प्रभु प्रेमियों ! सत्संग ध्यान के इस प्रवचन सीरीज में आपका स्वागत है। आइए आज जानते हैं-संतमत सत्संग के महान प्रचारक सद्गुरु महर्षि मेंहीं परमहंस जी महाराज के भारती (हिंदी) प्रवचन संग्रह "महर्षि मेंहीं सत्संग सुधा सागर" के प्रवचन नंबर S477, इसमें बताया गया है कि बिंदु ध्यान का यथार्थ रूप और ईश्वर-भक्ति व इष्टदेव और कर्मफल । मनुष्य अच्छा या खराब जो भी कर्म करता है, उसका फल उसे अवश्य प्राप्त होगा ? लेकिन बुरे कर्मों के फल व संचित कर्म ध्यान से नष्ट हो जाते हैं । ध्यान कैसे करें ? शास्त्रों में जो बताया गया है वह असली ध्यान 'बिंदु ध्यान' और नाद ध्यान है। बिंदु की जानकारी क्या है ? इस पर भी चर्चा किया गया है। बिंदु ध्यान करनें में स्वरूप बोध नहीं होता है लेकिन इससे ईश्वर है या इष्टदेव भुला नहीं जाता।
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| प्रवचन चित्र |
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| प्रवचन चित्र दो |
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| प्रवचन समाप्त |
प्रभु प्रेमियों ! गुरु महाराज के इस प्रवचन का पाठ करके आपलोगों ने जाना कि बिंदु ध्यान का यथार्थ रूप और ईश्वर-भक्ति व इष्टदेव और कर्मफल । इतनी जानकारी के बाद भी अगर आपके मन में किसी प्रकार का संका या कोई प्रश्न है, तो हमें कमेंट करें। इस प्रवचन के बारे में अपने इष्ट मित्रों को भी बता दें, जिससे वे भी लाभ उठा सकें। सत्संग ध्यान ब्लॉग का सदस्य बने। इससे आपको आने वाले प्रवचन या पोस्ट की सूचना नि:शुल्क मिलती रहेगी।
S477, बिंदु ध्यान का यथार्थ रूप और ईश्वर-भक्ति व इष्टदेव और कर्मफल -महर्षि मेंहीं
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