों ने जाना कि परा प्रकृति,अपरा प्रकृति,क्षर पुरुष,अक्षर पुरुष व सत्संग क्या है। इतनी जानकारी के बाद भी अगर आपके मन में किसी प्रकार का संका या कोई प्रश्न है, तो हमें कमेंट करें। इस प्रवचन के बारे में अपने इष्ट मित्रों को भी बता दें, जिससे वे भी लाभ उठा सकें। सत्संग ध्यान ब्लॉग का सदस्य बने। इससे आपको आने वाले प्रवचन या पोस्ट की सूचना नि:शुल्क मिलती रहेगी।
S320, परा प्रकृति,अपरा प्रकृति,क्षर पुरुष,अक्षर पुरुष व सत्संग क्या है -महर्षि मेंहीं
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